पुल पर जलभराव-  गांव में कैद खैरलांजी के ग्रामीण ६ माह तक पुल पर पानी ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना

10:09 pm or October 18, 2022
आनंद ताम्रकार
बालाघाट कटंगी १८ अक्टूबर ;अभी तक;  जनपद पंचायत कटंगी के अंतिम छोर पर राजीव सागर बांध के किनारे बसी ग्राम पंचायत अंबेझरी के खैरलांजी गांव के ग्रामीण बारिश के बाद अब गांव में ही कैद होकर रह गए है. दरअसल, अंबेझरी से खैरलांजी गांव को जोड़ने वाले मुख्य सड़क मार्ग पर बने पुलिया में जलभराव हो गया है अब करीब 6 माह से अधिक समय तक इस पुल पर पानी भरा रहेगा और ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. हालाकिं अभी ग्रामीण मुख्यालय आने-जाने के लिए जटामा-सिलारी होकर पिपरवानी (सिवनी) मार्ग का उपयोग कर है. मगर, यह मार्ग भी बारिश के बाद दलदल में तब्दील हो गया है. वहीं दुसरा एक मार्ग जो खैरलांजी से अंबेझरी को जोड़ता वह भी कच्चा और पगडंडीनुमा है. जिस पर केवल दोपहिया वाहनों की आवाजाही हो पाती है. ग्रामीणों ने बताया कि मुख्य सड़क मार्ग पर वृहद पुल निर्माण की मांग लगातार की जा रही है मगर, जनप्रतिनिधि और अधिकारी कोई सुध नहीं ले रहे है.
प्रधानमंत्री आवास योजना प्रभावित-
                        ग्राम पंचायत अंबेझरी के पुर्व सरपंच सुखदेव सलामे (वर्तमान सरपंच प्रतिनिधि) बताते है कि मौजूदा वक्त में खैरलांजी गांव की हालत बेहद खराब है. पिपरवानी से जटामा-सिलारी होकर खैरलांजी को जाने वाले मार्ग की हालत खराब है जबकि खैरलांजी से अंबेझरी की तरफ जाने वाला कच्चा मार्ग पर चारपहिया मालवाहक वाहनों की आवाजाही नहीं हो सकती. ऐसे में यहां रेत और गिट्टी के डंपर नहीं आ पा रहे है. जिस कारण गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना से बनने वाले आवासों का निर्माण अटका हुआ है. हितग्राही अपने मकानों का निर्माण नहीं कर पा रहे है. इधर, जनपद पंचायत के अधिकारी लगातार सरपंच और सचिव पर आवासों का निर्माण शीघ्र पूरा कराने का दबाव बनाते है. पूर्व सरपंच ने बताया कि जब तक खैरलांजी को जोड़ने वाले मुख्य सड़क मार्ग पर बने पुलिया से पानी नहीं हटता तब तक वाहनों की आवाजाही नहीं होगा और ना ही मकानों का निर्माण शुरू हो पाएगा.
600 की आबादी-
                     मिली जानकारी अनुसार ग्राम पंचायत अंबेझरी के खैरलांजी गांव की आबादी करीब 600 है. यहां सरकारी सुविधाओं के नाम पर शिक्षा के लिए प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल, स्वास्थ्य के लिए एक आशा और एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है. जबकि खैरलांजी गांव को जाने के लिए सड़क का साधन नहीं होने के कारण गांव में इमरजेंसी सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही है. प्रसुति महिलाओं को मेडिकल सुविधा नहीं मिल पाती. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मतदाताओं की संख्या कम होने के कारण सरकार के नुमाइंदे सुध नहीं ले रहे है. अगर उनके गांव में मतदाताओं की संख्या अधिक होती तो शायद पुल का निर्माण हो चुका होता.