पन्ना टाइगर रिज़र्व में हाथियों की दावत….छुट्टी मिलने पर हांथी कर रहे मौज-मस्ती

 पन्ना से दिलीप शर्मा दीपक
पन्ना: ७ अक्टूबर ;अभी तक;  आपने लोगो को तो दावत उड़ाते अक्सर देखा होगा….लेकिन क्या हाथियों को दावत उड़ाते देखा है…? जंगल व वन्य प्राणियों की सुरक्षा में तैनात रहने वाले पन्ना टाइगर रिजर्व के हाथियों का कुनबा इन दिनों छुट्टियां मना रहा है।हाथी न सिर्फ मौज-मस्ती कर रहे हैं अपितु विशेष स्वादिष्ट पकवानों का भी भरपूर लुत्फ़ उठा रहे हैं। हाथियों के इस कायाकल्प शिविर में उनके स्वास्थ्य का भी परीक्षण हो रहा है आखिर क्यों मना रहे हांथी छुट्टी देखे इस रिपोर्ट में,,,,
                  बिना छुट्टी लगातार काम करने का तनाव हर किसी को होता है, जानवर भी इससे अछूते नहीं हैं। इस तनाव को दूर करने के लिए कुछ दिन का अवकाश जरूरी होता है ताकि घूमना-फिरना व मौज- मस्ती कर तनाव मुक्त हुआ जा सके। ऐसा ही कुछ इन दिनों मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के हाथी कर रहे हैं। पर्यटन सीजन शुरू होने के साथ ही 1 अक्टूबर से यहां के सभी हाथी पूरे 7 दिनों की छुट्टी पर हैं। इनकी छुट्टी का आज आखरी दिन है । इन 7 दिनों के दौरान हाथी कोई भी काम नहीं किया, वे आपस में मेल-मिलाप कर स्वादिष्ट पकवानों का लुत्फ उठाते हुए मौज-मस्ती करते रहे, जिसमें उनके महावत व चारा कटर भी शामिल है।
                    पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि पर्यटन सीजन शुरू होने के साथ ही प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व जहां पर्यटकों के भ्रमण हेतु खुल गए हैं, वहीं 1 अक्टूबर से हमने पन्ना में हाथियों का रेजुविनेशन कैंप भी शुरू किया है। हमारे यहां 15 हाथियों का कुनबा है, इन सभी का एक हफ्ते विशेष रूप से ख्याल रखा गया। इस हफ्ते उनसे किसी भी प्रकार का कार्य नहीं लिया गया। सभी हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा उन्हें उनकी रुचि का भोजन व विशेष पकवान भी खाने को दिए गए। हाथियों के साथ महावत और चारा कटर जो उनसे जुड़े हुए हैं उनका भी स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा खेल-कूद और मनोरंजन की गतिविधियां आयोजित की गयी। सभी हाथियों को उनके स्वादिष्ट भोजन के रूप में उन्हें गन्ना, ड्राई फ्रूट व गुड़ के लड्डू, सेव फल, अनानास, केला व दलिया के लड्डू खिलाए गए। बतादें कि पूर्व के शुरुआती दिनों में यहां केवल तीन हथिनी वत्सला, रूपकली व अनारकली थीं। वर्ष 2002 सितंबर के महीने में नर हाथी रामबहादुर, हथनी गंगावती व 3 माह की मोहनकली को पन्ना टाइगर रिजर्व में लाया गया था।
                  मोहनकली ने यहां 3 बच्चों को जन्म दिया है जबकि रूपकली यहां 6 बच्चों को जन्म दे चुकी है। ये वही हांथी है जो पूरे वर्ष पन्ना टाइगर रिजर्व के वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा, मानसूनी गस्त, वन्य प्राणियों के उपचार, टाइगर ट्रेंकुलाइज ऑपरेशन जैसे कार्यों में संलग्न होते हैं। चूंकि पन्ना टाइगर रिजर्व तकरीबन 1500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जहां हाथियों के छोटे-छोटे समूह बनाकर आवश्यकतानुसार अलग-अलग कैंप बनाए जाते हैं। ताकि हाथियों की उपस्थिति लगभग पूरे टाईगर रिजर्व में हो सके। इससे सभी हाथी पूरे वर्ष एक दूसरे से नहीं मिल पाते तथा हाथी महावतों की भी आपस में मुलाकात नहीं हो पाती। कायाकल्प शिविर के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी हाथी एवं महावत व चारा कटर एक स्थान पर रहकर 7 दिनों तक बिना कार्य के तनावमुक्त रहें।