पोषण वाटिका से दूर होगा कुपोषण, 60 गांव में बनी 1300 पोषण वाटिका

10:24 am or December 28, 2021

नारायणगंज से प्रहलाद कछवाहा

मंडला 28 दिसंबर ;abhi tk;  पोषण वाटिका के माध्यम से कुपोषण को हराकर अपना प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत किया जा सकता है।  फल एवं सब्जियां सूक्ष्म तत्वों के महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं। इन पोषक तत्वों को नियमित आहार में सम्मिलित करना अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। आयरन युक्त आहार के सेवन से एनीमिया के स्तर में कमी आती है। खट्टे फल, अदरक, हल्दी आदि स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली साग-सब्जियों के सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

                जानकारी अनुसार जिले में अधिकत्तर महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारा रोग प्रतिरोधक तंत्र कितना मजबूत होगा और कोरोना जैसी बीमारी से हम कैसे लड़ पाएंगे। अभी तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। जिसके लिए हम सबको तैयार रहना है। इस पोषण वाटिका के माध्यम से हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकते है। पोषण वाटिका बनाने के लिए कम से कम एक से डेढ़ डिस्मल भूमि की आवश्यकता होती है। जिसमें हम पोषण वाटिका तैयार कर सकते है। जिसमें एक परिवार के साथ अन्य लोगों को भी इस वाटिका में पैदा की गई सब्जियों को खिला सकते है।

सीजन के मुताबिक पोषण वाटिका तैयार की जा सकती है। फिलहाल बनाई गई पोषण वाटिका में बैगन, टमाटर, बरवटी, गोभी, लोकी, मिर्ची समेत अन्य मौसमी सब्जियां लगाकर पोषण लोग पोषण ले रहे है।  इससे न सिर्फ खून की कमी बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होगी।  क्षेत्र में अभी तक जिन परिवारों में पोषण वाटिका का उपयोग किया जा रहा है। उनके परिवार में पहले की तुलना में लोग कम बीमार हो रहे हैं और उनका हिमोग्लोबिन का स्तर भी पहले की तुलना में बढ़ा है।

बता दे कि आजीविकिा मिशन व प्रदान संस्था की स्वसहायता समूह की महिलाओं को इससे जोड़ा जा रहा है। जिससे वे घर में जहां पोषण वाटिका लगाकर कुपोषण को दूर कर सकें और इनकी आर्थिक स्थिति सुधारने में इनका सहयोग हो सकें। इसके लिए प्रदान  के द्वारा गांव की महिलाओं को चुना गया है जो किसी न किसी स्व सहायता समूह से जुड़ी है। इन्हें अपने घर की बाड़ी में पोषण वाटिका लगाने प्रेरित किया गया। वहीं जलसंरक्षण का महत्व बताकर उन्हें कम पानी में विटामिन युक्त सब्जियां लगाने प्रोत्साहन दिया। जिससे महिलाओं ने अपने घरों में छोटी छोटी वाटिका लगाकर जहां हरी ताजी सब्जियों का सेवन कर परिवार को पोषणयुक्त बनाया। वहीं अधिक सब्जी होने पर उसे बेचकर आर्थिक लाभ भी कमा रही है।

आर्थिक सहयोग भी मिल रहा:

तेज सरस्वती स्वयं सहायता समूह की महिला देवरी निवासी सरोज वरकड़े ने बताया कि पोषण वाटिका बनाने से घर में ही ताजी सब्जियां खाने को मिल रही है।  वहीं अतिरिक्त सब्जी बेचकर आर्थिक लाभ भी कमा रहे है। पहले  सप्ताह में करीब 200 रुपये की सब्जी खरीदना पड़ती थी। अब उन पैसों की बचत हो रही है, वहीं बचत के साथ अतिरिक्त लाभ मिल रहा है।  पहले रोजाना हरी सब्जियां नहीं मिल पाती थी, अब तो घर में रोजाना दाल व सब्जी दोनों खा रहे हैं। टमाटर, भटा, गोभी, मिर्ची, पालक भाजी लगाकर पोषण युक्त भोजन कर रहे है।

60 गांव के 1300 सौ घरों में लगाई पोषण वाटिका:

विकासखंड नारायणगंज क्षेत्र में महिलाएं किसी से कम नहीं है, यहां महिलाएं जैविक खेती के साथ अब पोषण अपने परिवार को स्वस्थ रखने के लिए पोषण वाटिका का भी निर्माण कर ली है। जिससे उनके परिवार के सदस्यों को पोषण युक्त भोजन दोनो समय मिल सके। इसके लिए आजाविका मिशन के साथ प्रदान द्वारा नारायाणगंज के करीब 60 गांव के 1300 परिवारों के यहां पोषण वाटिका का निर्माण कराया है। जहां 1300 परिवार ने इस वाटिका में हरी ताजी सब्जियां उगाई। इन सब्जियों का सेवन कर ये ं परिवार कुपोषण से बचाव कर रहे हैं और अतिरिक्त सब्जियां को बेचकर मुनाफा भी कमा रहे है।

जैविक पद्धती से कर रहे वाटिका तैयार :

अनुरूद्ध शास्त्री ने बताया कि विकासखंड नारायणगंज में पहले ही करीब 1300 महिलाओं को जैविक खेती के लिए तैयार किया गया है। अब 1300 परिवार में पोषण वाटिका बनवाई गई है। जिससे कुपोषण को जड़ से खत्म किया जा सके। पोषण वाटिका पूरी तरह जैविक पद्घति को अपनाकर की जा रही है। खास बात यह है कि घरेलू निस्तार के पानी का उपयोग पोषण वाटिका की सिंचाई में किया जाता है। जिससे जलसंरक्षण करना भी लोग सीख रहे है।  जिससे पानी की बचत हो रही है, तो वहीं इन्हें पानी की कमी का सामना भी नही करना पड़ रहा है। आगे चलकर किसान व गरीब परिवार के लिए ये जैविक खेती अपनाकर आय का जरिया बढ़ाने का साधन भी बनेंगी।

इनका कहना है

शरीर को स्वस्थ और निरोगी रखने के लिए पौष्टिक तत्वों का उपयोग बहुत आवश्यक है। अगर शरीर को भरपूर मात्रा में पौष्टिक तत्व न मिले तो कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्यायें होने लगती हैं। इसी समस्या और कुपोषण को दूर करने के लिए हमने हर घर में पोषण वाटिका अभियान एवं तीन रंग की थाली अभियान चलाया है, जिससे गांवों में समूह की महिलाएं और उसका परिवार को पोषण युक्त आहार के साथ उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहे।  पोषण वाटिका से समूह की महिलाओं को आर्थिक लाभ भी हो रहा है।
अनुरुद्ध शास्त्री, एक्जीक्यूटिव, प्रदान

कम लागत और पूंजी में पोषण वाटिका घर में बनाने से हम लोगों को अब हर तरह की ताजी सब्जियां खाने को मिल रही है। घर खाली पड़ी भूमि का उपयोग हमारे और परिवार के लोगों की सेहत के काम आ रहा है। पोषण वाटिका बनाने के लिए हम अन्य और लोगों को भी प्रेरित कर रहे है। जिससे इस कुपोषण को दूर भगाया जा सके और सभी स्वस्थ रहे।
गीता झरिया, देवरी

पोषण वाटिका लगाने के बाद हम लोगो को खाने के लिए बेहतर सब्जियां मिल पा रही है, एवं हमारे पैसे में भी बचत हो रही है। इसके साथ ही पोषण वाटिका के लिए ऐसी सब्जियों का चयन किया जाता है, जिसमें भरपूर मात्रा में पोषण तत्व हो और जिसे हम लगाकर उसका सेवन कर सके। हम पोषण वाटिका में  मुख्य रूप से टमाटर, बरबटी, बैगन, गोभी, लौकी, मिर्ची को शामिल किए है।
कस्तुरिया बाई, पिंडरईमॉल