बाढ़ का खतरा:- प्रशासन ने अटेर क्षेत्र में चंबल के तटवर्ती 19 गांवों में जारी किया हाई अलर्ट

भिण्‍ड डॉ. रविशर्मा:-

भिंड ३ सितम्बर ;अभी तक; कोटा बैराज राजस्‍थान से चंबल में 7.34 लाख क्‍यूसेक पानी छोडे जाने के बाद से नदी ऊफान लेने लगी है।  नावली वृंदावन को जाने वाले रास्‍ते पर पानी भरने से ग्रामीणों का अटेर से संपर्क कट गया है। इसी प्रकार से नदी किनारे के अन्‍य गांव भी टापू बनने की स्थिति में पहुंच रहे हैं। इधर प्रशासन ने चंबल नदी में बढ़ते हुए जलस्‍तर को देखते हुए नदी के तटवर्ती गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

यहां बात दें कि दो पहले से कोटा बैराज से चंबल नदी में छोड़े जा रहे लगातार पानी का असर अटेर क्षेत्र में दिखाई दिया। हालांकि सोमवार की रात से ही चंबल नदी ने ऊफान लेना शुरू कर दिया था। लेकिन मंगलवार की सुबह जब अटेर क्षेत्र के खेतों में पानी भरना शुरू हुआ तो ग्रामीणों की चिंता बढ़ने लगी। मंगलवार की शाम तक चंबल का पानी अटेर और नावली वृंदावन के रास्‍ते पर भर गया है, जिससे इस गांव के लोगों का एक बार फिर अटेर से संपर्क कट गया। इधर चंबल के बढ़ते हुए जलस्‍तर को देखते हुए प्रशासन ने चंबल नदी के किनारे गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है। साथ ही ग्रामीणों को किसी ऊंचे स्‍थान पर पहुंचने के लिए बोला गया है।

उदी घाट पर खतरे के निशान पर पहुंचा पानी:-

भिण्‍ड जल संसधान विभाग के अफसरों की मानें तो कोटा बैराज से 7.34 लाख क्‍यूसेक पानी छोड़े जाने से चंबल नदी का जलस्‍तर 9 मीटर बढ़ गया है। यानि उदी घाट पर चंबल नदी खतरे के निशान पर पहुंच गई है। चार दिन पहले चंबल नदी का उदी घाट बरही घाट एनएच 92 जलस्‍तर 110 मीटर पर चल रहा था। जो कि अब 120 मीटर पर पहुंच गया है। वहीं रात तक आधा या एक मीटर जलस्‍तर ओर बढ़ने की संभावना व्‍यक्‍त की जा रही है। इसलिए खतरे की कोई बात नहीं है।

पिछले साल 124 मीटर का आंकड़ा पार कर गई थी चंबल, वही स्थिति फिर बन रही :-

मालवा क्षेत्र में होने वाली जोरदार बारिश से चंबल में बाढ़ के हालात निमिर्त होने लगते हैं। यही वजह से पिछले साल भी मालवा क्षेत्र में जोरदार बारिश होने से सितंबर महीने में चंबल नदी ऊफान पर आई थी। तब चंबल नदी ने पिछले कई सालों का रिकार्ड तोड़ते हुए 124 मीटर के ऊपर पहुंच गई थी। इस वजह से अटेर क्षेत्र के कछपुरा, खेराहट, नावली वृंदावन, मुकुटपुरा, दिन्‍नपुरा, नखरोली की मड़ैया, कोषड़ की मड़ैया, चिलोगा आश्रम, रमाकोट सहित 19 गांवों में जहां कई घरों में चंबल का पानी घुस गया था। वहीं प्रशासन को आनन फानन में उक्‍त गांव खाली कराकर ग्रामीणों को राहत शिविरों में रखना पड़ा था। वहीं किसानों की हजारों बीघा में खड़ी फसल नष्‍ट हो गई थी। वहीं स्थिति अब फिर निमिर्त होने लगी है।

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