बीजेपी के ज्ञानेश्वर पाटिल को मिला बुरहानपुर जिले के साथ* *मांधाता ने दिया कांग्रेस के राजनारायण का साथ* *खंडवा पंधाना में कड़ी टक्कर*

मयंक शर्मा
खंडवा २ नवंबर ;अभी तक;  खंडवा लोकसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी
ज्ञानेश्वर पाटिल ने 82140 वोट से  जीत हासिल की। भाजपा को नेपानगर,
बड़वाह, बुरहानपुर से सर्वाधिक साथ मिला जबकि मांधाता में उसे हार का
सामना करना पड़ा। खंडवा एवं पंधाना में कड़ी टक्कर मिली। मतगणना के दौरान
बागली में तकनीकी त्रुटि के चलते भाजपा को अप्रत्याशित लीड मिलने लगी,
बाद में यह त्रुटि पता चली तब कुल लीड 67 हजार से घटकर सीधे 30 हजार पर आ
जाने से मीडिया सहित कांग्रेस ने हंगामा खड़ा कर दिया। ठाकुर
राजनारायणसिंह ने इसे बड़ी गड़बड़ी करार दिया।
                    नाहल्दा स्थित आदर्श महाविघालय में पहली बार उपचुनाव के लिए खंडवा जिले
की तीन विधानसभा खंडवा, पंधाना एवं मांधाता की गणना आरंभ हुई। शुरूआती दस
से पन्द्रह राउंड में खंडवा, बुरहानपुर, पंधाना, भीकनगांव में भाजपा को
कांग्रेस ने कड़ी टक्कर दी। स्थिति यह बनी कि कई बार कांग्रेस प्रत्याशी
भाजपा से आगे निकल गये। खंडवा में कम मतदान के चलते वैसे ही भाजपा को
नुकसान की आशंका थी, उसी अनुरूप जब ईवीएम ने परिणाम दिये तो भाजपा को
स्थानीय प्रत्याशी न दिये जाने का खामियाजा भुगतना पड़ा, भारतीय जनता
पार्टी की लीड खंडवा विधानसभा में घट  गई। पंधाना में भी मतदान के दिन ही
कई गांव में बहिष्कार की स्थिति बनी थी, यहां भी भाजपा को मतदाताओं ने
नकारते हुए कांग्रेस के जय सिंगा महाराज नारे को मजबूत कर दिया, अंतिम
राउंड में पंधाना में भाजपा ने बढ़त हासिल करके अपनी लाज बचाई।
               बुरहानपुर कांग्रेस के लिए हमेशा लाभकारी साबित होता है, यहां भी कांग्रेस के
राजनारायणसिंह बुरहानपुर के स्थानीय प्रत्याशी होने के बावजूद ज्ञानेष्वर
पाटिल को पटखनी देते दिखे किंतु अंतिम परिणाम आने तक यहां ज्ञानेष्वर
पाटिल को पन्द्रह हजार से ज्यादा की लीड मिल गई। सबसे अच्छा प्रदर्शन
नेपानगर विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने करते हुए भाजपा को करीब पैंतीस
हजार की बढ़त दिलायी। बड़वाह में भाजपा को राहत की सांस लेने का मौका दिया।
बड़वाह में करीब इक्कीस हजार वोटों से भाजपा ने जीत हासिल की। दरअसल बड़वाह
में राजपूत विरोधी वोट गिरने एवं सचिन बिरला के भाजपा में आ जाने का
प्रभाव देखने को मिला। बागली में भी भाजपा का प्रदर्शन ठीक रहा।
*लोकल को दोनों ने भुनाया*
लोकल प्रत्याशी का मुद्दा खंडवा ने उठाया। यहां कांग्रेस ने
राजनारायणसिंह को उम्मीदवार बनाया तो उसे मांधाता से लीड मिल गई। खंडवा,
पंधाना ने अच्छी टक्कर दे दी। कुल मिलाकर कांग्रेस के लिए खंडवा फायदेमंद
साबित हुआ। इधर ज्ञानेष्वर पाटिल चूंकि बुरहानपुर के नेता है इसलिए
बुरहानपुर ने पहली बार भाजपा को अच्छी लीड दी वही नेपानगर ने भी साथ देकर
बुरहानपुर जिले से पचास हजार की लीड देकर जीत का जश्न मनाने का मौका
भाजपा को दे दिया। भाजपा की जीत में बुरहानपुर से पचास हजार तो खरगोन और
देवास से ही बड़ी लीड मिली, खंडवा फिसड्डी साबित हुआ।
*कॉन्ग्रेस अपने परंपरागत वोट ना पा सके*
कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक को मतदान केंद्र तक लाने में चूक गई।
प्रत्याशी ने हाथ जोड़ लिए नतीजा यह रहा कि अल्पसंख्यक वार्डों में मतदान
का प्रतिशत एकदम से गिर गया । इधर यह भी चर्चा रही कि भाजपा ने इन वोटों
को साध लिया जो कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा वोट गिरते हैं , उन्हें ही
कांग्रेस अपने पक्ष में डलवाने में असफल रही ।यदि कांग्रेस गंभीरता से इस
पर काम करती तो परिणाम उसके लिए सुखद हो सकता था।