पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत, पूजन अर्चन कर ली 108 परिक्रमा

10:09 pm or May 30, 2022

प्रहलाद कछवाहा

मंडला 30 मई ; अभी तक.  पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने सोमवार को वट सावित्री व्रत रखा। इसी दिन सोमवती अमावस्या और शनि जयंती भी मनाई गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थीं। सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा अर्चना कर पति की लंबी उम्र और सुख शांति की कामना की। वहीं नव विवाहिताओ ंमें वट सावित्री पूजा को लेकर खासा उत्साह देखा गया। वट वृक्ष को मौसमी फल अर्पित करने, कच्चे सूत से बांधने और पंखा से ठंडक पहुंचाने के बाद महिलाओं ने आस्था के साथ इसकी परिक्रमा की। पूजा के बाद वट सावित्री कथा भी सुनी।

                  बताया गया कि इस दिन कृतिका नक्षत्र सुबह छह बजकर 41 मिनट तक रहा, इसके बाद  रोहिणी नक्षत्र, सुधर्मा योग रात को 10 बजकर 53 मिनट और औदायिक योग स्थिर रहा। सोमवार के दिन अमावस्या होने से यह स्नान, दान और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत प्रशस्त दिन के रुप में मान्य है। मान्यता के अनुसार इसी दिन शनि का जन्म हुआ था। ऐसे में इस दिन शनि देवता को प्रसन्न करने के लिए शनि से संबंधित पदार्थों का दान और शनि देवता की विशिष्ट अर्चन किया जाता है।

वट सावित्री पूजन करना फलदायक :

व्रत रखने वाली महिलाओं के अनुसार इस व्रत को सबसे पहले सावित्री ने अपने पति सत्यवान की प्राण को यमराज से वापस मांगकर लाई थीं, तब से इस व्रत को सुहागिन करती चली आ रही है। वट सावित्री व्रत में महिलाएं 108 बार बरगद की परिक्रमा करती हैं। कहते हैं कि वट सावित्री पूजन करना बेहद फलदायक होता है। इस दिन महिलाएं सुबह से स्नान कर लेती हैं और सुहाग से जुड़ा हर श्रृंगार करती हैं, जब तक पानी नहीं पीती हैं जब तक वह पूजा नहीं कर लेती हैं। वट सवित्री के दिन महिलाएं त्यौहार की तरह अपने अपने घरों में भोजन के साथ पकवान भी बनाती हैं। वट वृक्ष पूजन में साल भर में जो 12 महिने होते है। उसके अनुसार सभी वस्तुएं भी 12 ही चढाई जाती हैं।