बुंदेलखंड में नष्ट होते खेल मैदान 

रवीन्द्र व्यास

 बुंदेलखंड का छतरपुर शहर लगभग ३सौ वर्ष पहले बसाया गया था | चारों और से पहाड़ियों से घिरे इस शहर की प्राकृतिक सुंदरता मन को मोह लेती थी | समय का चक्र कुछ इस तरह घूमा कि इस खूबसूरत शहर को बदसूरत  बनाने में हमारे आधुनिक राज के लोगों ने कोई कसर नहीं छोड़ी | हद  तो तब हो गई जब शहर के मैदानों को समाप्त करने के बाद शहर के विद्यालयों के मैदानों के सफाये का भी अभियान प्रशासन ने शुरू कर दिया |  शायद जिले में सरकार की नीतियां नहीं मानने का  अधिकारियों ने संकल्प लिया है और नेता मौनी बाबा हो गए हैं |

                                                                                                             सरकार  कहती है   शासकीय स्कूलों में खेल सुविधाओं के विकास के लिये नीति बनाई है। म.प्र. मंत्री परिषद ने दिनांक 30 जून 2005 को खेलों के विकास के लिए  नवीन खेल नीति 2005 बनाई | इसका समय समय पर सुधार भी किया गया | 2015 में भी इसके लेकर सरकार ने अपनी चिंता जाहिर की थी | और तय किया था कि खेल   नीति के  यान्वयन  में  खेल मैदान का निर्माण, सुदृढ़ीकरण और खेल उपकरण एवं खेल सामग्री को खरीदा जायेगा। शासन ने स्कूल शिक्षा विभाग के सभी संभागीय संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी और विद्यालय प्रमुखों को नीति का अक्षरश: पालन करवाने के निर्देश भी  दिये थे । मजेदार यह है मध्य प्रदेश की खेल नीति बनने और उसके विस्तार के हर मौके पर बच्चों के मामा शिवराज सिंह चौहान सत्ता के शीर्ष पर आशीन हैं , इसे संयोग कहें या छतरपुर नगर के लोगों का दुर्भाग्य कि छतरपुर के स्कूल के खेल मैदान को समाप्त करने के अभियान के समय भी प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ही हैं |

                हम बात कर रहे हैं   शहर के मॉडल बेसिक स्कूल की | सरकार की एक योजना के तहत यह मॉडल स्कूल किशोर सागर के नजदीक  बनाया गया था| मॉडल स्कूल बनाम आदर्श विद्यालय में शैक्षणिक आदर्श के सभी माप दंड स्थापित करने के प्रयास सरकार ने किये थे | यहां बेहतर शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी , बच्चों के सर्वांगीण विकाश के लिए खेल मैदान भी इस स्कूल को दिया गया था | उस समय इसका रुआब इतना था कि  जिले के कलेक्टर और  एसपी के  ही नहीं बल्कि तमाम सरकारी अधिकारियों के बच्चे यहाँ  पढ़ते थे। विद्यालय में प्रवेश के लिए लोगों को सिफारिश लगानी पड़ती थी |  उम्र की ढलान पर पहुँच चुके नगर के अनेकों प्रमुख लोगों ने  इसी  स्कूल से  ज्ञान पाया और समाज में सम्मान पाया |

आज उसी  स्कूल  की  ऐसी  दुर्दशा  की गई है कि किसी ने कल्पना भी नहीं की थी | पहले इस स्कूल की भूमि पर शिक्षा विभाग का कार्यालय बनाया गया | स्कूल भूमि पर कार्यालय बनने पर जब यहां के लोग मौन रहे तो प्रशासन को लगने लगा हम चाहे जो करें यहां के कागजी शेर कुछ नहीं कर सकते | उनके हौसले और बुलंद हुए और विद्यालय के खेल मैदान पर  पांच मंजिला कन्या  छात्रा वास बनाया जाने लगा |  इसे   देखकर लोगों में  अब  आक्रोश जाग्रत हुआ है । मॉडल बेसिक स्कूल में समाज के लोगों ने  राजनैतिक नेताओं ने   खेल  मैदान को बचाने के लिए एक बैठक की। बैठक में तय किया गया कि खेल के मैदान को  बचाने के लिए आंदोलन  करेंगे  और आंदोलन करने के बावजूद भी यदि काम बंद नहीं किया जाता तो फिर एक जनहित याचिका जबलपुर हाईकोर्ट में लगाई जाएगी।

 शहर और जिले को चारागाह समझने वाले अधिकारियों की नजर इस खेल मैदान पर काफी समय से लगी है |  2008 में भी  इस खेल मैदान में छात्रावास बनाया जा रहा था ,तब भाजपा की तत्कालीन विधायक ललिता यादव ने इस निर्माण को मौके पर पहुंचकर रूकवाया था | तत्कालीन कलेक्टर उमाकांत उमराव ने खेल मैदान पर कोईभी निर्माण कार्य नहीं होने का आश्वासन दिया था। \

 जिस अनैतिक कार्य का विरोध करने के लिए नगर और जिले के नेताओं को आगे आना चाहिए उसके लिए भी  पत्रकारों को पहल करना पड़ रही है | खेल प्रेमियों , समाजसेवियों एवं पत्रकारों ने पिछले दिनों  एक ज्ञापन छतरपुर एसडीएम बीबी गंगेले  और कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर प्रियांशीभंवर को दिया। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि खेल के मैदान के  मूल रूप में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। मांग की गई कि   शासन की गाइड लाइन के अनुसार खेल के मैदानों को यथावत रखा जाए और खेल के मैदानों पर कई नया निर्माण कार्य नहीं कराया जाए |पूर्व में भी यहां कन्या छात्रावास बनाए जाने का प्रस्ताव किया गया था। तब तत्कालीन राज्यमंत्री ललिता यादव ने इस कन्या छात्रावास को रुकवाया था | मन मर्जी के मालिक प्रशानिक तंत्र ने ज्ञापन अपनी टेबिल के सेफ केस में रख लिया है और निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है | 

सरकार की खेल नीति 

सरकार ने  शासकीय स्कूलों में खेल सुविधाओं के विकास के लिये जो  नीति बनाई गई है उसमे  खेल मैदान का निर्माण, सुदृढ़ीकरण और खेल उपकरण एवं खेल सामग्री को खरीदा जायेगा। शासन ने स्कूल शिक्षा विभाग के सभी संभागीय संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी और विद्यालय प्रमुखों को नीति का अक्षरश: पालन करवाने के निर्देश दिये हैं।

 खेल नीति के अनुसार   खेल मैदान के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य निर्धारण का संकल्प लिया गया था |   जिसमे यह भी तय किया जाना था कि  किस संभाग में कौन-कौन-से खेल के लिये सुविधाओं का विकास किया जाना  है।  एक साल में कार्य पूरे नहीं होते हैं तो अगले सालों में उसे पूरा करने के लिये जरूरी राशि दी जायेगी।

 स्कूलों में खेल सामग्री, उपकरण की खरीदी के लिये जिला-स्तर पर तकनीकी समिति बनेगी। समिति में व्यायाम शिक्षक, उत्कृष्ट खिलाड़ी एवं खिलाड़ी विद्यार्थियों को शामिल किया जायेगा। खुली निविदा के जरिये गुणवत्ता के आधार पर नियमानुसार सामग्री खरीदी जायेगी। इण्डोर गेम्स के लिये जिलों में मल्टीपर्पज हॉल का निर्माण होगा। विद्यालय में एक खेल मैदान होना आवश्यक होगा | इसी तर्ज पर सरकार ने निजी स्कूलों की मान्यता के लिए भी खेल मैदान को आवश्यक किया है |

 छतरपुर शहर ही नहीं जिले के अनेकों स्थानों पर स्कूल  के खेल मैदानों को नष्ट करने का एक सुनियोजित चक्र चलाया जा रहा है | यह कार्य भी वे लोग कर रहे हैं जिनको इसके संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है | मतलब साफ़ है खेत ही बारी खा रही है |

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