बिजली उत्पादन, स्टॉक में दो दिन का कोयला;

मयंक शर्मा
खंडवा १० अक्टूबर ;अभी तक;  करीब 2520 मेगावाट क्षमता के जिले के ग्राम दोगलिया स्थित संत
सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट की चार में तीन इकाइयां बिजली उत्पादन कर रही
है लेकिन कोयला संकट गहराने से स्थिति कष्टप्रद है। परियोजना प्रबंधक के
अनुसार श्री सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट में  58684.3 टन कोयला है।  पूरी
क्षमता के साथ चले तो तीन दिन के अंदर खत्म हो सकता है। लोकसभा उपचुनाव
में कांग्रेस ने कोयले की कमी और बिजली आपूर्ति में बांधा को मुद्दा बना
रखा है।
                सिंगाजी परियोजना में रोजाना 6-7 रैक कोयला जरूरी है, वरना बिजली उत्पादन
ठप होने के कगार पर परियोजना खडी होगी।कोल कंपनी से कोयला की आपूर्ति
होती  है । आवक न होने पर  दो दिन बाद बिजली उत्पादन ठप हो जाएगा। रोजाना
की खपत 22 हजार मीट्रिक टन की है।
                परियोजना के मुख्यअभियता एके शर्मा ने बताया कि  कोल इंडिया कंपनियों से
सतत संपर्क मे है।परियोजना में स्टाक को देखेत हुये दो दिन को कोयला बचा
है। 4 में से एक यूनिट से बिजली उत्पादन बंद है।
                प्रदेश में 10 हजार मेगावाट बिजली की मांग में सहयोग देने के लिये
सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना की 1, 2 और 3 नंबर की यूनिट से बिजली
उत्पादन किया जा रहा है। कोयले की सप्लाई थम जाएगी तो यहां बिजली उत्पादन
पर ठप हो जाएगा।प्रदेश सरकार व मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के चारों
पावर प्लांटों में कोयला पहुंचाने का यत्न किये जाने की बात उन्होने कही
               परियोजना  की प्रथम फेस की एक नंबर और दो नंबर दोनों से 1200 मेगावाट का
उत्पादन जारी है, वहीं द्वितीय फेस की तीन नंबर 660 मेगावाट की इकाई
नंबर से भी बिजली का उत्पाद जारी है लेकिन कोयला संकट को लेकर उत्पादन
में कमी किये जाने  का आसार है ताकि कोयला उपलब्ध होने तक उत्पादन कम
ज्यादा होता रहे।
                1860 मेगावाठ उत्पादन क्षमता के बावजूद तीनों यूनिट पर 300 मेगावाट के
अधिक लोड पर उत्पादन हो रहा है। प्रतिदिन तीनों यूनिट को चलाने के लिए 22
हजार मीट्रिक टन कोयला खर्च होता है।ं रोजाना पांच रैक कोयला लेकर
परियोजना पहुंचती रही है। एक रेंक में चार हजार मीट्रिक टन कोयला लदान
होता है।एक यूनिट बिजली उत्पादन में औसतन  700 से 750 ग्राम कोयला लग रहा
है जो मानक 550 ग्राम से काफी अधिक है।सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट में
बिजली उत्पादन में  750 ग्राम तक कोयले की खपत हो से  बिजली महंगी पडेगी।
इससे सरकार को रोजाना कोयले के नाम पर करोड़ों रुपए का नुकसान भी उठाना पड़
सकता है।
                श्री शर्मा ने कहा कि कोयला संकट गहराने के साथ यह शिकायत गंभीर है कि
सिंगाजी परियोजना में बिजली उत्पादन के लिए आ रहा कोयला घटिया क्वालिटी
का है। इसमें अत्यधिक पत्थर कोयले के साथ आ रहे हैं। जो व्यर्थ ही रखे
रहते हैं।