फर्जी दस्तावेज से नौकरी पाने वाले एक शिक्षक को पुलिस ने धरदबोचा

मयंक शर्मा

खंडवा १० नवंबर ;अभी तक; फर्जी दस्तावेज से नौकरी पाने वाले  एक शिक्षक को रविवार को यहां पुलिस ने धरदबोचा  है। मामला कुछ ऐसा है कि ण्क महिला ने अपने आरक्षक पति को जेल भिजवाने वाले अध्यापक को निशाना बनाते हुये फर्जीवाड़ा उजाकर किया है।

आरोपित मोहन सिंह से पुलिस की पूछताछ जारी है। कोर्ट में पेश किया गया। सोमवार को पुलिस ने आरोपित मोहन सिंह को रिमांड पर लिया है। कोतवाली थाना प्रभारी बीएल मंडलोई ने बताया कि मोहन सिंह ने फर्जी अंकसूची बनाकर करीब दस साल तक अध्यापक की नौकरी की। इसके बाद उसने वर्ष 2013 में नौकरी छोड़ दी और खंडवा आ गया। यहां सहायक आदिवासी आयुक्त विभाग में वह अध्यापक के पद पर पदस्थ हो गया। वह ं आदिवासी छात्रावास बरूड़ में अधीक्षक के पद पर भी रहा।
श्री मंडलोई ने कहा कि आरोपी से पूछताछ में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसने फर्जी अंकसूची कहां से बनवाई है।

श्री मंडलोई ने बताया कि  ं अध्यापक मोहन सिंह पिता कालू सिंह काजले निवासी रामनगर के खिलाफ धारा 420, 467, 466 और 471 में प्रकरण दर्ज किया गया।अध्यापक मोहनसिंह ने फर्जी अंकसूची के आधार पर सरकारी नोकरी हांसिल कर वह पिछले  करीब दस साल तक नौकरी कर रहा था। उन्होने बताया कि मामला आरटीआई से मिली जानकारी में उजागकर हुआ है।  एसआई भुवन सिंह वास्कले ने पुलिसकर्मियों के साथ रामनगर पहुंचकर  गिरफ्तार किया । कोतवाली पुलिस को े अध्यापक को गिरफ्तार करने की कार्रवाई करने में करीब दस माह लग गए। पुलिस ने आरोपित को एक दिन की रिमांड पर लिया है।

0 हमको भेजा है तुम्हें भी आना होगा।
पूरा मामला यू है कि  अध्यापक मोहनसिंह काजले ने कोतवाली थाने में पदस्थ रहे प्रधान आरक्षक संजय सिंह मोर्य पर करीब एक साल पहले गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज कराया था। इस मामले में प्रधान आरक्षक ने करीब दस माह पहले सरेंडर किया था। सरेंडर होने से पहले उसने एसपी, सीएसपी कार्यालय और कोतवाली थाने में अध्यापक मोहन सिंह काजले की शिकायत करते हुए बताया था कि वह फर्जी दस्तावेज लगाकर अध्यापक बना है। फर्जी तरीके से उसने नौकरी ली है। प्रधान आरक्षक की शिकायत की जांच को पुलिस ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था। करीब दो माह पहले प्रधान आरक्षक की पत्नी ने अपने पति की शिकायत को आगे बढ़ाते हुए आरटीआई लगाकर मोहन सिंह के दस्तावेज की जानकारी उसके विभाग से ली। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी व कोतवाली थाने में फिर से उसकी शिकायत की । फर्जी दस्जावेज भी उपलब्ध कराए । तब कहीं जाकर पुलिस ने मोहन सिंह पर प्रकरण दर्ज किया।

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