बस्तर विश्वविद्यालय पत्रकारिता में प्रारंभ करेगा डिप्लोमा कोर्स

.राजेंद्र तिवारी

जगदलपुर 9 जून ;अभी तक;  बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहां है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य बस्तर संभाग में  कार्य करने की अपार संभावनाएं हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि अध्ययन-अध्यापन में गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

                           एक अनौपचारिक मुलाकात में कुलपति डॉक्टर सिंह इस संवाददाता के साथ चर्चा कर रहे थे ।उन्होंने कहा कि बस्तर विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर विशिष्ट पहचान दिलाने की दिशा में कोशिश की जा रही है। इस हेतु विश्वविद्यालय का प्रबंधन लगातार प्रयासरत है। बस्तर जिला प्रशासन और राज्य सरकार से भी हमें हर संभव सहयोग प्राप्त हो रहा है । हमारी कोशिश है कि विश्वविद्यालय में रिक्त पड़े प्राध्यापकों के पद शीघ्र अति शीघ्र भरे जाएं। कुछ तकनीकी कठिनाइयों के कारण इन पदों पर अभी तक नियुक्तियां नहीं की जा सकी है। लेकिन निकट भविष्य में प्राध्यापकों के पद पर  नियुक्तियों का रास्ता साफ हो जाएगा।
                    एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने  आगे बताया कि बस्तर विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं मास कम्युनिकेशन पर डिप्लोमा कोर्स आगामी शिक्षण सत्र से प्रारंभ किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में बस्तर विश्वविद्यालय ऐसा प्रथम विश्वविद्यालय होगा जो डिप्लोमा का यह कोर्स शुरू करने का निर्णय ले चुका है। कार्यसमिति से विधिवत इसकी प्रशासकीय स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है । पत्रकारिता एवं मास कम्युनिकेशन का डिप्लोमा कोर्स प्रारंभ कराने में स्थानीय विधायक एवं संसदीय सचिव श्री रेख चंद जैन की भी उन्होंने प्रशंसा की। इसी प्रकार विश्वविद्यालय द्वारा भविष्य में एक जनसंपर्क अधिकारी नियुक्त किए जाने की भी योजना है।
                   श्यांखिकी के ख्याति प्राप्त प्राध्यापक रहे डॉक्टर सिंह का कहना है कि उनकी योजना बस्तर विश्वविद्यालय के प्रत्येक विभाग में उत्कृष्ट प्राध्यापकों की नियुक्ति कराना है ताकि इस अंचल के विद्यार्थियों को व्यापक ज्ञान अर्जन की सुविधा प्राप्त हो सके। ज्ञानार्जन की सुविधा के साथ-साथ विद्यार्थियों के समग्र विकास के प्रयास भी जारी हैं।  विश्वविद्यालय के भवन एवं छात्रावास की सुविधा के संबंध में उन्होंने यह भी बताया कि इस  अंचल के छात्रों को हर संभव सुविधा विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध होगी। बस्तर विश्वविद्यालय का यह ड्रीम प्रोजेक्ट होगा कि सीमावर्ती राज्यों के  के  विद्यार्थी भी  यहां अध्ययन अध्यापन को आये ताकि राष्ट्रीय समरसता की भावना यहां पुष्पित पल्लवित  होती रहे।