बहुचर्चित राधेश्याम पोरवाल हत्याकांड के आरोपी दोषमुक्त

3:48 pm or August 4, 2022

महावीर अग्रवाल

मन्दसौर ४ अगस्त ;अभी तक;  चर्चित राधेश्याम पोरवाल काचरिया जाट हत्याकांड मामले में विद्वान सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश महोदय मंदसौर श्री विशाल शर्मा ने हत्याकांड के सभी आरोपियों को दोषमुक्त किया।

प्रकरण की कहानी इस प्रकार थी कि पुलिस थना डंग को अज्ञात व्यक्ति की लाश देवगढ़ के जंगल में पड़ी हुई मिली। जिसकी शिनाख्ती मृतक राधेश्याम पोरवाल काचरिया जाट के रूप में हुई जिसकी गुमशुदगी सीतामऊ थाने पर पूर्व में दर्ज थी। विवेचना के दौरान राधेश्याम पोरवाल को अंतिम बार मदन बलाई व शंकर बलाई के साथ देखा गया था जिन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ पर जानकारी मिली की कचरूबलाई राधेश्याम पोरवाल को सस्ती सोयाबीन दिलवाने का झांसा देकर योजना अनुसार खेजड़िया भुप लेकर आया था। मृतक की हत्या की सुपारी 10 लाख रू. में मृतक के भाई मुकेश पोरवाल द्वारा अभियुक्तगणों को दी गई थी जिसमें से 1 लाख रू. दिये थे। क्योंकि मृतक के उपर लाखों रूपयोें का कर्जा हो गया था और वह अपनी पैतृक जमीन बेच रहा था। अभियुक्त मदन व शंकर ने देवगढ़ के जंगल में मफलर से गला घोटकर व कुल्हारी के हत्थे से गर्दन दबाकर हत्या कर लाश को देवगढ़ के जंगल में फंेक दी। पुलिस ने अनुशंधान के दौरान हत्या से संबंधित वस्तुओं व मृतक का मोबाईल आरेापियों से जप्त किया तथा कचरू व अन्य आरोपीगणों के मध्य बातचीत की काल डिटेल प्राप्त कर पेश की। अभियोजन ने 31 गवाहों के कथन करवाये। 67 दस्तावेज प्रमाणित करवाये।

अभियुक्तगण के अधिवक्तागण द्वारा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य का होकर कथित अपराध की कड़िया चेन कम्पलीट नहीं होने तथा अभियुक्तगणों का हत्या करने का कोई मोटिव साबित नहीं होने व मामला संदेह से परे प्रमाणित होने के तथ्यों को मानते हुए दोषमुक्त किया। प्रकरण में अभियुक्त की ओर से पैरवी एडवोकेट के.के.सिंह भाटी व जितेन्द्रसिंबहुचर्चित राधेश्याम पोरवाल हत्याकांड के आरोपी दोषमुक्त
मन्दसौर । चर्चित राधेश्याम पोरवाल काचरिया जाट हत्याकांड मामले में विद्वान सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश महोदय मंदसौर श्री विशाल शर्मा ने हत्याकांड के सभी आरोपियों को दोषमुक्त किया।
प्रकरण की कहानी इस प्रकार थी कि पुलिस थना डंग को अज्ञात व्यक्ति की लाश देवगढ़ के जंगल में पड़ी हुई मिली। जिसकी शिनाख्ती मृतक राधेश्याम पोरवाल काचरिया जाट के रूप में हुई जिसकी गुमशुदगी सीतामऊ थाने पर पूर्व में दर्ज थी। विवेचना के दौरान राधेश्याम पोरवाल को अंतिम बार मदन बलाई व शंकर बलाई के साथ देखा गया था जिन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ पर जानकारी मिली की कचरूबलाई राधेश्याम पोरवाल को सस्ती सोयाबीन दिलवाने का झांसा देकर योजना अनुसार खेजड़िया भुप लेकर आया था। मृतक की हत्या की सुपारी 10 लाख रू. में मृतक के भाई मुकेश पोरवाल द्वारा अभियुक्तगणों को दी गई थी जिसमें से 1 लाख रू. दिये थे। क्योंकि मृतक के उपर लाखों रूपयोें का कर्जा हो गया था और वह अपनी पैतृक जमीन बेच रहा था। अभियुक्त मदन व शंकर ने देवगढ़ के जंगल में मफलर से गला घोटकर व कुल्हारी के हत्थे से गर्दन दबाकर हत्या कर लाश को देवगढ़ के जंगल में फंेक दी। पुलिस ने अनुशंधान के दौरान हत्या से संबंधित वस्तुओं व मृतक का मोबाईल आरेापियों से जप्त किया तथा कचरू व अन्य आरोपीगणों के मध्य बातचीत की काल डिटेल प्राप्त कर पेश की। अभियोजन ने 31 गवाहों के कथन करवाये। 67 दस्तावेज प्रमाणित करवाये।
अभियुक्तगण के अधिवक्तागण द्वारा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य का होकर कथित अपराध की कड़िया चेन कम्पलीट नहीं होने तथा अभियुक्तगणों का हत्या करने का कोई मोटिव साबित नहीं होने व मामला संदेह से परे प्रमाणित होने के तथ्यों को मानते हुए दोषमुक्त किया। प्रकरण में अभियुक्त की ओर से पैरवी एडवोकेट के.के.सिंह भाटी व जितेन्द्रसिंह सिसौदिया द्वारा दी गई।ह सिसौदिया द्वारा दी गई।