बदलते मौसम में डेंगू और वायरल फीवर से सतर्क रहें-डॉ. सागर

8:02 pm or September 10, 2021
बदलते मौसम में डेंगू और वायरल फीवर से सतर्क रहें-डॉ. सागर
मोहम्मद सईद
शहडोल 10 सितंबर अभी तक। कमिश्नर शहडोल संभाग श्री राजीव शर्मा के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ० एम.एस. सागर ने स्वास्थ्य विभाग के सभी संस्था प्रमुखों के साथ-साथ सभी पैरामेडिकल स्टाफ को डेंगू एवं वायरल फीवर के संबंध में सतर्क रहने की सलाह दी है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सागर ने कहा है कि कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर की संभावना जिले में बनी हुई है, इसके साथ-साथ बदलते मौसम में मौसमी बीमारी डेंगू, मलेरिया एवं विभिन्न प्रकार के वायरल फीवर के लिए अनुकूल समय है। इसके लिए सघन प्रचार प्रसार के साथ-साथ आम जनमानस को जागरूक करने की आवश्यकता है। साथ ही अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में मरीजों को भी मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए समझाइश दिया जाए।
बदलते मौसम में डेंगू और वायरल फीवर से सतर्क रहें-डॉ. सागर

बदलते मौसम में डेंगू और वायरल फीवर से सतर्क रहें-डॉ. सागर

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा है कि नवजात शिशुओं की मृत्यु की संभावना बदलते मौसम में बढ़ जाती है, इसके लिए उपचार प्रबंधन के साथ-साथ जन जागरूकता की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समस्त गर्भवती महिलाओं का वीएचएनडी एवं अन्य माध्यमों से एनीमिक महिलाओं के चिन्हाकन कर सूचित संधारित किया जाए। चिन्हाकित एनीमिक गर्भवती महिलाओं का प्रोटोकॉल अनुसार आयरन टेबलेट एवं आयरन सुक्रोज से अभियान के तौर पर इलाज किया जाए, लेबर रूम, एएमसी एवं पीएनसी वार्ड के आसपास टीवी लगाकर प्रसव के दौरान एवं प्रसव के बाद शिशु एवं माता दोनों की देखभाल हेतु आवश्यक जागरूक करने वाली फिल्में कार्टून निर्देश कराना सुनिश्चित करें तथा यदि संभव हो तो प्रत्येक गर्भवती महिला को उनके सुरक्षा एवं बचाव हेतु काउंसलिंग कराई जाए।

               उन्होंने कहा कि आने वाले ठंड के मौसम हेतु पर्याप्त रूम हीटर एवं वार्मिंग की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाए। अंचल में फैली भ्रांति से निपटने के लिए एएनसी के दौरान एएनएम, आशा एवं आशा सहयोगी द्वारा काउंसलिंग की जाए। प्रसव के दौरान अपने शिशु के लिए साबुन से जुड़े हुए कपड़े एवं बिछाने ओढ़ने के चद्दर कंबल रजाई आदि का ही प्रयोग किया जाए। नवजात को 1 माह तक कम से कम हैंडलिंग किया जाए, जो भी बच्चे को खिलाएं दुलार करें आदि के लिए आवश्यक है कि इससे पूर्व साबुन से हाथ धोने का प्रचार प्रसार किया जाए। अंचल में भर आती है कि प्रसव के बाद लगभग एक माह तक सामान्य भोजन, नमक, मिर्च, मसाले आदि का उपयोग नहीं किया जाता है जिससे माता को और एनीमिया होने की आशंका बनी रहती है, इसलिए गर्भवती  महिला को प्रसव के बाद से सामान्य भोजन करना है अन्यथा मां एवं बच्चे दोनों पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
                मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सागर ने कहा कि आशा एवं आंगनबाड़ी तक आयरन, जिंक एमोक्सिसिलिन, पेरासिटामोल आदि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे प्रसव के दौरान चिकित्सक की सावधानी बरती जाए जिससे शिशु की एक्सफिक्सियल बर्थ में कमी की जा सके तथा आवश्यक होने पर समय पर रेफर किया जाए।