बैतूल की बेटियों ने हॉकी में बंगाल को दी शिकस्त

मयंक भार्गव

बैतूल २३ अक्टूबर ;अभी तक;  मध्यप्रदेश की हॉकी टीम में बैतूल की बेटियां भी खेल रही है। बैतूल की बेटियों ने मध्यप्रदेश की टीम के साथ खेलते हुए बंगाल की टीम को करारी शिकस्त देकर धमाकेदार जीत दर्ज की है। झांकी में चल रही नेशनल हॉकी प्रतियोगिता में बैतूल की बेटियों ने अपना जीत का परचम लहरा दिया है।

बैतूल की दो बेटियों ने किए दो गोल

वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी एवं सक्रिय समाजसेवी हेमंतचंद्र दुबे ने बताया कि शनिवार को मध्यप्रदेश की सीनियर महिला हाकी टीम ने नेशनल सीनियर  हॉकी प्रतियोगीता में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए बंगाल हाकी को 15 के मुकाबले 0 से पराजित करते हुए धमाकेदार शुरुआत  की है। इस टीम में खेल रही बैतूल की दो बेटियों ने भी मध्यप्रदेश की और से एक-एक गोल करते हुए इस जीत में अपना अहम योगदान देते हुए सार्थक और अपने चयन को सही साबित करते हुए अपनी खेल प्रतिभा का परिचय दिया है।

पहला ज्योति और नौवा भूमि ने किया गोल

सेंटर  हाफ़ पर खेलते हुए  बैतूल की बेटी ज्योति पाल ने खेल के नौवे मिनट में मध्यप्रदेश  की और से पहला गोल करते हुए मध्यप्रदेश का खाता  खोलते हुए शानदार शुरुआत की। इसके बाद तो मानो मध्यप्रदेश के खिलाडिय़ों  ने गोलो की झड़ी लगा दी। मध्यप्रदेश  की और से नौवा गोल बैतूल की बेटी भूमि जो टीम में राइट इनसाइड पोजीशन खेल रही है कि स्टिक से निकला। बैतूल के लिये एक और बड़ी उपलब्धि है कि बैतूल की ही एक बेटी कीर्ति देशमुख भी इसी प्रतियोगिता में महाराष्ट्र से गोल कीपर  है।

बैतूल की बेटियों ने किया गौरवान्वित

बैतूल की बेटियों के लिये सबसे गर्व का दिन है जब उन्होंने अपने खेल का प्रदर्शन उस भूमि पर किया जिस भूमि पर दुनिया के महानतम हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद  खेलते थे। यही वह धरती है जहां रात में चांद  की रोशनी में अभ्यास करके ध्यान सिंह ध्यानचंद के नाम से विख्यात  हुये। इसी धरती पर हॉकी खेलते हुये कैप्टन रुप सिंह ने भारत का नाम दुनिया मे रोशन  किया। इसी झांसी से भारत के विश्व विजेता अशोक कुमार ने अपनी हॉकी  को निखारा। अब्दुल  अजीज, सुबोध खाण्डेकर, तुषार खाण्डेकर जैसे भारतीय हाकी सितारे झांसी की धरती से खेल कर ही बड़े हुए इसलिये किसी  भी हाकी खिलाड़ी के लिये वह बहुत गौरवशाली पल होते है जब वह झांसी की धरती से अपनी हाकी स्टिक से मैदान को छूता है।

झांकी की धरती है पावनधाम

सक्रिय समाजसेवी एवं पूर्व हॉकी खिलाड़ी श्री दुबे ने बताया कि हॉकी खिलाड़ी के लिये झांसी की धरती किसी धार्मिक पवित्र स्थान से कम नहीं है। आज बैतूल अपने उस पूर्व हॉकी प्रशिक्षक पूजा  कुरील को भी याद करता है जिनकी अथक मेहनत और परिश्रम से बैतूल की इन बेटियों ने यह मुकाम हासिल किया है। बैतूल की इन बेटियों  को भविष्य  के लिए  बहुत बहुत  शुभकामनाएं  है किी वे  अपनी-अपनी प्रतिभा का भरपूर  प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रौशन  करें।