पवन चक्कियों से उत्पादित हो रही अधिकांश बिजली विद्युत मंडल खरीद रहा है महंगे दाम पर जबकि थोड़ी बिजली खरीद रहा है कम दाम पर क्यो 

On Thu, 24 Jun 2021, 5:39 pm Mahavir Agrawal, <mahavirmds1951@gmail.com> wrote:
    ( महावीर अग्रवाल )
मंदसौर २४ जून ;अभी तक;  मध्य प्रदेश का मंदसौर जिला एक ऐसा जिला है जिसमें जल ,वायु और सूर्य की रोशनी तीनों से बिजली बन रही है ।मोटे तौर पर देखें तो कोई 1100 मेगा वाट से अधिक बिजली का उत्पादन प्रकृति की इन तीनों देन से इस जिले में हो रहा है ।सबसे बड़ा पवन से बिजली के उत्पादन के लिए इस जिले में एक प्रकार से पवन चक्कियों का जाल बिछा है ।इस जिले में कितनी पवन चक्कियां लगी है और कीतना उनसे बिजली का उत्पादन हो रहा है , विद्युत मंडल इन विंड कंपनियों से अलग-अलग दर पर किस प्रकार बिजली की खरीदी कर रही है यह चौंकाने वाली बात जरूर हो सकती है। यह तो कोई नहीं जानता होगा हां लेकिन ईसकी  उच्च स्तरीय जांच से जरूर स्थिति साफ हो सकती है।  एक विंड कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी ने बेबाकी से बताते हुए कहा कि इसमें जिले में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार की गंगा भी एक जांच का विषय है।  वे यह भी बताते हैं कि इससे सरकार की भी मिलीभगत है। इन पवन चक्कियों  के लिए पवन की  स्थिति भी देखें तो जिले के ही मल्हारगढ़ वह भानपुरा तथा महज मंदसौर से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नीमच तक में इसकी गति नहीं पहुंच पा रही है।मंदसौर जिले में विंड कंपनियों को सरकार ने शर्तों के साथ अनुमति दी है। ऐसा बताया जाता है लेकिन उनका पालन होता तो जानकार यह भी बताते हैं कि उन गांवों की काया ही पलट जाती।
                 मध्य प्रदेश विद्युत मंडल मंदसौर के अधीक्षण यंत्री श्री मनोज शर्मा ने बताया कि मंदसौर जिले में नो पहुंच अंखियों से 5.4 मेगावाट बिजली ₹4 35 पैसे 17 पंक्तियों से 23.2 मेगावाट बिजली ₹4 क्षेत्र पैसे व 352 पंचों से 584 मेगावाट बिजली ₹5 बानू पैसे प्रति यूनिट विद्युत मंडल बिजली ले रहा है इन पंछियों से 220 से 132kv की बिजली का उत्पादन हो रहा है अब यहां देखिए सबसे अधिक कौन चक्रों से सबसे अधिक महंगी बिजली खरीदी जारी है क्यों इस प्रकार 370 पंक्तियों से मंडल 612.6 मेगावाट बिजली खरीदना है जिले के आज प्लांटों से 372 मेगावाट बिजली का उत्पादन सौर ऊर्जा से हो रहा है इनमें से 12 प्लांट की बिजली ही मंडल खरीदता है 20 मेगावाट बिजली 6.98 पैसे 12 मेगा वाट बिजली 5.45 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदता है।
              मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम के कार्यपालन यंत्री श्री अजय शुक्ला से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंदसौर जिले में 401 पवनचक्कीयो से 666 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है ।श्री शुक्ला ने बताया कि नीमच जिले में हवा की स्थिति सूटेबल नही है । सर्वेक्षण किया था जनरेशन में  वांछित उत्पादन नही मिला है । इस जिले में पवन स्रोत की उपयुक्तता नही है। उन्होंने बताया कि निमाड़ व बड़वानी में भी यही स्थिति है जिससे वहां भी पवन चक्कियां नही लगी है। उन्होंने बताया कि ये पवन चक्कियां जिन गांवों में लगी है उनमें तय शर्तों के अनुसार कारपोरेट सोशयल रिंस्पांसिबिलिटी के तहत 2 या 3%अपने लाभ का वहां के विकास के कामो पर खर्च करती है जो ये कर रही है।
               जिला बीजेपी के उपाध्यक्ष श्री शिवराजसिंह घटावदा का कहना है कि रेवास देवड़ा गांव में काफी बड़ी संख्या में पवन चक्कियां लग गई लेकिन इनके द्वारा प्रतिवर्ष अपने लाभ का 3 % गांव के सोशयल वेलफेअर के कामो पर करना चाहिए था लेकिन नही किया गया। इन विंड कम्पनियों ने गांव वालों को बड़े बड़े सपने दिखाए थे लेकिन कोई काम नही किये। स्कूल ,धार्मिक स्थानों पर या गांव में कही लेम्प लगाने तक का काम नही किये। इन कम्पनियों ने लाखों रु का भुगतान वेंडरों का नही किए। उन्होंने कहा कि ये लोग काम होने तक किसी भी हद तक शर्तों को मान लेते है और बाद में मना कर देते है।
             शासन ने मंदसौर जिले में 2012 से व रतलाम जिले में2014- 2015 से पवन चक्कियां लगाने की स्वीकृति देना प्रारंभ की । नीमच जिले में पवन चक्कियां नही लगने के पीछे निगम मंदसौर के सुपरवाइजर बताते है कि इस जिले में विंड मॉनिटरिंग स्टेशन लगाया जाना है । जीरन में इसे लगाकर देखा था अपेक्षित हवा की स्पीडवे डायरेक्शन नही मिला।
                एक विंड कम्पनी के जिम्मेदार अधिकारी ने बड़ी बेबाकी से बताया कि रेवासदेवड़ा में 45 पवन चक्कियां लगी है। इन्हें 3%आय का गांव की सोशल एक्टिविटी पर खर्च करना होता है लेकिन नही किया जाता है। इनमें सरकार की मिली भगत होती है।ऊपर से निचे तक पैसा बटता है। उन्होंने ने तो एक पवन चक्की से होने वाली आय तथा किन नेताओं से सम्बंधित है तक कि चर्चा की है। इन पवन चक्कियों पर काम करने वाले एक ठेकेदार ने बताया कि 5 वर्ष हो गए उसने इनके लिए जो निर्माण कार्य किया था उसका भुगतान अभी तक बाकी है। पुलिस के पास जाओ तो वह भी नही सुनती । इनके खिलाफ पुलिस किसी की भी नही सुनती।
                  अक्षय ऊर्जा के मंदसौर जिला अधिकारी श्री एस एल बाजार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मंदसौर जिले में 6विंड कम्पनी की पवन चक्कियां निजी जमीनों पर,एक विंड कम्पनी की वन विभाग की जमीन पर व 5 विंड कम्पनी की पवन चक्कियां निजी व राजस्व की जमीन पर लगी है। ऐसी स्थिति में जब निजी जमीनों पर लगी पवन चक्कियों के मालिक शर्तों के तहत गावो में सोशयल वेल फेअर के काम नही करवा रहे है तो फिर राजस्व व वन विभाग की जमीन पर लगी चक्कियों की स्थिति क्या होगी यह शासन ही जाने। यही स्थिति रतलाम जिले में लगी पवन चक्कियों की है।
                   5 विंड कंपनियों द्वारा लगाई गई पवन चक्कियों से 386.7 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है जबकि रतलाम जिले में 15 विंड कंपनियों द्वारा लगाई गई पवनचक्की उसे 718. 35 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। अधिकृत जानकारी से स्पष्ट है कि विंड कंपनियों द्वारा पवन चक्की से बिजली का उत्पादन व विद्युत मंडल द्वारा खरीदी जा रही बिजली में अंतर है यह अंतर क्यों है। बाकी बिजली का क्या हो रहा है । दूसरी सबसे बड़ी गड़बड़ी अधिक मेगावाट बिजली अधिक महंगी दर से क्यो खरीदी जा रही है । क्या यह बिजली उच्च गुणवत्ता की है और बाकी हल्के किस्म की है।  क्या कारण है। एक और उर्जा विकास निगम ने जिले में 401 पवन चक्कियां लगना बताई है जबकि विद्युत मंडल द्वारा 378 पवन चक्कियों से ही बिजली खरीदना बताया गया है । रतलाम जिले के पिपलोदा मंदसौर जिले के दलोदा में लगी कुल 152 पवन चक्कियों  की संख्या कम कर दी जाए तो एक 249पवन चक्कियों से 395.5 मेगावाट बिजली उत्पन्न होना बताई गईहै जबकि मंडल 378 मेगावाट बिजली खरीद रहा है ।पवन चक्कियों से प्रतिदिन उत्पादन की जा रही बिजली और  खरीदी जा रही बिजली की मात्रा में अंतर क्यों है । क्या यह बड़ी गड़बड़ी है जो जांच का विषय है।
   कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जहां हवा है उन क्षेत्रों में पाली हाउस नही लगाए जा सकते है। उद्यानिकी विभाग मंदसौर के सहायक संचालक श्री मनीष चौहान ने बताया कि मंदसौर जिले में 9 किसानों को 2.49 हेक्टर में पॉलीहाउस की स्वीकृति दी है। इन्हें 844 रु प्रति वर्गमीटर की लागत का 422 रु प्रतिवर्गमीटर अनुदान दिया जाता है। ये इन पॉलीहाउस में टमाटर,खीरा, शिमला मिर्च, मीर्च आदि की फसल लेते है। लेकिन एक और पवन चक्कियों को मंजूरी तो दूसरी और पॉलीहाउस की मंजूरी का कोई जवाब नही है। नीमच जिले में जहां कोई पवन चक्की नही लगी है वहा 1-1 हजार वर्गमीटर 45 पॉलीहाउस की मंजूरी दी गई थी इनमें से ज्यादातर वर्किग में नही है । उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक श्री नारायणसिंह कुशवाह ने बताया कि वर्तमान में करीब 20 पॉलीहाउस है बाकी मेंटेनेंस के अभाव में बंद हो गए। इन पॉलीहाउस को शासन के नियमों के तहत 50 प्रतिशत अनुदान दिया है। हवा के मामले को लेकर उनका कहना है कि नीमच जिले में हवा इश्यू नही है।मालवा में ज्यादा हवा नही है। उन्होंने कहा कि पॉलीहाउस में पालीथिन की उम्र 4 वर्ष रहती है फिर इसे बदलना पड़ता है।