पाश्चात्यसंस्कृति में गले तक डूब कर आध्यात्मिकता की चर्चा करना धर्म आत्मा और परमात्मा के साथ धोखा है- श्री कमलमुनि जी

3:19 pm or July 25, 2022
महावीर अग्रवाल

मंदसौर २५ जुलाई ;अभी तक;  भौतिकवाद कि पाश्चात्यसंस्कृति में गले तक डूब कर आध्यात्मिकता की चर्चा करना धर्म आत्मा और परमात्मा के साथ धोखा है। उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने जैन दिवाकर प्रवचन हाल में  व्यक्त किए। संतश्री ने शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि शहीदों का लक्ष्य देश को सिर्फ़ आजाद कराना नहीं था बल्कि इसे ऊंचाइयों के शिखर पर पहुंचाने का था। उन्होंने खून बहाया हम कम से कम पसीना तो बहाए। आज हमारी दैनिक जीवन शैली में महापुरुषों के सिद्धांतों के साथ सौतेला व्यवहार नजर आ रहा है। महापुरुषों के आध्यात्मिक ज्ञान के सहारे निर्मित भारतीय संस्कृति का लोहा पूरा विश्व मान रहा है विज्ञान की कसौटी पर शत-प्रतिशत खरा उतर रहा है। पूरेविश्व के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
मुनि कमलेश ने बताया कि भोग वादकी पाश्चात्य संस्कृति ने लोग अशांति और तनाव दिया है विदेशी लोग इससे ऊब चुके हैं और वहां योग मौन ध्यान साधना को अपना रहे हैं।राष्ट्रसंत श्री ने कहा कि यूरोप देश पाश्चात्य संस्कृति को थूक रहे हैं और हम उसे चाट रहे हैं। इससेशर्मनाक बात और क्या हो सकती है।

जैन संत ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति का हमला आतंकवाद से अनंत गुना ज्यादा खतरनाक है। यें हमारे संस्कार संस्कृति और सभ्यता को कुचल रहा है। भारतीय संस्कृति विश्व को सच्ची सुख और शांति प्रदान कर सकती है। भौतिकवाद की चकाचौंध में हम जैसे संतों का निर्माण होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह भारतीय संस्कृति की देन है।
विश्व हिंदू परिषद की ओर से राष्ट्र संत कमलमुनि जी को  साहित्य भेंट कर अभिनंदन किया गया।
इस मौक़े पर गुरु चरण बग्गा, प्रदीप चौधरी,  नवनीत पारिख, प्रतीक व्यास,  विनोद जाट, अमरदीप कुमावत, मनीष भाटी आदि कार्यकर्ता ने मुनि श्री का मार्गदर्शन प्राप्त किया।  ट्रिपल सी घनश्याम मुनि जी की आज 15 उपवास की तपस्या चल रही है।
स्थानक में अखंड महामंत्र नवकार का जाप प्रतिदिन चल रहा  है।
संचालन महामंत्री विजय खटोड़ ने किया। स्वागत अभय चोर्डिया, प्रकाश रातडिया, सुभाष नाहर ने अतिथियों का स्वागत किया।

अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली महिला शाखा राष्ट्रीय मंत्री शिखा जैन मुनि कमलेश की प्रेरणा से चार वात्सल्यधाम जोधपुर सूरत बेंगलुरु इंदौरसंचालित कर रही है जिसमें करीब 300 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। इनका भी सम्मान किया गया।