बुंदेलखंड की डायरी  ; बुंदेलखंड में चुनावी घमासान  ; विकासवाद बनाम आरोप प्रत्यारोप की सियासत 

रवीन्द्र व्यास 

 उत्तर प्रदेश में २०२२ में विधान सभा चुनाव होना है | चुनावी दौर है इसलिए सियासत के मठाधीशों को हर अंचल याद आने लगा है | 10 दिन में  बुंदेलखंड के चित्रकूट और महोबा में  प्रियंका वाड्रा की दो चुनावी  सभा | वीरांगना  रानी लक्ष्मी बाई के जन्म दिवस पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने झांसी और महोबा  पहुँच कर चुनावी माहौल को और गरमा दिया | अब ऐसे माहौल में भला अखिलेश कैसे पीछे रह जाते तो वो भी दिस्मबर के पहले दिन बांदा से बुंदेलखंड में दस्तक देंगे | ये अलग बात है कि चुनाव आते ही नेताओं का बुंदेलखंड प्रेम जाग्रत हो जाता है , यहाँ की स्थाई समस्या आर्थिक असमानता , बेरोजगारी , सूखा , पलायन , शिक्षा ,उद्योग , स्वास्थ्य आदि जैसी बुनियादी समस्याएं चुनावी मंच के नेताओं के औजार बन जाते हैं |

                   प्रियंका वाड्रा इसी माह के मध्य में चित्रकूट पहुंची थी , जहां उन्होंने अपने को हिन्दू धर्म से जुड़ा होने का सन्देश देने का प्रयास किया | मंदिर में पूजन भी किया जिसके बाद एक सभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने पी एम् और सीएम को जम कर कोसा |  महिलाओं को कांग्रेस का  प्रतिज्ञा पत्र पढ़कर सुनाया था , जिसमे तमाम तरह के सुनहरे वायदे किये गए थे | प्रियंका ने महिलाओं  से कहा कि महिलाओं को एक जुट होकर राजनीति में अपना हक मांगना चाहिए। महिलाओं में जोश भरते हुए उन्होंने एक कवि की चंद पक्तियॉं पढ़ी  -“” बहुत हुआ इंतजार अबसुनो द्रौपदी शस्त्र उठालो अब गोविंद ना आएंगे। औरों से कब तक आस लगाओगी। कैसी रक्षा मांग रही हो दुशासन दरबारों से””। 

चित्रकूट में ‘उठो द्रोपदी शस्त्र संभालो’ पंक्तियों के उपयोग पर   कवि पुष्यमित्र उपाध्याय ने मीडिया से  कहा है कि  यह कविता एक गंभीर सामाजिक विषय को उठाने को लेकर रची गई थी। इसका राजनीतिक उपयोग इसकी भावनाओं को सीमित करने वाला है। उन्होंने इसके राजनैतिक इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए  कहा कि यदि प्रियंका  यदि इसका  राजनीतिक उद्देश्य के लिए उपयोग न करें तो  बेहतर होगा ।

                   प्रियंका की चित्रकूट की सभा के बाद  19 नवम्बर को पी एम् नरेंद्र मोदी ने महोबा और झांसी में  ना सिर्फ कई बड़ी योजनाओं की शुरुआत की बल्कि, विपक्षी दलों और युद्ध की चाहत रखने वाले देशो को एक बड़ा सन्देश भी दिया | हालांकि यह वह दिन था  जब गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व रानी लक्ष्मी बाई के जन्म दिवस  पर उन्होंने तीनो कृषि कानून को वापस लेने का निर्णय देश वासियों को सुनाया था , उन्होंने किसान भाइयों से माफ़ी भी मांगी थी  |

                      बुंदेलखंड के  महोबा की अपनी एक अलग ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है , आल्हा उदल की वीरता के किस्से आज भी बुंदेलखंड ही देश भर में बड़े चाव से सुने जाते हैं | महोबा में पीएम मोदी ने अर्जुन सहायक परियोजना के साथ 3263 करोड़ के विकास  कार्यों का लोकार्पण किया | यहाँ के पुलिस लाइन ग्राऊंड में विशाल जन समूह को सम्बोधित करते हुए उन्होंने महोबा वासियों को प्रणाम किया | बुंदेलखंड में प्रणाम  कहने का अपना एक अलग अर्थ और महत्व है , बुंदेलखंड वासियों ने पहली बार किसी पी एम् को मंच से प्रणाम करते सुना है | दरअसल आल्हा उदल की यह वीर भूमि महोबा  कई ऐतिहासिक बदलावों की साक्षी रही है ,| तीन तालक कानून की पीएम मोदी ने  सबसे पहले यही घोषणा की थी | सिचाई और पेयजल समस्या इस इलाके की बड़ी समस्या है , जिसका समाधान करने का उन्होंने प्रयास किया है | केन सिचाई परियोजना पर भी उन्होंने  जो संकेत दिए उनके अनुसार संभवतः इस परियोजना की भी शीघ्र शुरुआत होगी | यहां उंहोने पलायन , सिचाई, लड़कियों की शादी , बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों को उठाया | विपक्षियों पर निशाना साधते हुए वे यहाँ कह गए की अब बुंदेलखंड के विकाश का काम रुकने वाला नहीं है चाहे जितने हाय तौबा मचा लो |

 महोबा के बाद वे झांसी पहुंचे जहां  किले के पास उन्होंने 6600 करोड़ के लागत वाली  डिफेन्स कॉरिडोर के पहले प्रोजेक्ट की आधार शिला  रखी | ” राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व ” इस आयोजन को नाम दिया गया था | सेना को स्वदेशी लाइट कॉम्बेट हेलीकाप्टर सौंपा, इलेक्टॉनिक वारफेयर सूट देश की नेवी को सौंपे , ड्रोन और यू ए वी आर्मी को सौंपे |  ,अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क शिलान्यास किया | एन सी सी के पूर्व छात्र संघ का शुभारम्भ कर उन्होंने देश के दुश्मनो को भारत के सामरिक महत्व और रणनीतिक कुशलता से भी अवगत कराने का प्रयास किया | झांसी को क्रांतिकारियों  की काशी कहते हुए उन्होंने  कहा कि  ये झांसी, रानी लक्ष्मीबाई की ये धरती बोल रही है- मैं तीर्थ स्थली वीरों की, मैं क्रांतिकारियों की काशी, मैं हूं झांसी, मैं हूं झांसी, मैं हूं झांसी, मैं हूं झांसी…| 

                         अब जब पीएम और सीएम करोडो के विकाश की आधार शिला बुंदेलखंड में रख गए हों , विपक्ष पर तीखे वार भी कर गए हों तो भला विपक्ष कैसे चुप रहता | इन्ही तमाम बातों के जबाब देने 27 नवम्बर दिन शनिवार को प्रियंका वाड्रा ने महोबा के छत्रसाल स्टेडियम में पीएम सी एम् , सपा ,बसपा पर जमकर प्रहार किये | मोदी की तरह उन्होंने भी बुंदेलखंडी बोलकर लोगों को आकर्षित करने का जतन  किया | बुंदेलखंड के किसानो की आत्म ह्त्या , बेरोजगारी , खनिज ,अन्ना पशुओ की समस्या पर लोगों का ध्यान खींचा | कांग्रेस कैसे  विकाश  करेगी इसका प्रतिज्ञा पत्र बताते हुए उन्होंने गोबर खरीदने , कर्ज माफ़ी , बिजली बिल हाफ करने जैसी बातें उन्होंने कही | पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज कस्ते हुए उन्होंने बुंदेलखंडी कहावत कही  “” लबरा बड़ा की दोंदा ” |

                        बुंदेलखंड इलाके में बीजेपी और कांग्रेस की सभाओं के बाद भला सपा कैसे पीछे रह सकती है | पार्टी के सूत्र बताते हैं की एक दिसंबर को हेलीकॉप्टर से बांदा पहुंचेंगे , और बांदा में विजय रथ पर सवार होकर प्रचार करते हुए महोबा जाएंगे |

                          दरअसल बुंदेलखंड के उत्तर प्रदेश के दो मंडल हैं , एक है चित्रकूट और एक है झाँसी मंडल | इन दोनों मंडलों में 19 विधान सभा सीटें आती है | पिछले विधान सभा चुनाव में ये सभी सीटें बीजेपी की झोली में गई थी | इसबार भी बीजेपी जहां अपनी स्थिति को यथावत रखना चाहती है वही कांग्रेस ,सपा और बसपा यहाँ सेंध लगाने में जुटी है |