पर्यावरण संरक्षण: भारतीय रेलवे पर विद्युतीकरण

महावीर अग्रवाल
मंदसौर ५ जून ;अभी तक;  भारतीय रेल दुनिया में सबसे बड़ी हरित रेलवे बनने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है और 2030 से पहले “शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जक” बनने की ओर बढ़ रही है। रेलवे पर्यावरण अनुकूल, कुशलता, लागत प्रभावी,समयपालनता के समग्र दृष्टिकोण द्वारा निर्देशित है तथा  न्यू इंडिया की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए  यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई का एक आधुनिक वाहक है। बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण हो या दिन प्रतिदिन जल एवं कागज की बचत हो या रेलवे ट्रैक पर जानवरों को घायल होने से बचाने के उपाय ही क्यों ना हो, भारतीय रेल अपने सबसे बड़े से लेकर सबसे छोटे कदमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपना योगदान दे रही है।
रेलवे विद्युतीकरण की गति, जो पर्यावरण के अनुकूल है और प्रदूषण को कम करती है, की गति 2014 के बाद से लगभग दस गुना बढ़ गई है। रेलवे ने ब्रॉडगेज मार्गों के 100% विद्युतीकरण को प्राप्त करने के लिए दिसंबर, 2023 तक शेष बचे ब्रॉड गेज (बीजी) मार्गों का विद्युतीकरण करने की योजना बनाई है।  इससे डीजल ट्रैक्शन को खत्म करने में आसानी होगी जिसके परिणामस्वरूप  कार्बन फुटप्रिंट और पर्यावरण प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी।
   पश्चिम रेलवे पर, 2014 से 2021 के दौरान गुजरात में 1515 किमी, महाराष्ट्र में 279 किमी, मध्य प्रदेश में 623 किमी और राजस्थान में 82.53 किमी ट्रैकों का विद्युतीकरण किया गया है।
विद्युतीकरण कई लाभ प्रदान करता है जैसे :-
• पर्यावरण अनुकूल परिवहन का साधन
• आयातित डीजल ईंधन पर कम निर्भरता, जिसके परिणामस्‍वरूप कीमती
  विदेशी मुद्रा की बचत और कार्बन फुटप्रिंट में कमी
• कम परिचालन लागत
• इलेक्ट्रिक इंजनों की उच्च ढुलाई क्षमता वाली भारी मालगाड़ियों और लंबी
  यात्री ट्रेनों की ढुलाई से थ्रूपुट में वृद्धि
• कर्षण परिवर्तन के फलस्‍वरूप डिटेंशन को समाप्त करके सेक्‍शनल क्षमता में वृद्धि
• इलेक्ट्रिक लोको की परिचालन और रख-रखाव लागत में कमी
हेड ऑन जनरेशन (HOG): भारतीय रेल ‘हेड ऑन जेनरेशन’ (HOG) सिस्टम का भी प्रयोग कर रही है, जिसके तहत लोकोमोटिव के माध्यम से सीधे ओवर हेड इक्विपमेंट (OHE) से कोचों को बिजली की आपूर्ति की जाती है। यह ट्रेनों में अलग पावर कारों की आवश्यकता को समाप्त करता है और इस प्रकार अतिरिक्त कोचों की आवश्यकता को कम करता है और दक्षता बढ़ाता है। कार्बन फुटप्रिंट में प्रतिवर्ष 31,88,929 टन की कमी आएगी। पावर कारों को समाप्‍त करने के परिणामस्‍वरूप 2,300 करोड़ रुपये की ईंधन लागत में भी बचत होगी।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री सुमित ठाकुर ने बताया कि पश्चिम रेलवे ने एचओजी सिस्टम पर चलाने के लिए 96 एलएचबी रेक और 2 गैर-एलएचबी ईओजी रेक परिवर्तित किए हैं। मार्च, 2021 में पश्चिम रेलवे ने एचओजी परिचालन के ज़रिये 75 विशेष ट्रेन जोड़ी चलाकर वास्‍तविक शुद्ध बचत में 1082 करोड़ रु. हासिल किये। पिछले वर्ष 2019-20 (अप्रैल 2019 से मार्च 2020) की 46.76 करोड़ रुपये की तुलना में वित्‍तीय वर्ष 2020-21 (अप्रैल 2020 से मार्च 2021) के दौरान संचयी शुद्ध बचत 66.08 करोड़ रुपये है यानी शुद्ध बचत में 43.31% की वृद्धि हुई है।