पन्ना टाइगर रिज़र्व नाईट विजन ड्रोन से हुआ लैस,बाघों की पुख्ता हुई सुरक्षा व्यवस्था।

3:34 pm or December 31, 2021
पन्ना संवाददाता
पन्ना  ३१ दिसंबर ;अभी तक; –  पन्ना नेशनल पार्क के सुदूर क्षेत्रों में रात को भी निगरानी करने और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए प्रबंधन ने अपनी ड्रोन यूनिट में नाइट विजन ड्रोन को शामिल किया है । यह ड्रोन थर्मल इमेजिंग और इंफ्रारेड सेंसर युक्त कैमरों से लैस है थर्मल इमेजिंग तकनीकी युक्त कैमरे वन्यजीवों वा वनस्पतियों की गर्मी को अवशोषित कर उनका लाल और हरे कलर की इमेज बनाने में सक्षम हैं तो इंफ्रारेड तकनीक ऑब्जेक्ट की ब्लैक एंड वाइट तस्वीर उपलब्ध कराएगी।
                   पन्ना टाइगर रिज़र्व में रात का अंधेरा अब आड़े नही आएगा ओर यहाँबाघों की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता हुई है। पन्ना में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत बाघों की निगरानी भी शुरु हो गयी है। पीटीआर में इस समय करीब 70 बाघ मौजूद है। इस संबंध में आज उत्तम कुमार शर्मा (क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व)ने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है एक समय जब टाइगर रिजर्व बाघ विहीन हो चुका था और अब यहां पर 70 से भी अधिक बाघ हो चुके हैं जिस को ध्यान में रखते हुए इन बाघों की सुरक्षा पुख्ता करना भी विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी ।
                     इसी को ध्यान में रखते हुए अब टाईगर रिजर्व में  अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है जो मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में पहली बार हो रहा है।पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक का कहना है कि हमारे पास पूर्व में जो ड्रोन उपलब्ध हैं वह सिर्फ दिन के उजाले में ही काम करने में सक्षम हैं साथ ही उनकी क्षमता भी 2 किलोमीटर की ही है ऐसे हालात में शाम होने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखने केन नदी के 55 किलोमीटर के क्षेत्र सहित सुदूर सघन वन क्षेत्र की निगरानी में समस्या हो रही थी इसी को देखते हुए नाइट विजन ड्रोन को सुरक्षा दस्ते में शामिल किया गया है इस ड्रोन में थर्मल इमेजिंग और इंफ्रारेड सेंसर लगे हुए है थर्मल इमेजिंग सेंटर क्षेत्र में मौजूद वनस्पति वन्य प्राणी व इंसानों की शरीर की गर्मी के आधार पर उनकी लाल और हरे कलर की इमेज बनाएंगे ।
                  इसी प्रकार इन्फ्रा रेड तकनीकी आसपास मौजूद जीवो की ब्लैक एंड वाइट तस्वीर देगी इससे हम रात में भी वन्य प्राणियों के मूवमेंट पर निगरानी रख सकेंगे इसके साथ ही अनैतिक गतिविधियों पर और भी अधिक प्रभावी तरीके से रोक लगा सकेंगे।बतादे की पन्ना टाइगर रिजर्व ड्रोन तकनीकी से वन्यजीवों की निगरानी और प्रबंधन का कार्य राज्य सरकार की ओर से पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया गया था वह प्रयोग पन्ना में सफल रहा है। इसकी सफलता के बाद अब इससे प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व में भी शुरू करने की बात सामने आ रही है इस नए ड्रोन की क्षमता 20 मिनट में 4 किलोमीटर का सफर करने और इतना ही वापस लौटने की है इसमें कृत्रिम रूप से प्रकाश की व्यवस्था होने के कारण महत्वपूर्ण कार्यों में रात का अंधेरा आड़े नहीं आएगा और शाम होने के बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखना संभव हो सकेगा इसके साथ ही क्षेत्र में मछली मारने की गतिविधियों पर भी अब ज्यादा प्रभावी तरीके से रोक लग सकेगी।