बालिग युवती को है जीवन साथी चुनने का अधिकारी

10:18 pm or June 15, 2022

सिद्धार्थ पांडेय

जबलपुर, 15 जून , अभीतक । मर्जी से मुस्लिम युवक के साथ रहने की स्वतंत्रता हाईकोर्ट ने बालिग युवती को प्रदान की थी। युवती की उम्र महज 19 होने के कारण हाईकोर्ट ने प्रोवेषन ऑफिसर को प्रत्येक पखवाडे में युवती के संबंध में रिपोर्ट पेष करने के निर्देष जारी किये थे। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विषाल मिश्रा की युगलपीठ ने बंधी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण करते हुए अपने आदेष में कहा है कि बालिग होने के कारण युवती को अपनी मर्जी के विवाह करने तथा रहने की स्वतंत्रता है।
गौरतलब है कि  होशंगाबाद निवासी इटारसी निवासी फैसल खान की तरफ से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया था कि उसकी प्रेमिका जो हिन्दु है, उसे जबरजस्ती नारी निकेतन में रखा गया है। वह एक- दूसरे से प्रेम करते है और युवती की उम्र 19 वर्ष है। वह पूरी तरह से बालिग है और जनवरी के पहले सप्ताह में वह अपना घर छोडकर उसके साथ रहने लगी थी। लापता होने की रिपोर्ट युवती के पिता ने पुलिस में दर्ज करवाई थी। जिसके बाद दोनो ने थाने में उपस्थित होकर बताया था कि वह स्वैच्छा से एक दूसरे के साथ रहना चाहते है।
पुलिस में बयान दर्ज करवाने के बाद वह भोपाल आकर रहने लगे थे। इटारसी पुलिस ने फरवरी माह के पहले सप्ताह में एसडीएम के समक्ष वयान दर्ज करवाने के लिए उन्हे बुलाया था। एसडीएम के समक्ष वयान दर्ज करवाने के बाद पुलिस ने बिना किसी आदेश के जबरजस्ती युवती को नारी निकेतन भेज दिया था। जिसके खिलाफ उक्त बंदी प्रत्यक्षिकरण याचिका दायर की गयी है। याचिका की सुनवाई के दौरान वीडियों कांफेसिंग के माध्यम से उपस्थित युवती के कहा था कि वह याचिकाकर्ता के साथ रहना चाहती है। हाईकोर्ट के निर्देश पर याचिकाकर्ता ने अपने शिक्षा,आय तथा धर्म के संबंध में हलफनामा पेश किया था। हलफनामे में कहा गया था कि दोनो अपने धर्म को मानने स्वतंत्र है और वह स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करेंगे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता के हलफनामा की प्रति युवती को फैक्स व वाट्सअप के माध्यम से भेजने तथा उसे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित करने के निर्देष दिये थें
युवती ने 23 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर न्यायालय को बताया था कि वह आने प्रेमी के साथ रहना चाहती है। युगलपीठ ने अपने अहम आदेश में कहा था कि मर्जी से प्रेम विवाह करने से बाप-बेटी का रिश्ता खत्म नहीं होता है। शादी के बाद भी बेटी के लिए वह पिता ही रहेगा। बालिग होने के कारण युवती को अपनी मर्जी के अनुसार रहने की स्वतंत्रता है। युवती की उम्र महज 19 सल है और उसके पिता को उसके शैक्षणिक कैरियर की चिंता थी। युवती को यह संशय था कि याचिकाकर्ता बाद में दूसरी शादी नहीं कर ले,इसलिए उससे हलफनामा पेश करने आदेशित किया गया था। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि विवाह के बाद भी पिता को बेटी की सुरक्षा का अधिकार है। न्यायालय को उम्मीद है कि शादी के बाद भी युवती के संपर्क में रहेंगे और भावनात्मक प्यार प्रदान करेगे। इसके अलावा वह वित्तिय सहयोग भी प्रदान करें। युगलपीठ ने प्रोवेषल अधिकारी को प्रत्यक पखवाडे में युवती के संबंध में रिपोर्ट पेष करने के निर्देष जारी किये थे। युगलपीठ ने बुधवार को याचिका का निराकरण करते हुए उक्त आदेष जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता मोहम्मद रिजवान खान ने पैरवी की।