भगवान पशुपतिनाथ ने जल सत्याग्रह करने वाले भक्तों की आवाज को सुना 19 वे दिन भी श्रमदान जारी रहा 

10:33 pm or June 6, 2022
महावीर अग्रवाल 
मन्दसौर ६ जून ;अभी तक;  लगातार शिवना शुद्धिकरण अभियान अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए सतत सेवा देने वाले जल सत्याग्रह करने वाले जिन्होंने जनवरी माह में 5 डिग्री ठंड के अंदर जल में खड़े होकर 40 जल सत्याग्रह 15 लोगों के द्वारा किया गया था उस समय की आवाज को भगवान पशुपतिनाथ जब सुना तो नगर की जनता को विश्वास हो चला कि किसी का किया हुआ तप और उपासना बेकार नहीं जाता।
                  जल सत्याग्रह के मुख्य जल सत्याग्रह केशव शिंदे ने कहा हमारा हमारा जल सत्याग्रह चलने का मुख्य उद्देश्य मां शिवना के लिए अपने शरीर को कष्ट देकर हृदय की आवाज को भगवान पशुपतिनाथ तक पहुंचाना। अरूण गौड़ ने कहा हमें पूर्ण विश्वास था जब शासन प्रशासन द्वारा जनप्रतिनिधियों द्वारा हमारे जनवरी माह के ठंड में खड़े रहने की आवाज को किसी ने नहीं सुना  तो भगवान पशुपतिनाथ महादेव इस आवाज को सुनेंगे। सत्येंद्र सिंह सोम ने एक ही आवाज दी कि आज नहीं तो कल हमारा यह संघर्ष अवश्य काम आएगा जिन की जवाबदारी थी उन्होंने ध्यान नहीं दिया लेकिन हम विश्वास था कि यह परिणाम बहुत सुखद होंगे और आज जल देखकर ऐसा लगता है कि भविष्य में स्थाई समाधान भी होगा।
बंसीलाल टांक ने कहा जब कोई आपकी आवाज ना सुने तो ईश्वर आपकी आवाज अवश्य सुनता है और यह शिवना आज हजारों भक्त शिवना के जल को देखकर अपने मन को प्रफुल्लित  करने के साथ एक संदेश लेकर जाते हैं कि यह भगवान पशुपतिनाथ की नगरी जहां कलकल बहती शिवना देखकर लगता है कि यह अति प्राचीन नगरी है ।
शिवना शुद्धिकरण महाअभियान में सुनील बंसल, रमेश सोनी, हरिनारायण टेलर, अजीजउल्ला खान खालिद, राजाराम तवर इन्होंने सतत जल सत्याग्रह में सहयोग प्रदान किया। 1 घंटे तक नियमित खड़े होकर अपने संकल्प को मजबूती के साथ विश्वास के साथ एक ही सपना की मॉ शिवना के अंदर जल कल कल बहता रहे और इसमें गंदगी ना मिले।
हरिशंकर शर्मा पूर्व सीएमओ द्वारा जल सत्याग्रह के लिए उस समय उनके शरीर को कोई कष्ट न पहुंचे उनके लिए तिल गुड़ की व्यवस्था करते थे। आज ऐसे महान आंदोलन को कल्पना करके खुश हैं। सतत सभी जलसत्याग्रह करने वाले लगातार 19 दिन से अपनी सेवाएं दे रहे है जिनमें विकास बसेर, वर्षा बसेर, सीमा चौरड़िया एक सपने को लेकर आगे बढ़ रहे हैं हम शिव ना को कल कल बहती रहने तक कमजोर नहीं पडेगे।
विनय दुबेला, मनीष भावसार शिवना के प्रति अटूट प्रेम सब कुछ अपना शिव ना मां को मानते हुए एक ही लक्ष्य सुना आज नहीं तो कल अपना विहंगम अवश्य दिखाएगी। गंदगी बंद होगी जब इतिहास लिखा जाएगा। हमारा भगवान पशुपतिनाथ का श्रमशील भक्त करने वालों के नाम से जाना जाएगी। तमन्ना है 19 वें दिन के इस शिवना शुद्धिकरण अभियान में निजी स्कूल प्रबंधक एवं अपने स्टाफ के साथ श्रमदान में भागीदारी करी। संत कबीर स्कूल के संचालक शेर मोहम्मद खान ने कहा जिस नदी का हम जल ग्रहण कर पोषित है उस जल के लिए यदि श्रम करते हुए उसे साफ स्वच्छ रखने के लिए 1 घंटे का श्रमदान करना पड़े अवश्य अपनी इच्छा से करना चाहिए यह नदी एक पवित्र नदी है हर वर्ग को इस में अपनी भागीदारी करना चाहिए। सुभाष इंग्लिश स्कूल के संचालक विक्रम भटनागर ने भी 1 घंटे तक सतत तगारी उठाकर श्रमदान करते हुए यही संदेश दिया कि प्रत्येक स्कूल के बच्चों को 5 दिन गांव में जाकर उन्हें खेती नदियां एवं कृषि के बारे में प्रैक्टिकल कराते हुए निवास कराकर ऐसी श्रमदान करने वाली योजना से जोड़ा जाना चाहिए यह बच्चों के लिए एक स्वस्थ प्राकृतिक घूमने के साथ भारतीय संस्कृति से परिचय होगा। जिला शिक्षा अधिकारी आर एल कारपेंटर जिले के प्रत्येक स्कूल के स्टाफ को शिवना मां के तट पर आकर बच्चों को विश्व विख्यात प्रतिमा के साथ नदी के दर्शन कराना अवश्य चाहिए। आने वाला भविष्य भावी पीढ़ी बच्चों के दम पर मेरा प्रयास यही रहेगा। मैं सतत शिवना के इस अभियान में अपनी भागीदारी करता एनसीसी ऑफिसर डॉ विजय सिंह पूरावत लगातार 1 घंटे नगरपालिका के साथ अपने हाथों मिट्टी को खोदकर तगारी में भरते हुए यही कहा हमें भगवान पशुपतिनाथ मां शिवना का आशीर्वाद एक स्वस्थ शरीर देकर मिला है इसलिए हम यह मेहनत कर पा रहे हैं नहीं तो वर्तमान समय में समाज के अंदर काफी व्यक्ति बीमारी से परेशान है। एनसीसी का पूरा पूरा सहयोग इस महाअभियान में रहेगा। संतोष परसाई एडवोकेट एवं टीवी कलाकार ने लगातार सात दिवस इस शिवना शुद्धिकरण अभियान में यही संदेश दिया है मौका है भगवान पशुपतिनाथ के उत्पत्ति स्थल के लिए काम करने का हम भाग्यशाली है हमें साक्षात पशुपतिनाथ के गर्भ स्थल पर सेवा करने का मौका मिल रहा है । रुपेश सोलंकी सीरियल कलाकार लगातार शिवना तट पर आकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं उनमें जो उत्साह और उमंग है वह देखते ही बनता है उनका एक ही मकसद है जब सीखना का इतिहास लिखा जाए हमारा भगवान राम की गिलहरी जैसा नाम हुआ।  ऐसे हमारी भावना रहेगी। यह जानकारी सत्येंद्र सिंह सोम ने दी।