पदयात्रा के दौरान ही बंद रही खदाने 40 खदानों में बड़े स्त्र पर चल रहा है अवैध उत्खननन

भिण्‍ड से डॉ. रविशर्मा

23 सितम्बर,अभीतक :- सिंध नदी को बचाने के लिए पूर्व मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने सात दिन की पैदल यात्रा निकाली थी तब उत्‍खनन पूरी तरह से बंद हो गया था। लेकिन यात्रा को विराम मिलते ही माफिया फिर से नदी में सक्रिय हो गए हैं। पोकलेन, लिफ्टर, पनडुब्‍बी से नदी को खोद रहे इन माफियाओं को पावर मेक कंपनी ने खुली छूट दे दी है। माइनिग और पुलिस प्रशासन ने भी अब अपनी पूरी जिम्‍मेदारी कंपनी के हवाले छोड़ दी है, जिससे नदी में उत्‍खनन इस बार बारिश खत्‍म होने से पहले ही शुरू हो गया है। अंधेरा होते ही रेत का परिवहन प्रारंभ होता है और सड़कों पर ट्रैक्‍टर-ट्रॉली, ट्रक तथा डंपरों की लाइन लग जाती है।

डंप खत्‍म,  उत्‍खनन से पूर्ति :- रेत माफियाओं ने बारिश से पहले खेरा, श्‍यामपुरा, भारौली, अमायन, लहार की खदानों से रेत उत्‍खनन कर अवैध रूप से सड़कों के किनारे डंप कर लिए थे। डंप खत्‍म होने के बाद भी रेत के व्‍यापार में सक्रिय लोगों को कंपनी आसानी से रॉयल्‍टी दे रही है। हालांकि रॉयल्‍टी की दर 6 गुना तक बढ़ा दी है, जिससे भवन निर्माताओं को महंगे दामों में रेत खरीदनी पड़ रही है। शासन वउ प्रशासन से लेकर सरकार तक नदी में उत्‍खनन रोकने के लिए समाजसेवी और राजनैतिकों द्वारा लगातार प्रयास किए गए है, लेकिन लालच के पीछे अंधे हुए अधिकारी  अपनी जिम्‍मेदारी नहीं निभा रहे हैं। दस बारिश कल होने के कारण नदी में अभी से रेत खोदने का काम शुरू हो गया है। ऐसे में गर्मियों में नदी की स्थिति क्‍या होगी यह किसी से छिपी नहीं है।

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