बैंक से सवा करोड़ के गबन में मशहूर क्रिकेटर के पिता गिरफ्तार

9:33 pm or June 6, 2022

मयंक भार्गव

बैतूल ६ जून ;अभी तक;  भारतीय क्रिकेट टीम के धाकड़ बल्लेबाज और शानदार विकेटकीपर रहे नमन ओझा के पिता विनय ओझा को बैतूल जिले के जौलखेड़ा में स्थित महाराष्ट्र बैंक में फर्जी खाते खोलकर एवं केसीसी में लोन की राशि ट्रांसफार्मर कर आहरित करने के आरोप में मुलताई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। क्रिकेट के पिता ने करीब सवा करोड़ रुपए का यह गबन अपने साथियों के साथ महाराष्ट्र बैंक जौलखेड़ा में बतौर बैंक प्रबंधक रहने के दौरान किया था जिससे उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुलताई पुलिस थाने में वर्ष 2013 में मामला दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद से वह लगातार फरार चल रहे थे। मुलताई पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर सोमवार को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायालय में पेश किया गया है।

वर्ष 2013 में किया था सवा करोड़ का गबन

मुलताई थाना प्रभारी सुनील लाटा ने बताया कि मशहूर क्रिकेटर नमन ओझा के पिता वीके ओझा को सवा करोड़ के गबन के एक मामले में मुलताई पुलिस ने सोमवार को  गिफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है, जहां से उन्हे एक दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। बैंक आफ महाराष्ट्र की जौलखेड़ा शाखा में वर्ष 2013 में हुए लगभग सवा करोड़ रूपयें के गबन के मामले में तत्कालीन मेनेजर विनय ओझा की गिरफ्तारी हुई। तत्कालीन बैंक मैनेजर वीके ओझा पर धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज है।

वीके ओझा से पुलिस कर रही पूछताछ

थाना प्रभारी श्री लाटा ने बताया कि  केस दर्ज होने के बाद से वीके ओझा फरार चल रहे थे। उनकी पुलिस तलाश कर रही थी। मामले में संलिप्त आरोपियों पर धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120 बी, 34 और आईटी एक्ट की धारा 65,66 के तहत केस दर्ज था। मामले में संलिप्त सभी आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके है। पुलिस ने तत्कालीन मैनेजर वीके ओझा को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड में ले लिया है।

एक नजर में पूरा घटनाक्रम

वर्ष 2013 में  बैतूल जिले के ग्राम जौलखेड़ा में स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा में बैंक मैनेजर अभिषेक रत्नम पदस्थ थे। अभिषेक ने पदस्थ होने के दौरान यह साजिश रची और उनका तबादला होने के बाद सफाई कर्मी एवं अन्य के साथ मिल कर रविवार 2 जून 2013 को लगभग 34 फर्जी खाते खुलवा कर इन पर केसीसी का लोन ट्रांसफर कर लगभग सवा करोड़ रूपये का आहरण कर लिया गया। जिस समय यह गबन हुआ तब बैक आफ महाराष्ट्र शाखा में वीके ओझा शाखा प्रबंधक के पद पर पदस्थ थे। इसके बाद पूर्व बंैक मैनेजर अभिषेक रत्नम, विनोद पंवार, लेखापाल निलेश छलोत्रे, दीनानाथ राठौर सहित तत्कालीन मैनेजर वीके ओझा द्वारा गबन की राशि आपस में बांट ली थी।

एक साल बाद शाखा प्रबंधक ने की थी शिकायत

मुलताई पुलिस थाना प्रभारी सुनील लाटा ने बताया कि इस गबन के मामले में लगभग एक साल बाद तत्कालीन शाखा प्रबंधक रितेश चतुर्वेदी ने 19 जून 2014 को ब्रांच में हुए गबन की शिकायत मुलताई पुलिस थाने में की थी। शिकायत में बताया कि फर्जी नाम और फोटो के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर बैंक से राशि आहरित की गई है। तरोड़ बुजुर्ग निवासी दर्शन पिता शिवलू की मौत होने के बाद भी उसके नाम से खाता खोलकर रुपए आहरित कर लिए गए। अन्य किसानों के नाम से भी किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर लगभग सवा करोड़ रुपए की राशि आहरित की गई थी।

इन धाराओं के तहत दर्ज किया था मामला

शिकायत के बाद मुलताई पुलिस ने जांच के दौराान पाया था कि राशि आहरित करने के बाद बैंक मैनेजर अभिषेक रत्नम, विनय ओझा, लेखापाल निलेश छलोत्रे, दीनानाथ राठौर सहित अन्य ने राशि आपस में बांट ली थी।  पुलिस ने अभिषेक रत्नम, विनय ओझा, निलेश छलोत्रे सहित अन्य के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120 बी, 34 और आईटी एक्ट की धारा 65,66 के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले में तत्कालीन बैंक मैनेजर अभिषेक रत्नम, निलेश छलोत्रे सहित अन्य की गिरफ्तारी पूर्व में हो गई थी। केस दर्ज होने के बाद से वीके ओझा फरार थे। टीआई सुनील लाटा ने बताया सोमवार को वीके  ओझा को गिरफ्तार कर न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायालय में पेश किया गया है।