पं. शिवकुमार शर्मा (दादा) नहीं रहे; एक शख्स, सिन्धी समाज को वीरान कर गया 

महावीर अग्रवाल
मन्दसौर ५ नवंबर ;अभी तक; मालवा अंचल के सिन्धी समाज के प्रतिस्तिठ, विद्वान पंडित शिवकुमार शर्मा दिनांक 03 अक्टूबर मंगलवार को शाम 6 बजे अपने पंच भौतिक देह त्यागकर परम परमात्मा के श्री चरणों में लीन हुए**।
              इस आशय कि जानकारी पूज्य सिन्धी जनरल पंचायत के संयोजक पुरूषोत्तम शिवानी ने बताया कि सिन्धी समाज में पं. शिवकुमार शर्मा सत्यनिष्ठ, कर्तव्यनिष्ठ, भक्ति परायण सद्गृहस्थ व्यक्तित्व थे।
              आप पूज्य सिन्धी जनरल पंचायत के आशीर्वाददाता थे। उन्होने अपने सम्पूर्ण जीवन को बहुत ही सादगी पूर्ण और संयमित रूप से व्यतीत किया। प्रत्येम मानव, स्त्री, पुरूष, बच्चों व बुजुर्गों के प्रति आदर का भाव रखना और सबको सम्मान देना आपके चरित्र की विशेष योग्यता रही
आपने अपनी संतानों को भी धार्मिक संस्कार देकर उन्हें सत्य मार्ग पर चलने की राह दिखलाई। अब आप श्री इस नश्वर आतिथ्य संसार की यात्रा को समाप्त कर उस परम् परमात्मा अविनाशी नित्यलोक में भगवान के श्री चरणों में निवासरत है।
                   शिवानी ने बतलाया कि पं. शिवकुमार शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती कमलादेवी का निधन विगत 30 अक्टूबर शरद पूर्णिमा के दिवस हुआ था और चौथे दिन उनके मृत्यु के निमित्त ‘‘गुरू पुराण’’ के पाठों का आरंभ उनके  निवास स्थान पर ही हुआ जैसे ही पाठ के पारम्भ के बाद प्रसाद स्वरूप गंगाजल व तुलसी पत्र का प्रसाद उन्होने ग्रहण किया तब आपने परिवारजनों को बिठाकर कहा कि अब मुझे भी विदाई दो, मैं अब अन्न-जल ग्रहण नहीं करूंगा व दवाईयां लेना भी उन्होने बन्द कर दील।
                     आपने देह त्याग के पूर्व अपने पुत्र पं.भगवानीशंकर जो कि दुबई यू.ए.ई. में पौत्र जो पौलेण्ड में अध्ययनरत है उनसे मोबाईल पर विडियो काल के माध्यम से चर्चा कर खुब आशीर्वाद दिय यहां पर भी परिवार के सभी पुत्र-पुत्रवधु, पौत्र व पडपौ़त्र-पौत्रियों को आशीर्वाद प्रदान किया। अन्त समय में उनकी पौत्री सुश्री दिशा विनोद शर्मा ने गीता का वाचन किया व जैसे ही अन्तिम अध्याय समाप्त हुआ तो आपने पुछा की क्या समय हुआ है बच्चों ने कहा दादा शाम के 6 बजे है, दादा ने कहा अब बस चलते है और चीर निद्रा में सो गये।
                  शिवानी ने बताया कि वास्तव में पति-पत्नी का ऐसा अटूट स्नेह सम्बन्ध बिरला ही मिलता है। पांच दिवस में ही दोनो पति-पत्नी का इस नश्वर दुनिया को छोड़कर चले जाना। जिसने भी सुना उनके दिल में एक ही विचार आया कि जीवन साथी के साथ जीवन बिताने की प्रतिज्ञा हर पति-पत्नी करता है किन्तु जीवन के बाद भी साथ निभाना तो एक महापुरूष, संत महात्मा ही कर सकता है। और यह भी एक संयोग है कि शरद पूर्णिमा के दिन पत्नी का स्वर्गवास हुआ तो करवा चौथ को पति का।
                पं. शिवकुमार झमटराम शर्मा का परिवार सिन्धी समाज में पूज्यनीय व सम्माननीय परिवार रहा हैं सिन्धी हिन्दू सनातन धर्म व ज्योतिष विद्या व कर्मकाण्ड में आप विद्वान पंडित थे किन्तु आडम्बर, अहंकार से आप कोसो दूर रहे
                पं. शिवकुमार शर्मा ने अपने जीवन में सबसे पहले नारकोटिक्स विभाग कोटा में सर्विस की। उसके उपरान्त आपने खाद्य विभाग में निरीक्षक के पद पर रहते हुए मंदसौर, जावरा, रतलाम, इन्दौर, गुना, अलीराजपुर में शासकीय सेवा की। आप वर्ष 2000 में सेवानिवृत्त होकर अपना जीवन ज्योतिष व समाज के जजमानों की सेवा में रहे। खाद्य विभाग की सेवा में भी आप अपने सम्पूर्ण शासकीय सेवा में निस्सकलंक रहे।
                   ऐसी महान आत्मा के चले जाने से आज मंदसौर व मालवा अंचल का सिन्धी समाज अपने आपको अनाथ महसूस कर रहा है। प्रभु परमात्मा के श्री चरणों में यही अरदास ‘‘पल्लव’’ है ऐसी महान आत्मा को आपके श्री चरणों में स्थान प्राप्त हो।
दादा शिवकुमार के चले जाने से सिन्धी समाज के लिऐ अपूरर्णीय क्षति है।
                आपके जीवन की अंतिम यात्रा निवास स्थान प्रताप कॉलोनी से 4 नवम्बर, बुधवार को सुबह 10बजे प्रारंभ हुई। जिसमें कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक यशपालसिंह सिसौदिया,  नपाध्यक्ष राम कोटवानी सहित सिन्धी समाज व नगर के गणमान्य नागरिक सम्मिलित हुए।
मुक्तिधाम पर उनके पुत्र पं. मुकुन्द शर्मा, जगदीश, प्रकाश व पं. विनोद शर्मा ने मुखाग्नि देकर पिताश्री को अंतिम विदाई दी।
       *उठावना*
*पं. शिवकुमार शर्मा का स्वर्गवास हो गया है। जिनका चलायमान संयुक्त (महिला/पुरूष) उठावना (चलित पुष्पांजली) दिनांक 6 नवम्बर, शुक्रवार को सायं 4 से 5 बजे तक  पं. मदनलाल जोशी सभागृह, संजय गांधी उद्यान नईआबादी मंदसौर में रखा गया है*

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