बंदी की मौत पर एमपी मानव अधिकार आयोग ने दिया बड़ा फैसला

7:53 pm or October 26, 2021
बंदी की मौत पर एमपी मानव अधिकार आयोग ने दिया बड़ा फैसला

मयंक भार्गव, बैतूल से

बैतूल २६ अक्टूबर ;अभी तक;  जिला जेल में खाना मांगने पर नग्र कर पिटाई करने का मृत्यु पूर्व बयान देने वाले विचाराधीन बंदी ने प्रताडऩा से तंग आकर टायलेट क्लीनर पी लिया था। गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उसे भोपाल रेफर कर दिया था। उपचार के दौरान विचाराधीन बंदी की मौत हो गई थी। इस प्रकरण में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने राज्य शासन को विचाराधीन बंदी की मौत होने पर परिजनों को पांच लाख रुपए की राशि दो माह में देने की राज्य सरकार से अनुशंसा की है।

आयोग ने प्रकरण क्र. 6508$6803/बैतूल/2020 में जिला जेल बैतूल में विचाराधीन बंदी मंटू उर्फ शंकर की आत्महत्या कर लेने के प्रयास से इलाज के दौरान मौत हो जाने के मामले में यह अनुशंसा की है। आयोग ने अपनी अनुशंसा में यह भी कहा है कि राज्य शासन चाहे तो इस क्षतिपूर्ति राशि की वसूली संबंधित दोषी जेल अधिकारियों/कर्मचारियों से कर सकता है। अनुशंसा में आयोग ने यह भी कहा है कि राज्य शासन जेल परिसर के अन्दर बंदियों की सुरक्षा के वैधानिक उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक उपाय व प्रबंध करे और जेल परिसर के प्रत्येक स्थान पर निगरानी सुनिश्चित करे, जिससे किसी भी बंदी को आत्महत्या करने का कोई अवसर ही न मिले।

इस प्रकरण में जिला जेल बैतूल की सूचना के अनुसार हमलापुर, मांझीनगर, सुभाष वार्ड, बैतूल निवासी विचाराधीन बंदी मंटू उर्फ शंकर द्वारा 21 अक्टूबर 2020 को टायलेट क्लीनर (हाईड्रोक्लोरिक एसिड) पीकर आत्महत्या कर लेने के प्रयास के कारण इलाज के दौरान हमीदिया अस्पताल, भोपाल में 24 अक्टूबर 2020 को उसकी मृत्यु हो गई थी। आयोग ने पाया कि जेल कर्मियों की लापरवाही के कारण मृतक के जीवन जीने के अधिकार और उसके मानव अधिकारों की घोर उपेक्षा हुई।