पशु आहार तथा मुर्गीदाना में उपयोग किये जाने योग्य चांवल प्रदाय करने का मामला वर्ष 2015 से निरंतर चलाया जा रहा

आनंद ताम्रकार
बालाघाट १९ सितम्बर ;अभी तक;  बालाघाट जिले में अमानक स्तर का पशु आहार तथा मुर्गीदाना में उपयोग किये जाने योग्य चांवल प्रदाय करने का जो मामला प्रकाश में आया है इसका सिलसिला विगत वर्ष 2015 से निरंतर चलाया जा रहा है।
                    राईस मिलर्स एवं आपूर्ति निगम के भोपाल तथा क्षेत्रिय कार्यालयों में वर्षों से जमे वरिष्ठ अधिकारियों की सांठगांठ के चलते ऐसे घोटालों की संरचना की जा रही है एवं उनका खुला सरंक्षण मिला हुआ है।
                  इन अधिकारियों द्वारा अमानक चांवल के लाट पास करने के एवज में वसूली जा रही रकम का बटवारा जिला स्तर से लेकर मुख्यालय स्तर तक होने से किसी ने भी ऐसे घोटालों पर अपनी जबान तक नही खोली।
               इन्ही विसंगतियों के चलते बदस्तुर यह सिलसिला चलाया गया लेकिन इस संबंध में की गई एक शिकायत के आधार पर केन्द्रीय शासन के खादय मंत्रालय के उपायुक्त द्वारा औचक निरीक्षण करने एवं गोदामों में भण्डारित चांवल का नमूना लेकर उनका परीक्षण कराये जाने के बाद पषु आहार एवं मुर्गीदाना तुल्य चांवल की क्वालिटी प्रदाय किये जाने का प्रदेश स्तर पर अधिकारियों के खुले सरक्षण में किये जा रहे इस घोटाले का पर्दाफष हुआ। तब से अब तक सरकार आरोपों के कटघरे में और सवालों के घेरे में फस गई है।
आनन फानन में आर्थिक अपराध शाखा से इस घोटाले की जांच के आदेश जारी होने के बाद प्रथम दृश्टया जांच में जो तथ्य जांच एंजेसी के समक्ष आये है उनसे सरकार सकते में आ गई है।
                     सरकार में बैठे नामचीन चेहरों एवं आपूर्ति निगम के मुख्यालय में वर्षों से जमे अधिकारियों की नींद हराम हो चुकी है नतीजतन जांच को धीमी रफतार से करने और मामले को रफा दफा कर देने का सिलसिला चल पडा है।
                 बालाघाट जिले से वर्ष 2015 में विदिशा जिले में 2500 मैटिक टन चांवल रैंक के माध्यम से भिजवाया गया था भेजा गया चांवल पूर्णत अमानक और खाये जाने योग्य नही था ऐसा चांवल बालाघाट जिले की 30 राईस मिलों द्वारा प्रदाय किया गया था। इस चांवल को वरिष्ट स्तर से जांच किये जाने के बाद राईस मिलर्स से अपगे्ड करवाया गया।
                   इस मामले की जांच निगम के तत्कालीन महाप्रबंधक श्री अभय अरविन्द बेडेकर द्वारा की गई थी और प्रदाय किये गये चांवल का गुणवत्ता परीक्षण किया गया था।
                उन्होने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट तत्कालीन प्रबंध संचालक को प्रस्तुत की थी उक्त रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन महाप्रबंधक उपार्जन श्री सुभाष कुमार द्विवेदी ने पत्र क्रमांक 1089 दिनांक 21 अगस्त 2015 के माध्यम से चांवल उपार्जन किये जाने संबंधित महत्वपूर्ण दिषानिर्देश जारी किये थे।
जारी किये गये दिशा निर्देशों में यह उल्लेखित थाः-
1. राईस मिलर्स को परिवहन के भुगतान में टोल टेक्स नाके की रसीद की प्रति प्राप्त करने का अनुबंध में प्रावधान है अत लेखा परीक्षण के दौरान इस संबंध में पुष्टि करा ली जाये की राईस मिलर्स द्वारा परिवहन के देयको में टोल टेक्स नाके की रसीद लगाई गई अथवा इस शर्त का उल्लघंन किया गया है।
2. राईस मिलर्स द्वारा अमानक स्तर का चांवल धान मिलिंग करने के उपरांत दिया गया है उन्हें तत्काल चांवल वापस कर निर्धारित गुणवत्ता का चंावल प्राप्त करने/चांवल अपग्रेड करने की कार्यवाही राईस मिलर्स की हर्जे खर्चे पर की जाये।
3. चांवल वापसी कार्य हेतु राईस मिलर्स को 7 दिवस की समय सीमा दी जाये।यदि राईस मिलर्स द्वारा समय सीमा पर कार्य नही किया जाता तो राईस मिलर्स के हर्जे खर्चे पर  अपग्रेड कराने की कार्यवाही की जाये।
4. सीएमआर का प्रथम बिल पाइंट पर निरीक्षण मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ के गुणवत्ता निरीक्षक से कराया जाना था। इस आधार पर अमानक स्तर का चांवल किस किस गुणवत्ता निरीक्षकों द्वारा निरीक्षण किया गया था उन पर प्रशानिक कार्यवाही की जाये। निगम के जिन गुणवत्ता निरीक्षकों द्वारा अमानक स्तर का चांवल प्राप्त किया गया है उन पर प्रशासनिक कार्यवाही हेतु प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जाये।
5. राईस मिलर्स पर धान मिलिंग के लिये अनुबंध की शर्तों के अनुसार सख्त कार्यवाही की जाये एवं सतत माॅनिटरिंग की जाये। जिससे बार बार इस तरह के अमानक स्तर का चांवल देने की पूनरावृत्ति राईस मिलर्स द्वारा बालाघाट में ना की जाये।
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त की गई उल्लेखित जानकारी प्राप्त हुई है जारी किये गये दिशा निर्देशों के आधार पर यदि प्रभावी कार्यवाही की जाती और उन्हें अमल में लाया जाता तो अमानक स्तर का चांवल प्रदाय किये जाने की कारगुजारियों पर अंकूष लगाया जा सकता था लेकिन कार्यवाही करना तो दूर दिशा निर्देशों को दरकिनार रखते हुये अमानक स्तर और पशु आहार तुल्य चांवल प्रदाय करने का सिलसिला अनवरत चलता रहा है आज तक ऐसे मामलों में ना तो किसी राईस मिलर्स का नाम काली सूची दर्ज किया गया और ना ही किसी गुणवत्ता निरीक्षण जिला प्रबंधक पर कोई कार्यवाही नही की गई।
यह उल्लेखनीय है चांवल उपार्जित करने के चंद महीनों के अंतराल में तयशुदा कमीशन राशि जो लाट पास करने के नाम पर वसूली जाती है अकेले बालाघाट जिले में 4 करोड रूपयों के लगभग होती है जिसका बटवारा जिला स्तर से लेकर भोपाल तक किया जाता है।कमीशन की राशि में से जिले के आला अफसरो, जनप्रतिनिधियों तथा राजनीतिक दल के नेताओं सहित मुख्यालय में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियो को उनकी अपेक्षा अनुसार पहुंचाया जाता है।
तभी तो इस तरह का घोटाला केवल बालाघाट ही नही प्रदेश के चांवल उत्पादक अन्य जिलों में किया जा रहा है।

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