प्रतिदिन गाय को रोटी देने के बाद स्वयं भोजन करने वाले व्यक्ति के ऊपर सदैव ईश्वर प्रसन्न रहता है : भरत जी महाराज

11:01 pm or November 12, 2022

दीपक शर्मा

पन्ना १२ नवंबर ;अभी तक; श्रीमद भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह का आयोजन हुआ. जिसे धूमधाम से मनाया गया.भागवत कथा के छठे दिन व्यास पीठ पर विराजमान कथावाचक भरत  जी महाराज ने रास पंच अध्याय का वर्णन किया. उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। नमें गाये जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है. उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया. कथा के दौरान कथा व्यास भरत जी महाराज  ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ. जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। कथा में भजन में ’तो सुन मुरली की तान दौड़ आई सांवरिया’ पर श्रोताओं ने भाव विभोर होकर नृत्य किया. रास का तात्पर्य परमानंद की प्राप्ति है जिसमें दुःख, शोक आदि से सदैव के लिए निवृत्ति मिलती है. भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को रास के माध्यम से सदैव के लिए परमानंद की अनुभूति करवायी। भागवत में रास पंचाध्यायी का विश्लेषण पूर्ण वैज्ञानिक कथावाचक  व्यास भरत  जी महाराज ने कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति आवश्यक है. भगवत प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी है. सेवानिवृत्त अश्विन चिकित्सा अधिकारी डॉ पुनीत खरे  के तत्वावधान में इंद्रपुरी कॉलोनी स्थित आवास पर  आयोजित भागवत कथा के छठे दिन कृष्ण-रुक्मणि विवाह प्रसंग पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया. भगवान श्रीकृष्ण रूक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया. कथा के दौरान भक्तिमय संगीत ने श्रोताओं को आनंद से परिपूर्ण किया. भागवत कथा के छठे दिन कथा स्थल पर रूक्मणी विवाह के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। श्रीकृष्ण-रूक्मिणी की वरमाला पर जमकर फूलों की बरसात हुई संस्कार युक्त जीवन जीने से मिलती है मुक्ति… कथावाचक ने कहा कि जो व्यक्ति संस्कार युक्त जीवन जीता है वह जीवन में कभी कष्ट नहीं पा सकता। व्यक्ति के दैनिक दिनचर्या के संबंध में उन्होंने कहा कि ब्रह्म मुहूर्त में उठना दैनिक कार्यों से निर्वत होकर यज्ञ करना, तर्पण करना, प्रतिदिन गाय को रोटी देने के बाद स्वयं भोजन करने वाले व्यक्ति पर ईश्वर सदैव प्रसन्न रहता है. इस दौरान कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की झांकी सजायी गयी। श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य श्रोता डॉ पुनीत खरे एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती माया खरे द्वारा कथा का रसपान किया जा रहा है. खरे परिवार ने पन्ना नगर के सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि अधिक से अधिक संख्या में भागवत कथा का रसपान कर धर्म लाभ उठाएं