निसंतान दंपतियों की जीवन दायिनी है बैतूल की पूर्णा नदी* *हर साल नदी पर लगता है मेला

7:10 pm or November 11, 2022
मयंक भार्गव
बैतूल ११ नवंबर ;अभी तक;  नि:संतान दम्पत्ति के लिए जिले से निकलने वाली मां पूर्णा नदी वरदान है। ऐसी मान्यता है कि माँ पूर्णा से मन्नत मांगने पर नि:संतान दम्पत्ति के घर में संतान हो जाती है। मन्नत पूर्ण होने पर दम्पत्ति पालने में बच्चे को लेटाकर माँ पूर्णा के जल में (प्रतीक स्वरूप गोद में) लिटाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि ऐसे करने के बाद ही मन्नत की पूजा अर्चना पूर्ण होती है। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर यहां विशाल मेला लगता है जिसमें मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित छत्तीसगढ़ से नि:संतान दम्पत्ति मन्नत मांगने और मन्नत पूर्ण होने पर पूजा अर्चना के लिए हर साल आते हैं।
                   जिला मुख्यालय बैतूल से करीब 65 किमी. दूर भैसदेही के पास माँ पूर्णा नदी है। चंद्र पुत्री यानि चंद्रमा की कन्या कहलाने वाली यह नदी बैतूल के भैंसदेही कस्बे के पास से निकलती है। कार्तिक मास की पूर्णिमा से यहां पूरे एक पखवाड़े तक निसंतान दंपतियों और सुख समृद्धि की आस लेकर लोग मेले में आते हैं। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश से यहां श्रद्धालु आते हैं।
                   चंद्रपुत्री कहलाने वाली इस नदी की उत्पति के पीछे कई पौराणिक आधार और किवदंतियां कही जाती है। कोई इसे सप्तऋषियों की आराधना का फल बताता है तो कई मानते हैं कि इलाके मे फैले अकाल के बाद एक राजा की तपस्या के बाद भगवान शिव ने पूर्णा को यहां अवतरित कराया था। कहा जाता है कि कभी यह दूध की धारा के रूप मे बहा करती थी।