पाली हाउस बनाकर डच रोज (गुलाब की एक किस्म) की खेती कर रहे, जिसकी मांग दिल्ली, जयपुर सहित अनेक बड़े शहरों में

भिण्‍ड से डॉ. रवि शर्मा-

भिंड ५ मार्च ;अभी तक; चंबल का नाम आते ही जेहन में डाकू वाले बीहड़ की छवि आती है, लेकिन वहां अब भी बदलाव की महक है। भिंड शहर के जामना रोड निवासी 40 वर्षीय योगेंद्र सिंह यादव ने पाली हाउस बनाकर डच रोज (गुलाब की एक किस्म) की खेती कर रहे हैं, जिसकी मांग दिल्ली, जयपुर सहित अनेक बड़े शहरों में है। एक साल में चंबल का यह गुलाब देशभर में महका है। प्रशिक्षित कारीगरों के साथ यादव इस प्रयोग से प्रतिमाह एक लाख रुपये तक कमा रहे हैं। वहीं आधुनिक खेती के लिए किसानों को निशुल्क प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर भी बना रहे हैं।

यादव का कहना है उन्हें बचपन से ही गुलाब पसंद था। तब घर के गमलों में तरह-तरह के गुलाब लगाया करते थे। बाद में जिला उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन दिया और इसे बतौर व्यवसाय अपना लिया। अगस्त 2019 मेंं जामना रोड पर डेढ़ बीघा जमीन पर पाली हाउस तैयार कराया। पुणे से डच रोज के 20 हजार पौधे मंगाए। तीन माह में ही जनवरी 2020 में इन पौधो में गुलाब आने लगे। दिल्ली, जयपुर, आगरा सहित अन्य बड़े शहरों के फूल व्यापारियों से बात कर सप्लाई शुरू कर दी।

दो दिन में तैयार होते हैं 25 बंच

यादव ने बताया डेढ़ बीघा जमीन में लगे 20 हजार डच रोज के पौधों से दो दिन में 25 बंच तैयार होते हैं। 20 फूलों का एक बंच होता है। एक फूल की कीमत 20 रुपये तक मिल जाती है। शादी समारोह एवं त्योहारों के समय 25 से 30 रुपये तक बिक जाता है। इस हिसाब से हर माह डेढ़ लाख रुपये की बिक्री हो जाती है। फूलों की देखरेख के लिए नियुक्त कर्मचारी, बिजली, पैकिंग से लेकर मंडी तक पहुंचाने का खर्च निकालकर करीब एक लाख रुपये का मुनाफा हर माह होता है।

तीन दिन तक नहीं होते खराब

तोड़ने के बाद तैयार होने वाले बंच में ये फूल तीन दिन तक खराब नहीं होते। इन्हें स्टोरेज करने बाद फूल मंडी में बेचा जाता है। जो लोग पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक खेती अपनाना चाहते हैं, उनके लिए डच रोज की खेती काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

 

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