पिछडा वर्ग के लिये अरक्षित महापौर पद पर कांगे्रस उम्मीदवा ब्राम्हण परिवार से मैदान में उतरी, भाजपा पशोपेश में

4:40 pm or June 10, 2022
मयंक शर्मा
खंडवा १० जून ;अभी तक;  मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गुरुवार देर शाम महापौर प्रत्याशियों की घोषणा की। खंडवा से दिग्गज नेता वीरेन्द्र  मिश्रा की बहू आशा मिश्रा को टिकट दिया गया। टिकट वितरण में इस बार भी प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ की चली। मिश्रा को टिकट मिलने पर दिग्विजय व कमलनाथ समर्थकों में खुशी है, वहीं अरुण यादव समर्थकों में खुशी देखने में नजर नहीं है। मिश्रा परिवारा ब्राम्हएा हक् लकिन ेबेटे अमित की पत्नि पिछडा वर्ग से है।  बता दें कि खंडवा महापौर सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है। आशा मिश्रा विश्वकर्मा परिवार से होकर ओबीसी श्रेणी में आती है।
                    खंडवा से महापौर के लिए आशा अमित मिश्रा को कांग्रेस की ओर से महापौर प्रत्याशी बनाया जाने से मुकाबला कश्मकश्भरा होगा। आशा मिश्रा का आवेदन ऐन वक्त पर सामने आया था। इससे पहले अरुण यादव समर्थक श्याम यादव की
पत्नी लक्ष्मी यादव का नाम तय माना जा रहा था। सभी वरिष्ठों से रायशुमारी के बाद पीसीसी चीफ कमलनाथ ने आशा अमित मिश्रा का नाम फायनल किया। इसकी घोषणा उन्होने ट्वट क दी है।
                   एआइसीसी से सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे महेंद्र जोशी को महापौर उम्मीदवार के लिये रायशुमारी के लिए भेजा गया था। तब कांग्रेस की ओर से लक्ष्मी श्याम यादव, निशा विनोद यादव, अर्चना बलराम वर्मा , सुषमा खेड़ेकर का दावा सामने आया था। इस दौरान  वरिष्ठ नेता वीरेंद्र मिश्रा ू ने अपनी बहू आशा मिश्रा का आवेदन भी दिया था। ऐन वक्त पर आशा मिश्रा का नाम
महापौर प्रत्याशियों के पैनल में शामिल किया गया था। श्री वीरेल्द्र मिश्रा वर्ष 1993 में कांग्रेस से विधायक चुनाव  लड़ चुके हैं। स से खंडवा जिले में वर्ग संघर्ष की श्सुरूष्असज हुई और हिसा व कफर्यू के आग्रेाश में ,ांडवा जिला ंिनरतर  जाता रहा और जीत कांग्रेस सेफिसलती चही गया।
                    कोई तीन दशक बाद सियासत का महौल और गहरा हुआ है औ कांग्रेस बेक फुट पर हे। श्रीवीरेनछ्र मिश्र की प्रतिष्ठा दाव प होगी कि 1993 के द द से कांग्रेस कोबाहरर निकालकर अपनी पुत्रवधु को जीत दिलाने की कडी चुनौती होगी।
               राजनैतिक पंडितो का मानना है कि 1993 में  परमजीतसिंह नारंग का टिकट फायनल होने के बाद तत्कालीन सांसद स्व शिवकुमासिंह ने छीनकर वीरेन्द्र मिश्रा के हवाले किया था और वे चुनाव हार गये थे। चूंकिअब श्री नाररंग भाजपा का दामन पकड चुके ेहै लेकिन पिछडा वर्ग का न होने से दावेदारी से दूर है। मुस्लिम, ब्राह्मण, ओबीसी वोट की राजनीति कांग्रेस की ओर से महापौर प्रत्याशी घोषित आशा मिश्रा की मायके और ससुराल की पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीति की रही  वीरेंद्र मिश्र कांग्रेस के
निर्विवाद नेता  है। पति अमित मिश्रा रामेश्वर वार्ड से पार्षद रहे है। उधर भाजपा में महापौर प्रत्याशी के लिए कई दावेदार होने से ऐ प्रत्याशी पर  सहमति बनानेा टेडी खीर होगी।
                    कांग्रेय नेता कुंदन मालवीय ने कहा कि नगर निगम का यहचुनाव खंडवा के वर्तमान और भविष्य पर गहरी छाप छोडगे। भाजपा निगम की सत्ता में निंतर रही है लेकिन विकास के समांनातर अध्ूारा  विकास व सपने ही खडे है।