बॉयोडीजल मामले में तीन एफआईआर हुई दर्ज, 9 सेम्पल्स जांच के लिए भेजे गए थे सभी अमानक स्तर के पाए गए

6:21 pm or November 21, 2022

आशुतोष पुरोहित

खरगोन 21 नवम्बर ;अभी तक;  11 नवम्बर को सूचना के बाद कलेक्टर श्री कुमार पुरुषोत्तम के निर्देशन में दो एसडीएम और एसडीओपी ने जांच के बाद कई अवैध डीजल/केमिकल, गेहूँ व यूरिया का संग्रहण और विक्रय का कारोबार उजागर हुआ था। इसके बाद कलेक्टर श्री कुमार ने पुलिस, राजस्व, आपूर्ति, आईटी, अभियोजन व अन्य विभागों के अधिकारियों को शामिल कर जांच समिति गठित की थी। समिति ने परत दर परत जांच के बाद अवैध कारोबार उजागर किया। समिति ने बालाजी बॉयोडीजल पम्प और इससे जुड़े गोडाउनांे की जांच के बाद पूर्व में भी दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई है। ये दो एफआईआर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के गेहूँ और एक यूरिया के अवैध संग्रहण जिसमें बिना लॉट नम्बर और बिना विक्रय दर व अन्य अनियमत्ता पाये जाने पर कार्रवाही की गई। जबकि बॉयोडीजल के मामले में गहन और हर एक पहलुओं पर जांच के बाद पम्प मालिक सहित सहयोगियों पर तीन एफआईआर दर्ज कराई गई है।

पहली एफआईआर

पूर्व में गेंहू और यूरिया मामले में एक-एक एफआईआर दर्ज कराने के बाद डीजल के मामले में पहली एफआईआर जय मांडवरायजी आशापुरा नगर एसटी-1 कथारिया मेन रोड राजकोट गुजरात के घनश्याम सिंह और सिगमा पेट्रोकेम 202, नक्षत्र हाइट 150 फिट रिंग रोड रैय्या एक्सचेंज राजकोट के विरुद्ध कराई गई है। एफआईआर के अनुसार निमरानी के बालाजी इंटरप्राइजेस प्लाट नम्बर-38 में 11 नवम्बर को जांच की गई थी। यहां अवैध रूप से बॉयोडीजल/केमिकल का संग्रहण एवं क्रय विक्रय पाये जाने पर 12 नवंबर को सील किया गया था। यहाँ से 3 टैंक और दो टैंकरों में कुल 107500 लीटर बॉयोडीजल/केमिकल पाया गया। जिसकी क्रय-विक्रय या संग्रहण की कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इसमें उपभोक्ताओं से छल कपट करने के उद्देश्य से बॉयोडीजल के नाम से मिलावटी ईंधन तैयार कर विक्रय कर शासन के राजस्व की चोरी करने का कृत्य किया गया। इसके अलावा जैव-डीजल की बिक्री के दिशा-निर्देश 2019 और प्रमुख सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से 9 फरवरी 2022 को जारी तथा प्रदेश में परिवहन के लिए हाईस्पीड डीजल के साथ मिश्रण के लिए बॉयोडीजल का उत्पादन एवं बिक्री के सम्बंध में निर्देशों का उल्लंघन कर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत दंडनीय अपराध है। भादसं 1860 की धारा 120 बी, 285 व 420 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में 3 व 7 में प्रकरण दर्ज किया गया है।

दूसरी एफआईआर

निमरानी स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग बॉयोडीजल पम्प के पीछे के गोडाउन में टैंकरों एवं टैंक में संग्रहित बॉयोडीजल/केमिकल की जांच की गई थी। जांच के बाद रिपोर्ट में नमूने निर्धारित मापदंड के नहीं पाये गए थे। इस गोडाउन में 2 लोहे की ट्रॉली, जो बॉयोडीजल/केमिकल मिक्स करने के उद्देश्य रखी गई थी। जिसमें एक फूटी हुई तथा एक 1.5 एचपी की कुल 2 मोटर पम्प, 2.5 इंच के पाइप जो लगभग 50-50 फिट के कुल 3 तथा 3 इंच के 50-50 फिट के कुल 4 बॉयोडीजल/केमिकल भरने व खाली के उद्देश्य से बिना सुरक्षा के उपयोग में लाये जा रहे थे। वही 1 जनरेटर जो मोटर पम्प युक्त मिला। इसके अलावा छोटी मोटर टुल्लू पम्प दो नग, 60 लीटर क्षमता के दो केन खाली पायी गई। मौके से सिंटेक्स की एक खाली 1000 लीटर क्षमता की टंकी, एक हीरो होंडा की सीडी 100 मोटर सायकिल तथा एक प्लास्टिक की कीप, एक जार 1 लीटर क्षमता का हाइड्रोमीटर 1 नग और एक थर्मामीटर पाया गया। इस तरह की सामग्री कारोबार स्थल पर पाए जाने से स्पष्ट होता है कि बॉयोडीजल तैयार किया जाना तथा कारोबार स्थल पर पाए गए उपकरणों से बॉयोडीजल/केमिकल को मिक्स कर लोड अनलोड एवं विक्रय के लिए ले जाना और विक्रय किया जाता है। मौके से एक टोयटा इनोवा कार एमपी 09 सीएम 0356 पायी गई। इससे बॉयोडीजल के अवैध कारोबार के उपयोग के लिए पायी गई तथा फर्म द्वारा अवैध रूप से संचालित बालाजी कॉमर्स बॉयोडीजल निमरानी में बॉयोडीजल की आपूर्ति करना पाया गया। जिस स्थान ये सब पाया गया उस फर्म के संचालन के सम्बंध में कोई भी पंजीयन किसी भी विभाग का नहीं पाया गया। इसके अलावा बॉयोडीजल/केमिकल के संग्रहण के सम्बंध में फर्म के पास कोई अनुमति नहीं पायी गई और ना ही जांच के समय प्रस्तुत किये गए। वही फर्म से बॉयोडीजल/केमिकल क्रय का हिसाब बिल, रेकॉर्ड आदि भी नहीं पाये गए और ना ही जांच के दौरान प्रस्तुत किये गए। इस प्रकरण में भादसं 1860 की धारा 120बी, 285 और 420 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 और 7 के तहत दंडनीय है। इसमें महेश रामस्वरूप अग्रवाल डी-7 स्कीम नम्बर 98 इंदौर, रौनक मधुसूदन गर्ग निमरानी और मातादीन रामस्वरूप अग्रवाल निमरानी पर प्रकरण दर्ज किया गया है।

तीसरी एफआईआर

निमरानी में डीजल संग्रहण व विक्रय के पूरे मामले में मुख्य केंद्र बॉयोडीजल पम्प के महेश रामस्वरूप अग्रवाल, रौनक मधुसूदन गर्ग, मातादीन रामस्वरूप अग्रवाल, पलाश महेश अग्रवाल और श्रीमती आरती महेश अग्रवाल पर भादसं 1860 की धारा 406, 409, 420, 120 बी और 285 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 3 और 7 में एफआईआर दर्ज की गई। 11 नवम्बर को जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्यवाही के बाद पम्प सील कर दिया गया था। इससे पूर्व 6 जून 22 को खाद्य, राजस्व और नापतौल विभाग द्वारा संयुक्त दल ने विभिन्न अनियमितताओं के बाद सीलबंद के प्रकरण अपर कलेक्टर के न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया गया था। इस प्रकरण के आदेश दिनांक 18 अगस्त 22 को 6138 लीटर बॉयोडीजल शासन पक्ष में राजसात कर क्रय-विक्रय तत्काल प्रतिबंधित किया गया था। साथ ही बॉयोडीजल क्रय-विक्रय एवं भंडारण के लिए जारी अनुमति को 17 जनवरी 22 को जारी आदेश 30 अगस्त 22 के आदेश से निरस्त किया गया। 11 नवम्बर के बाद लगातार कार्यवाही और जांच के बाद पम्प से 15896 लीटर बॉयोडीजल/केमिकल और एक कच्चा हिसाब रजिस्टर और दो कर जब्त की गई। जब्त समाग्री का बाजार मूल्य 2198680 आंकी गई।