पद्मावती महा पूजन दुखों का नाश करता है- साध्वी गुणरंजना ,

महावीर अग्रवाल
मन्दसौर / नीमच 10 अक्टूबर ;अभी तक; बघाना शक्तिनगर  स्थित पार्श्व पद्मावती धाम आराधना भवन में रविवार सुबह 8:40 से 2:00 बजे तक पद्मावती महा पूजन में विश्व शांति के लिए मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी गई । परम पूज्य साध्वी गुणरंजना श्रीजी की पावन निश्रा में  पद्मावती महा पूजन का भावार्थ भी समझाया ।
                   इस अवसर पर महिलाएं केसरिया लाल परिधान पहनकर पूरे मनोभाव से पूजन मैं सहभागी  बनी ।साध्वी गुण रंजना श्री जी मसा ने कहा कि पवित्र मन से पूजा करें तो वह सार्थक से धोती है पूजा करते समय मन और भाव दोनों शुद्ध होना चाहिए तभी आत्मा का कल्याण हो सकता है भक्ति विनायक विवेक का दिया जलाती है मन से की गई भक्ति पूजा दुखों का विनाश करती है संत सुधारने आते हैं संत गलत वृत्ति से बचाव कर सद्गति की ओर ले जाते हैं मां की भक्ति से दुखों का निवारण होता है भावेश भाव द्रव्य की पूजा उत्तम होनी चाहिए हम जैसे सामग्री स्वयं खाना पसंद करते हैं वैसे ही परमात्मा को चढ़ाना चाहिए हमारे मन में जो सामग्री नहीं आती जो सामग्री हमें नहीं आती हो वह हम परमात्मा को भी नहीं चढ़ाएं रवि सामग्री चढ़ाने के बाद परमात्मा के परमात्मा को समर्पित हो जाती है हमारी नहीं रहती है उस पर हमारा अधिकार नहीं रहता है आपका में हो जाए तो फल मिलेगा ही परमात्मा की भक्ति में समर्पित भाव से सेवा करें तो सही कर सकते हैं  ।
                   पद्मावती महा पूजन  यदि सच्चे और तन मन से किया जाए तो इस महामारी पर भी ब्रेक लग सकता है ।हमें पाप से भय  लगना चाहिए आदमी मन  से रोंगी  बन रहा है। तनाव में जी रहा है। ऐसे में पद्मावती महा पूजन सभी कष्टों से मुक्ति दिलाता है ।  ।हृदय में धर्म की प्रवृत्ति होती है ।देव गुरु धर्म परमात्मा के प्रति श्रद्धा समर्पण विश्वास हो तो आत्मा का कल्याण हो सकता है । ।जीव दया में पुण्य दान का पुरुषार्थ करना चाहिए। धर्म आराधना उपासना में कमजोर हृदय को मजबूत बनाना है । धार्मिक अनुष्ठान के सुभाष वीणा शेखर गरिमा गौरव आदिति लब्धि लक्ष्य  बापना  रामगंज मंडी   धर्म लाभार्थी  परिवार जनों का  मोती माला श्रीफल से सम्मान किया गया। पाठ पर श्रीफल अक्षत फल से    मांडना  की रंगोली सजाई गई।  दीपक प्रज्वलित कर   शंख घड़ियाल थाली बजाकर प्रसन्नता व्यक्त की गई ।विधि कारक पंकज जैन , भजन गायक फारुख बाबला ने जब कोई नहीं आता मेरे दादा आते हैं मेरे दुख के दिनों में वो बड़े काम आते हैं। मेरे घर के आगे प्रभु तेरा मंदिर बन जाए जब खिड़की खोलू तो तेरा दर्शन हो जाए। 5  विजेताओं को भाग्यशाली ड्रा निकालकर पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयम्बिल की तपस्या की लडी जारी है ।समाज जनों का सामूहिक स्नेह मिलन समारोह आयोजित किया गया।