बेटीया ही माता पिता के पुरे जीवन का सबसे बडा स्वाभिमान बेटी ही अपने माता पिता की सबसे अधिक चिंता करने वाली संतान होती है- पं नारायण जी

8:55 pm or December 31, 2021

महावीर अग्रवाल

मन्दसौर / शामगढ ३१ दिसंबर ;अभी तक;   भगवान श्री धर्मराजेश्वरजी की असीम कृपा से समस्त भक्तगणो के
द्वारा माहेश्वरी भवन शामगढ रोड चंदवासा में श्रीमद भागवत कथा का भव्य
आयोजन किया जा रहा है। श्रीमद् भागवत कथा के छटे दिवस में व्यासपीठ से
भागवतचार्य पं मुकेश शर्मा नारायण जी के द्वारा कहा गया कि हर युग में
माता पिता के लिये बेटीया ही सबसे बडा स्वाभिमान होती है। अपने माता पिता
की सर्वप्रथम चिंता संतान बेटी ही होती है यदि माता पिता को हल्की सी
पीडा हो तो बेटीयो के हदय में स्वयं ही अहसास होता है कि माता पिता
निश्चित ही संकट में है। बेटीया ही माता पिता के लिये पुरे जीवन का मान
सम्मान, धन दलौत बेटी ही होती है। अपने माता पिता की चिता करने वाली
बेटीया ही सदैव अपने माता पिता के स्वाभिमान को ध्यान रखते हुए जीवन में
आगे कदम बढती है लेकिन आज के कलयुग में इस मोबाईल युग के चलते हुए कलयुग
की छाया में आते हुए कई कलयुगी बेटीया भी अपने माता पिता की इच्छा के
विरूद्ध कदम उठाते उन माता पिता जिना मुश्किल कर देती है। ऐसी बेटियो को
ज्ञात होना चाहिए कर्म ही प्रधान होता है। कर्म के प्रति फल  भोगना
निश्चत है जिस प्रकार जिन बेटीयो के द्वारा माता पिता के मन को प्रताडित
किया है तो स्वयं ये प्रताडना उनके अपने जीवन में भोगना निश्चत है क्योकि
बेटी वह धन है जो अपने कुल से साथ साथ अपने सुसराल पक्ष के कुल को भी इस
भव्यसागर के नईया से पार करती है।

 

श्रीमद् भागवत कथा के छटे दिवस में पंश्री नारायण जी ने भागवान श्री कृष्ण एवं रूकमणी विवाह महोउत्सव को संुदर
वर्णन करते हुए कहा कि भागवान श्री कृष्ण अपने मामा कंस की वेर भक्ति को
स्वीकार करते हुए मथुरा को आगमान करते है एवं पुरे जीवन भर जो भक्त मथुरा
के अंदर श्रीकृष्ण ही राह की दर्शन के लिये निहार रहे थे उन समस्त भक्तो
को दर्शन देकर उनके जीवन का उ;द्धार करते है एवं मामा कंस के समस्त
रक्षसो को मारकर उनका भी उद्धार करते है। अंत समय मामा कंस से युद्ध कर
मामा कंस को मारकर उनका भी उद्धार करते है। अपने माता पिता एवं नाना को
काल कोठारी से मुक्त कराकर क्षमा याचना करते है एवं अपने माता पिता के
दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाते है। अपने भक्तो के साथ द्वारिका नगरी
का निर्माण करते है। जिसकी रानी बनाने के लिये रूकमणीजी से विवाह करते है

श्रीमद् भागवत कथा के छटे दिवस में समस्त भक्तगणो द्वारा भगवान
श्रीकृष्ण रूकमणी महोउत्सव में भजनो की धुन पर खुब जमकर नृत्य किया।
श्रीमद भागवत कथा के छटे दिवस की आरती प्रसादी लक्ष्मीनाराण डपकरा के
द्वारा की गई। यह जानकारी परिषद सदस्य मनीष शर्मा के द्वारा दी गई।