बच्चों को धार्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिये प्रेरित करें- आचार्य श्री पियुषचन्द्रसूरिश्वरजी म.सा.

2:12 pm or August 3, 2022
महावीर अग्रवाल
मन्दसौर ३ अगस्त ;अभी तक;  आजकल आधुनिकता व पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण बच्चे कम्प्यूटर व मोबाइल की दुनिया में ही रहते है। स्कूल जाना, ट्यूशन जाना और मोबाईल, कम्प्यूटर चलाना बस यही दुनिया बनकर रह गई है। आज बच्चों को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान भले ही अच्छा हो लेकिन उनमें धर्म के ज्ञान की कमी होती जा रही है। माता-पिता को जितना ध्यान बच्चों पर देना चाहिए उस ध्यान में कमी आई है। बच्चों को धार्मिक ज्ञान कराने की ओर माता-पिता को सर्वाधिक ध्यान देना चाहिए।
                 उक्त उद्गार परम पूज्य आचार्य श्री पियुषभद्रसूरिश्वरजी म.सा. ने नईआबादी स्थित आराधना भवन मंदिर हाल में आयोजित धर्म सभा में कहे। आपने कहा कि जब तक हम बच्चों को धार्मिक ज्ञान, संस्कारों एवं विनय की शिक्षा नहीं देंगे तब तक कान्वेंट की शिक्षा का कोई महत्व नहीं है। जीवन में यदि माता-पिता संतान की ओर से दुखी नहीं होना चाहते है तो बाल्यावस्था से ही उन्हें विनयवान, संस्कारवान बनाने की ओर ध्यान दो उन्हंे धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिये भी प्रेरित करो।
अति परिचय मर्यादा को कम करता है- आचार्य श्री ने कहा कि जब कोई बड़ा व्यक्ति छोटे के प्रति ज्यादा उदार होता है तो वहा मर्यादायें कम हो जाती हैदूसरे शब्दों में कह सकते है कि अति परिचय (ज्यादा मेलजोल) मर्यादा को कम करता है। जीवन में जब भ्ीा ऐसा हो सचेत हो जाओ व मर्यादा का पालन करो।
शास्त्र पढ़ाओ- आचार्य श्री ने कहा कि आपके घर में कोई भी धार्मिक ग्रंथ मखमल के कपड़े में लपेट कर रखा है तो उसका कोई मतलब नहीं है। बच्चों को शास्त्र पढ़ने के लिये प्रेरित करो, घरों में या धार्मिक स्थानों पर जो शास्त्र पड़े है, उन्हें निकालो और बच्चों को पढ़ने के लिये हो तभी शास्त्र का ज्ञान जन जन तक पहुंचेगा तथा धर्म का भला होगा। शास्त्रों का ज्ञान जितना फैलेगा उतना धर्म बड़ेगा।
स्कूल का ज्ञान देखो, स्टेटस सिंबल नहीं- आचार्य श्री ने कहा कि माता पिता बच्चों को पढ़ाने के लिये स्कूल का चयन किस आधार पर करते है इस पर विचार करे। स्कूल में ज्ञान की शिक्षा दी जा रही है या नहीं, शिक्षकों की योग्यता क्या है यह देखे। स्कूल का ज्ञान देखों, स्टेटस सिंबल नहीं। आजकल के माता-पिता को अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने में शर्म आती है, ऐसा नहीं होना चाहिए।
तन का नहीं, मन का मेल साफ करो- आचार्य श्री ने कहा कि हमें अपने शरीर की सफाई के साथ आत्मा की सफाई पर भी ध्यान देना चाहिये। मन में जो विषय वासना, क्रोध, लोभ, अहंकार का कचरा पड़ा है उसे साफ करो। जीवन में भौतिकता को कम करे, अध्यात्म को बढ़ाये। अध्यात्म कल्प सूत्र में आचार्य मुनिसुन्दरसूरिश्वरजी ने हमें अध्यात्म को महत्व देने की जो प्रेरणा दी है उस पर विचार करे। धर्मसभा में बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित थे। धर्मसभा का संचालन दिलीप राका ने किया।