बैतूल पहुंचे राष्ट्र संत ललितप्रभ सागर महाराज, जीवन जीने की कला पर दिया मार्गदर्शन

2:11 pm or June 4, 2022

मयंक भार्गव

बैतूल ४ जून ;अभी तक;  राष्ट्र संत ललितप्रभ सागर महाराज आज 4 जून शनिवार को बैतूल पहुंचे। इस अवसर पर सकल जैन समाज द्वारा महाराज की भव्य अगवानी की गई। शनिवार को राष्ट्रसंत परसोड़ा से विहार कर प्रात: 7 बजे जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां नेहरू पार्क स्थित कीर्ति स्तंभ से महाराजश्री की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा जिला अस्पताल से होकर दीपचंद गोठी मार्ग, इसके बाद मरोठी ज्वेलर्स में नवकारसी के बाद कमानी गेट से होते हुए जैन दादावाड़ी पहुंची।
महाराज के आगमन पर बैतूल सकल जैन समाज द्वारा दो दिवसीय धार्मिक सत्संग का आयोजन चक्कर रोड स्थित वरद मैरिज लान में आयोजित किया गया है।

राष्ट्र-संत महोपाध्याय ललितप्रभ सागर महाराज एवं डॉ. मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज के दो दिवसीय प्रवचन आज शनिवार से शुरू हुए। संत प्रवर जीवन जीने की कला पर शहर वासियों को मार्गदर्शन दिया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे।

आयोजित प्रवचन में राष्ट्रसंत ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा अच्छे व्यक्तित्व की निशानी हैं सकारात्मक सोच, मधुर वाणी, विनम्र व्यवहार, उदार दिल और समय व वचन का पाबंद। उन्होंने कहा कि स्वयं को सदा मुस्कुराते हुए और सकारात्मक रखिए। मुस्कान से जहां आपका दूसरे पर सीधा पॉजीटिव असर पड़ेगा, वहीं सकारात्मक व्यवहार से आप सीधा दूसरे के दिल में उतर जाएंगे। किसी का सुन्दर चेहरा केवल दो दिन याद रहता है, पर आपके द्वारा किया गया मधुर व्यवहार आपको चिर स्थायी बना देता है।

हम जीवन में जितना महत्व अपने भेष को दें उतना ही अपनी भाषा को भी दें। व्यक्ति की भाषा ही उसके जीवन को परिभाषित करती है। जिन्हें बोलना आता है उनकी मिर्ची भी बिक जाती है, बोली में मिठास और अदब न हो तो मिठाई भी पड़ी रह जाती है।