पर्यवेक्षक को रिश्वत लेने पर चार-चार वर्ष की सजा व 20 हजार रूपये जुर्माना

सुनील वर्मा
शाजापुर ६ सितम्बर ;अभी तक;  न्यायालय विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम शाजापुर श्री मनोज कुमार शर्मा, द्वारा आरोपिया प्रियंका चौहान तत्कालीन पर्यवेक्षक(सुपरवाइजर) महिला एवं बाल विकास विभाग  कार्यालय बडौद, जिला आगर मालवा को दोषसिद्ध पाते हुए धारा 7 भ्र.नि.अ. 1988 के अंतर्गत 4 वर्ष के सश्रम कारावास और 10,000/- रूपये के अर्थदण्ड से तथा धारा 13(1)डी, सहपठित धारा 13(2) भ्र.नि.अ. 1988 के अंतर्गत 4 वर्ष के सश्रम कारावास और 10,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है।
                 जिला मीडिया प्रभारी सचिन रायकवार एडीपीओ शाजापुर ने बताया कि, आवेदिका कमलाबाई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ग्राम खेड़ा नरेला तहसील बड़ोद जिला आगर मालवा से आरोपिया ने 20,000/- रुपये रिश्वत की मांग की ओर कहा की यदि वह उसे उक्त रिश्वत जो आवेदिका के चार माह के वेतन के बराबर हो रही थी, आरोपिया को नहीं देगी तो आरोपिया आवेदिका को नोटिस देकर उसके खिलाफ कार्यवाही कर उसे नोकरी से हटाकर उसकी सेवा समाप्त करा देंगी। उक्त के संबंध में आवेदिका ने  दिनांक 11.09.2017 को विपुस्था लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को  लिखित शिकायत आवेदन दिया जिस पर लोकायुक्त उज्जैन द्वारा सम्पादित  डिजिटल वाइस रिकार्डर  की कार्यवाही के दौरान दिनांक 12/09/2021 को आरोपिया ने आवेदिका से पुनः उक्त रिश्वत की मांग की और आवेदिका ने लगभग 2 से 2.30 घंटे तक काफी मिन्नते की फिर भी आरोपिया आवेदिका से उक्तानुसार  बारबार  20,000/- रुपये रिश्वत की मांग करती रही।  दिनांक 14/09/2017 को आंगनवाड़ी केंद्र ग्राम बिलिया तहसील बडौद जिला आगर मालवा में 20,000/- रूपये रिश्वत राशि आरोपिया ने आवेदिका  कमलाबाई से प्राप्त  की जो आरोपिया प्रियंका चौहान से ट्रेप कार्यवाही के दौरान जप्त की गई।
                 तत्कालीन उप पुलिस अधीक्षक विपुस्था लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन के श्री संजय जैन द्वारा प्रकरण में ट्रेप आयोजित किया जाकर उक्त कार्यवाही की गई थी  । विपुस्था लोकायुक्त  उज्जैन की ओर से प्रकरण में चालान प्रस्तुत किये जाने पर     अभियेाजन की ओर से    गवाह कराये गये। प्रकरण के पैरवीकर्ता विशेष लोक अभियोजक सचिन रायकवार एडीपीओ शाजापुर ने प्रकरण में मौखिक व लिखित तर्क प्रस्तुत किये जिनसे सहमत होते हुए माननीय
न्यायालय द्वारा आरोपिया को दण्डित किया गया। विपुस्था लोकायुक्त उज्जैन के आरक्षक संदीप कदम के द्वारा सराहनीय सहयोग किया गया ।