भरपूर वर्षा से लबरेज हुए जलाशयों के बाद भूमिगत जल की चिंता जनक स्थिति से जिले को मुक्ति मिली या नही समीक्षा कर बताए प्रशासन

     (   महावीर अग्रवाल )
 मन्दसौर  ६ दिसंबर ;अभी तक;  पर्याप्त वर्षा के बावजूद मंदसौर जिले के भूमिगत जल का स्तर उच्च स्तर तक क्यों नहीं आया। जब जिले में नलकूप खनन का कार्य बिना रुकावट के शुरू हो सके। वर्षा ने धरती को तृप्त कर दिया है लेकिन फिर भी भूमिगत जल की उपलब्धता पर अभी तक न तो सरकारी तौर पर कोई बैठक हुई और नहीं यह बताया गया कि क्या स्थिति है ।भूमिगत जल के उपलब्धता को एक अरसा बीत गया जब जिले में भूमिगत जल के तेजी से नीचे चले जाने के बाद नलकूप खनन पर रोक लगा दी गई थी और कहा गया था कि भूमिगत जल का दोहन बहुत तेजी से हो रहा है ।नलकूप खनन पर रोक लगाई गई, लेकिन यह रोक कब तक और भूमिगत जल की उपलब्धता की कहां तक कि स्थिति के लिए लगाई गई है  यह नहीं बताया गया। दो वर्षों की भरपूर वर्षा से न केवल भूमि तृप्त हुई बल्कि जिले के जितने भी कुएं ,तालाब, बांध है वह सब भी लबालब हो गए ।भूमिगत जल की स्थिति भी बेहद सुकून भरी बताई गई है। जिले में जलाशय पूरे लबरेज है। पूरे वर्ष वर्षा ऋतु में बारिश ने कमाल किया है तो अब भूमिगत जल के दोहन की स्थिति कैसी है। जिले में कोई सवा लाख से अधिक हुए भी है जो जल संचय की महती भूमिका निभा रहे हैं ।खेत तालाब और नए जलाशयों के लिए योजनाएं चल रही है फिर समीक्षा कर स्थिति को सामने नहीं रखी जा सकती है क्या।अब क्या 100-  200 इंच बारिश होगी तभी हम कुछ बता पाएंगे।
                     वर्ष 2019 में करीब 80 इंच से अधिक वर्षा हुई और वर्ष 2021 में करीब 38 इंच से अधिक वर्षा हुई ।वर्ष 2019 की वर्षा का वर्णन तो सिर्फ मंदसौर शहर से ही जिले भर का कर दिया जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।इस वर्ष हुई बारिश से नगर की हर गली मोहल्ले में वर्षा के पानी का उफान था ।कई जगह से रास्ते बंद पड़े थे ।भूजल विभाग की जानकारी के अनुसार जिले में वर्ष 2019 में भूमिगत जल का स्तर जो 2018 में करीब औसत 6 मीटर था वह इस वक्त कोई ढाई मीटर तक रह गया। अक्टूबर 2021 में भी औसत करीब ढाई मीटर रहा है। जबकि कुओं का जलस्तर भी करीब 2 मीटर से ऊपर रहा है । ट्यूबवेल का जलस्तर भी इस माह में बढ़कर करीब ढाई मीटर से अधिक रहा है 2019 और 2021 की वर्षा ने धरती को ही तृप्त नहीं किया बल्कि चारों ओर पानी ही पानी की उपलब्धता को बढ़ा दिया।अब प्रश्न यह उठता है कि नलकूप खनन पर रोक किस परिस्थिति में लगाई गई थी और आज क्या परिस्थिति है। नलकूप खनन का काम अनुमति और बिना अनुमति के खूब होने के समाचार आए दिन चर्चा में रहे हैं।बिना अनुमति के महंगा तो ठीक है लेकिन भ्रष्टाचार की बू से बादल हटाने के लिए जो कोई सही तरीका होना चाहिए वह अभी तक नहीं अपनाया गया ।यह जिज्ञासा सभी की रहती है तो क्या गलत है।
                  वर्षों पूर्व के वर्षा ऋतु के मौसम का जब सुनते हैं कि पूरे वर्षा ऋतु में वर्षा होती थी ।वर्षा ऋतु का खूब आनंद रहता था तो मैं आपको बता दूं कि वर्ष 2019 की वर्षा ऋतु में भी वर्षों पूर्व की वर्षा ऋतु का आनंद आज की पीढ़ी को वर्षा ने भरपूर दिया। इस वर्ष पूरे वर्षा ऋतु में 75 दिन वर्षा हुई थी। आगे जब वर्ष 2021 की वर्षा ऋतु का हाल देखें तो अभी इस दिसंबर 2021 में भी बारिश का क्रम जारी है जबकि इस मौसम में रबी के फसलो के खेतों में छोटे-छोटे पौधे अंकुरित होकर बाहर निकल आते हैं। वर्ष 2021 में अक्टूबर माह तक 62 दिन तक वर्षा का दौर चला जबकि नवंबर व दिसंबर 2021 में भी वर्षा का क्रम बना हुआ है। वर्षा के इस क्रम में वर्ष 2019 में हुई वर्षा के क्रम को छू लिया है तो यह भी एक बड़ी खुशी की बात है।
                     इन दो वर्षों की वर्षा ने जहां अनाज उत्पादन में रिकॉर्ड बनाया वही उपलब्ध जल स्रोतों को लबालब भरने में भी रिकॉर्ड बना दिया है ।सिंचाई विभाग ने जल उपयोगिता समिति की बैठक में जो जानकारी दी उसको देखा जाए तो जिले में स्थित 112 योजनाओं में से 77 योजनाओं में पूरा जल भरा है ,8 योजनाओं में 76 से 99, 7 योजनाओं में 51 से 75 ,5 योजनाओं में 26 से 50 व 3 योजनाओं में 25% जल भरा है। 12 योजनाएं निम्नतम जल स्तर से नीचे हैं इन 112 जल योजनाओं में 6617मि. घन मीटर से अधिक पानी  संग्रहित है। जिसके आधार पर 74770 हेक्टर में रबी की फसलों में सिंचाई प्रस्तावित है। इधर देखे तो जिले में स्थित गांधी सागर जलाशय अपनी पूर्ण क्षमता से भरा है। इससे कोई 3000 हेक्टर में सिंचाई का अनुमान है।
                      जिले में एक लाख 29हजार 857 कुए है जिनसे 2 लाख 63 हजार 722 हेक्टर में, 12 नहरों से 11233हेक्टर,30 तालाबो से 3628 हेक्टर ,नलकूपों से 25751 हेक्टर व अन्य साधनों से कोई 20 हजार हेक्टर में सिंचाई इस वर्ष होगी। जिले में मनरेगा योजना अंतर्गत वर्ष 2019- 20 में खेत तालाब की योजना पर गौर किया जाए तो पता चलता कि गरोठ जनपद क्षेत्र में 488,मल्हारगढ़ क्षेत्र में 609,मन्दसौर क्षेत्र में 655 व सीतामऊ जनपद पंचायत क्षेत्र में 1085 खेत तालाब बने है। ये खेत तालाब एक हजार घन मीटर से लेकर 3600 घनमीटर आकर के बने है जल संचय के हिसाब से। इन पर सरकार किसानों को 80 हजार रु से लेकर एक लाख रु तक का अनुदान देती है। ये तालाब जहां किसानों के खेती व कुओं के जलस्तर के लिए बहुत ही उपयोगी हैं और यह अपनी उपयोगिता साबित भी कर रहे हैं वही यह खेत तालाब मत्स्य पालन के लिए भी काम आते हैं जिले में 2006 से 2019 तक 627 बलराम तालाबों का निर्माण किसानों ने अपने खेतों पर किया है जिससे 950 हेक्टर में सिंचाई सुविधा मिली है ।इन तालाबों के निर्माण पर 452 लाख रु का अनुदान शासन ने किसानों के बैंक खाते में जमा किया गया है।
                    यह आंकड़े बता रहे हैं की जिले में भूमिगत जल के स्तर में जब से पानी का स्तर नीचे जाने लगा तब से इन जलाशयों में जल का स्तर ऊपर लाने के जो प्रयास हुए हैं उसका परिणाम है कि भूमिगत जल का स्तर तेजी से ऊपर आया है ।हालांकि इसकी समीक्षा होकर परिणाम अपेक्षित है। अब जिले में वर्षा जल के संचय की ओर थोड़ा ध्यान गया है तो थोड़ा ध्यान और दे दिया जाए तो गर्मी में भी पड़वा फूटने जैसी स्थिति आ जाएगी तो वह दिन दूर नहीं होगा जब कृषि प्रधान इस जिले में चारों ओर हरियाली ही हरियाली का दृश्य हो सकेगा। पानी उपलब्धता से कुछ किसान यदि 3 -3 फसलों का उत्पादन ले रहे होंगे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। नलकूप खनन का प्रतिबंध एक पुरातत्वीय होकर रह जाएगा तो वह दिन इस जिले के लिए सुनहरे अक्षरों में लिखा जा सकेगा।