पौल्ट्री फीड जैसा चांवल प्रदाय करने का सिलसिला कई वर्षों से चल रहा

आनंद ताम्रकार

बालाघाट ९ सितम्बर ;अभी तक;  जिले में अमानक एवं जानवरों के उपयोग में लाया जाने वाला तथा पौल्ट्री फीड जैसा चांवल प्रदाय करने का जो मामला उजागर हुआ है ऐसा विगत कई वर्षों से चल रहा है।

राईस मिलर्स, नागरिक आपूर्ति निगम, राज्य विपणन संघ के अधिकारियों के त्रिगुट द्वारा प्रषासनिक तथा राजनितिक संरक्षण मिलने से करोडों रूपये के घोटाले को अजांम दिया गया।

आष्चर्य है की इस मामले से संबंधित की गई लिखित षिकायतों और मीडिया के माध्यम से प्रकाषित समाचारों और प्रसारित हुये घोटाले के तथ्यों को प्रषासनिक अधिकारियों ने ना केवल अनदेखी की बल्कि घोटालेबाज अधिकारियों को खुला खेल करने का पूरा पूरा अवसर दिया गया।

वहीं राजनीतिक आकाओं ने इस तरफ गौर करना तो दूर अपनी जबान पर ताला जड लिया है। फिर क्या था अनुकूल वातावरण मिलने से इतना बड़ा घोटाला अपनी चरम सीमा को पार कर बैठा।

नागरिक आपूर्ति निगम,राज्य विपणन संघ तथा राईस मिलर्स द्वारा खेले जाने वाले करोडों रूपयों की कमीषनबाजी का खेल जिले के आला अफसरों तथा राजनेताओं के अकूत खजाने का भण्डार बन गया। जिसको जितनी जरूरत पड़ी दोनों हाथों से मनमर्जी से रकम बटोरी।
इन विसगंतियों के चलते ही जिले के राईस मिलर्स की मेजबानी में 56 भोगों को स्वाद चखा और दुसरी तरफ जनता को पषु आहार से बदत्तर चांवल का कौर निगलना पड़ा।

यह उल्लेखनीय है की वर्ष 2017-18 की अवधि में 6 करोड रूपये मूल्य का श्रीजी एग्रो नेवरगांव कला द्वारा प्रदाय किये गये चांवल में से 49 लाट, लगभग 25 हजार बोरा चंावल अमानक स्तरहीन पाये जाने पर अमान्य कर दिया गया था। प्रदाय किया गया चांवल पषु आहार के स्तर का था इस संबंध में तत्कालीन लोकसभा सांसद श्री बोधसिंह भगत ने श्रीरामविलास पासवान केबिनेट मंत्री खादय जनवितरण एवं उपभोक्ता मामले को लिखित षिकायत कर प्रदाय किये गये चांवल की उच्चस्तरीय जांच किये जाने तथा राईस मिलर्स के विरूद्ध कार्यवाही कर निर्धारित मापदण्ड का चंावल अपग्रेड किये जाने सहित प्रदाय की गई चांवल की मात्रा की निकासी पर रोक लगाये जाने की मांग की थी।

संासद श्री भगत द्वारा की गई षिकायत के परिपेक्ष्य में तत्कालीन प्रबंध संचालक विकास नरवाल ने जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम बालाघाट को पत्र कमांक 980 दिनांक 01/05/2018 को प्रेषित कर यह निर्देषित किया था की माननीय केबिनेट मंत्री श्रीरामविलास पासवान को प्रेषित की गई षिकायत के आधार पर बालाघाट जिले में संग्रहित स्कंध का संयुक्त निरीक्षण म.प्र.स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेषन लि.जबलपुर  एवं भाखानि, जिला कार्यालय जबलपुर के गुणवत्ता नियंत्रण द्वारा किया गया है। गुणवत्ता जांच में मेसर्स माॅं अम्बे खुरसोडी गोदाम के 04 स्टेक एवं मेसर्स सांईबाबा वेयरहाउस खुरसोडी के 03 स्टेक निर्धारित मापदण्ड के अनुसार नही पाये गये है।
अतःआपको निर्देषित किया जाता है कि भारतीय खाद्य निगम की मांग अनुसार संयुक्त निरीक्षण में अमानक स्तर के पाये गये स्टेकों को षिकायत पर पूर्ण कार्यवाही होने तक तक निर्गत नही किया जाये एवं धान की कस्टम मिलिंग में अनियमितता के दृष्टिगत संबंधित मिलर्स के विरूद्ध विपणन संघ से कार्यवाही कराकर सूचित करें।

प्रबंध संचालक द्वारा प्रेषित किये गये उपरोक्त उल्लेखित पत्रानुसार निर्देषित कार्यवाही करने एवं स्टाक की निकासी रोके जाने की बजाय तत्कालीन जिला प्रबंधक द्वारा मेसर्स श्रीजी एग्रो नेवरगांव के अमानक पाये गये चांवल के स्टेक को मिलर्स के हर्जे-खर्चे पर बदलवाए जाकर मानक स्तर का चांवल जमा करवाया जाकर अन्य जिलों को प्रदाय कर दिया गया है। उक्त प्रदाय किये जाने के उपरांत कही से भी कोई षिकायत प्राप्त नही हुई है मिलर्स द्वारा अमानक चांवल बदलकर जो मानक स्तर का चंावल जमा कराया गया है उसका परिक्षण नियमानुसार गोदाम पर पदस्थ गुणवत्ता निरीक्षक श्री एन.एस.मडलोई द्वारा किया गया है। अमानक स्तर का चांवल पूर्व में जमा कराने के संबंध में गुणवत्ता निरीक्षक श्री एनएस मडलोई की एक वेतन वृद्धि रोकी गई है तथा संबधित मिलर्स को भी कुछ समय तक मिलिंग कार्य से निष्कासित रखा गया है।

इस आषय की जानकारी नागरिक आपूर्ति निगम बालाघाट के प्रभारी जिला प्रबंधक श्रीसोनी द्वारा पत्र क्रमांक 430 दिनांक 24/07/2019 के माध्यम से सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध कराई गई है यह जानकारी मिलने के बाद जिला प्रबंधक से यह पूछे जाने पर की किस सक्षम अधिकारी के आदेष पर प्रतिबधित चांवल के स्टाक को अपग्रेड कर अन्य जिलों को प्रदाय कर दिया गया इस संबंध में यदि कोई पत्र हो तो अवगत कराये। जिस पर उन्होने अवगत कराया की इस संबंध में कार्यालयीन दस्तावेजों में ऐसा कोई पत्र उपलब्ध नही है। मिलर्स के साथ हुये अनंुबध अनुसार मिलर्स के हर्जे खर्चे पर चांवल बदलाया जाकर प्रदाय करने का नियम है। प्रदाय किया गया चांवल शासकीय मापदण्डों के अनुसार प्रदाय योग्य था।
आखिरकार जिस गुणवत्ता निरीक्षक एनएस मडलोई द्वारा पूर्व में प्रदाय किये गये अमानक चांवल का निरीक्षण कर उसे पास कर दिया था तो गुणवत्ता निरीक्षक की बजाय उससे वरिष्ट गुणवत्ता नियंत्रक से प्रदाय किये गये चांवल का अपग्रेड किया हुआ स्टाक का परिक्षण क्यों नही कराया गया?
आपूर्ति निगम के नियमानुसार चांवल को अन्य जिलों में प्रदाय किये जाने की स्थिति में प्रथम आवक प्रथम जावक का नियम प्रचालित है। तो आखिर किस कारण पूर्व में भण्डारित चांवल के स्टाक को ना भेजते हुये आनन फानन में अपग्रेड किये गये चंावल को कैसे अन्य जिलों में भेज दिया गया है।
यह कारगुजारी राईस मिलर्स और आपूर्ति निगम के अधिकारियों की सांठगांठ का ज्वंलत साक्ष्य है।
इस प्रकार जिले में कानून कायदों को ताक में रखकर आपूर्ति निगम के अधिकारी पषु चारा जैसा चांवल खरीद रहे है उच्च स्तरीय सरक्षण के चलते कागजों में किये गये अमानक चांवल को अपग्रेड कर अन्य जिलों में भेजे जाने के गंभीर मामले पर संबंधित अधिकारी पर ना तो कोई कार्यवाही की गई ना ही मिलर्स को ब्लेकलिस्ट किया गया और उसे फिर से कस्टम मिलिंग के लिये अनुबधित कर धान के लाट जारी कर दिये गये।
सांसद की षिकायत एवं केबिनेट मंत्री के दिषा निर्देष जहां के तहां रखे रह गये।

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