पेड़ काटकर गमले लगाने की संस्कृति को बन्द किया जाये,

8:44 pm or June 7, 2022
महावीर अग्रवाल
मन्दसौर ७ जून ;अभी तक;  समग्र मालवा साहित्यिक संगठन मंदसौर इकाई द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी एवं विचार मंच का आयोजन लोकमान्य तिलक हायर सेकेण्डरी स्कूल में किया गया।
                 काव्य गोष्ठी में अटल ग्राम विकास सामाजिक संगठन के प्रमुख अभय कोठारी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन मेें कहा कि 5 जून को प्रतिवर्ष पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। क्यों इसकी आवश्यकता पड़ी, इसका खास कारण यह है कि जंगल में वन कटते जा रहे है जिसका प्रभाव पूरे विश्व के पर्यावरण पर पड़ रहा है। तब विकसित देशों के नेता 5 जून 1972 को स्टॉक होम  नामक स्थान पर मिले और इस दिन को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। घने जंगल आज भी खूब कट रहे है। इसे रोकने के साथ नये पेड़-पौधे लगाकर इस धरा को हरा भरा बनाया जाये तभी पर्यावरण दिवस की सार्थकता है।
                   प्रारंभ में मॉ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित किया। सरस्वती वंदना मनोहरसिंह चौहान ‘‘मधुकर’’ ने की। काव्य पाठ में नन्दकिशोर राठौर, हरिओम बड़सोलिया, विनोद गगरानी ‘‘विनोद’’ विजय अग्निहोत्री, मनोहरसिंह चौहान (जावरा), धु्रव जैन, नरेन्द्र भावसार एवं रमेश मनोहर (जावरा) ने अपनी अपनी कविताएं सुनाकर वातावरा को नई ऊँचाईयां प्रदान की।किया जाए इस पर जोर दिया।
           हरिओम बड़सोलिया ने कहा कि पेड़ काटकर गमले लगाने की संस्कृति को बन्द किया जाये, यह पर्यावरण के लिये घातक है।  रमेश मनोहरा के दोहे काफी सराहे गये, एक बानगी देखिये- ‘‘बचाकर रखे धन तभी, जब आये संताप, पेड़ भी है धन सबके रखे बचाकर आप।’’
पर्यावरण पर अपने विचार रमेशचन्द्र जैन, विरेन्द्रसिंह चौहान (जावरा) व भंवरलाल भण्डारी ने पर्यावरण को कैसे साफ सुथरा बनाया जाए और किस तरह हरियाली से धरती को आच्छादित
इस सफल गोष्ठी का संचालन विजय कुमार अग्निहोत्री ने किया एवं आभार संस्था संयोजक हरिओम बरसोलिया ने माना