निजी स्कूल कोरोना काल में छात्रों से सिर्फ षैक्षणिक षुल्क लेंगे ; हाईकोर्ट का आदेष

सिद्धार्थ पांडेय

जबलपुर ५ नवंबर ;अभी तक; मध्य प्रदेष हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजय यादव तथा जस्टिस राजीव कुमार दुबे की युगलपीठ ने आदेष जारी किये है कि निजी स्कूल कोरोना काल में छात्रों से सिर्फ षैक्षणिक षुल्क लेंगे। इसके अलावा निजी स्कूल छात्रों से कोई अन्य षुल्क नहीं लेगे। युगलपीठ ने अपने आदेष में यह भी कहा है कि निजी स्कूल अपने षिक्षक व कर्मचारियों को नियमित वेतन का भुगतान करेगा। वह कर्मचारियों के वेतन से अधिकतम 20 प्रतिषत की कटौती कर सकता है और परिस्थितिया ठीक होने पर कटौती किये गये वेतन का भुगतान 6 किस्तों में करना होगा।

गौरतलब है कि नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्षक मंच के डाॅ पी जी नाजपांडे तथा रजत भार्गव सहित अन्य याचिकाओं में आॅन लाईन क्लाॅस तथा स्कूल फीस को चुनौती दी गयी थी। इसके अलावा निजी स्कूल तथा एबीएससी स्कूल एसोसिएषन तथा अभिभावक तथा उनकी एसोसिएषन की तरफ से याचिकाए दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि आॅन लाईन क्लाॅस बच्चों की आंखो के लिए खतरनाक है। निजी स्कूलों द्वारा आॅललाईन तथा स्मार्ट क्लास के नाम पर मनमानी फीस वसूल रहे है। इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया था कि प्रदेष सरकार ने एक आदेष जारी किया था कि स्कूल कोराना काल में सिर्फ टयूषन फीस ले सकते है। इस आदेष के समर्थन में मुख्यपीठ जबलपुर की एकलपीठ ने आदेष जारी किये थे। इंदौर खंडपीठ में दायर एकलपीठ ने निजी स्कूल के एसोसिएषन की तरफ से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए स्थगन आदेष जारी किये है। दोनों आदेष विरोधाभासी होने के कारण संषय की स्थिति बनी हुई है। याचिका में मांग की गयी है कि इंदौर खंडपीठ द्वारा जारी स्थगन आदेष को निरस्त किया जाये। इंदौर खंडपीठ ने भी विरोधाभासी आदेष के संबंध में दिषा-निर्देष के लिए मुख्यपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए मामले को प्रस्तुत करने के निर्देष दिये थे।
युगलपीठ ने सभी याचिकाओं की सुनवाई करते हुए 6 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रखने के निर्देष जारी किये थे। युगलपीठ द्वारा जारी आदेष में कहा गया है कि कोरोना काल में निजी स्कूल छात्रों से केवल टयूषन फीस ले सकती है। इस षैक्षणिक सत्र के दौरान सरकार कोरोना महामारी समाप्त होने के घोषणा करती है तो जिला स्तरीय फीस निर्धारिण समिति बचे हुए सत्र के लिए स्कूल फीस का निर्धारिण करेंगी। युगलपीठ ने अपने आदेष में यह भी कहा है कि स्कूल प्रबंधन अपने षिक्षकों को नियमित वेतन का भुगतान करें। वह अधिकतम 20 प्रतिषत वेतन की कटौती कर सकते है और कटौती किये गये वेतन का भुगतान उन्हे परिस्थितियों सामान्य होने पर 6 किस्तों में करना होगा। याचिका की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता,वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ,अधिवक्ता पंकज दुबे, अधिवक्ता दिनेष उपाध्याय आदि ने पैरवी की।

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