फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से शासकीय भूमि का विक्रय करने वाले जालसाजों की जमानत निरस्त

संतोष मालवीय

भोपाल  २८ अक्टूबर ;अभी तक; रायसेन स्थित एक शासकीय कृषि भूमि को अपनी बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर विक्रय अनुबंध करने के बाद रजिस्ट्री करने से मना करने के आरोप में अदालत ने जालसाज आरोपी राजेन्द्र पाटीदार, बदरीप्रसाद, मेहताब, लक्ष्मी नारायण पाटीदार की जमानत अर्जी खारिज कर जेल भेज दिया गया है। इस मामले में आरोपी मेहताब और बद्री प्रसाद पाटीदार गिरोह के सरगना हैं और इन्ही के माध्यम से जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार हुए थे।
                    मामला इस प्रकार से है कि अशोका गार्डन निवासी फरियादी कृष्ण कुमार शर्मा से उपरोक्त जाटखेड़ी मिसरोद निवासी आरोपियों ने भोपाल – रायसेन स्थित ग्राम सदालतपुर की एक शासकीय कृषि भूमि खसरा क्रमांक 114, रकबा 1.785 हेक्टेयर जो करीब 4.40 एकड़ जमीन को अपनी बताकर फरियादी से 8 अगस्त 2016 को तीन लाख रुपये लेकर विक्रय अनुबंध कर 7 अगस्त 2017 को रजिस्ट्री कराने का आश्वासन दिया था। तय दिनांक को फरियादी ने आरोपियों से रजिस्ट्री कराने को कहा तो आरोपी टाल मटोल करते रहे। फरियादी को जब आरोपियों पर शक हुआ तो उनके द्वारा अपने स्तर पर उक्त जमीन की जांच पड़ताल की तब उन्हें पता चला कि उपरोक्त भूमि आरोपियों की न होकर शासकीय भूमि है। फरियादी को यह भी पता चला कि आरोपी राजेंद्र पाटीदार पर इसी तरह के अन्य मामले अदालत में विचाराधीन है। तब फरियादी ने आरोपियों के खिलाफ थाना कोतवाली रायसेन और मिसरोद मे सभी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
                  मिसरोद थाने के तत्कालीन थानाप्रभारी आलोक श्रीवास्तव ने मामला प्रथम द्रष्टया पाए जाने पर इनके खिलाफ 4 फरवरी 2010 को भादस की धारा 419, 420, 467, 120बी, 34 के तहत मुकदमा दायर कर विवेचना का जिम्मा उपनिरीक्षक सुखदेव भालेकर को सौप था। पुलिस ने विवेचना बाद अदालत में चालान पेश करने की बजाय 28 जून 2018 को सीजेएम की अदालत में खात्मा पेश कर दिया था। सीजेएम ने फरियादी को नोटिस जारी कर अदालत में बयान दर्ज करने को बुलाया था। फरियादी के 5 अक्टूबर 2018 को अदालत में बयान लेने के बाद अदालत ने खात्मा प्रतिवेदन वापस कर पुलिस को पुनः विवेचना के आदेश दिए थे, लेकिन पुलिस ने विवेचना में कोई रुचि नहीं ली थी। उसके बाद फरियादी ने इनके खिलाफ जबलपुर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया तब उच्च न्यायालय ने कोतवाली पुलिस को तीन महीने में अनुसंधान कर अदालत में चालान पेश करने के निर्देश दिए थे। लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद  भी पुलिस ने कोई रुचि नहीं ली। तब फरियादी ने 26 अगस्त 2020 को रायसेन पुलिस अधीक्षक मोनिका शुक्ला और थाना प्रभारी जगदीश सिंह सिंध के खिलाफ उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की थी। जब अवमानना याचिका की प्रति महाधिवक्ता कार्यालय को प्राप्त हुई और यह बात पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में आयी तब उन्होंने आरोपियों को आनन फानन में 15 अक्टूबर 2020 को आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपियों ने अदालत में अपनी जमानत अर्जी पेश की तो अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती नीलम मिश्रा की अदालत ने मामला गम्भीर प्रकृति का मानते हुए जमानत देने से इंकार कर जमानत याचिका खरिज कर दी हैं।

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