भव्यतम, अप्रतिम भवन श्री झूलेलाल सिन्धु महल व श्री झूलेलाल धाम का लोकार्पण

4:35 pm or October 19, 2021
भव्यतम, अप्रतिम भवन श्री झूलेलाल सिन्धु महल व श्री झूलेलाल धाम का लोकार्पण
महावीर अग्रवाल 
मन्दसौर १९ अक्टूबर ;अभी तक;  सिन्धी समाज एवं नगरवासियों के लिये बड़े ही हर्ष व उल्लास व उमंग व गर्व का प्रसंग है कि पशुपतिनाथ की धार्मिक नगरी में सिन्धी समाज ने एक दानदाता श्री नरेश कुमार सुपुत्र स्व. श्री खूबचन्द भावनानी वेस्ट झोन सुपर मार्केटिंग मुम्बई (यू.ए.ई.) के व्यक्तिगत योगदान व समाज की संस्था पूज्य सिन्धी भाई बंध (पंचायत)  समाज कल्याण एवं शैक्षणिक समिति के सेवाभावी सेवादारों ने अपनी कर्मठता को मूर्तरूप देकर भव्यतम अप्रतिम विशाल श्री झूलेलाल              सिन्धु महल व परिसर में ही भव्य मंदिर श्री झूलेलाल धाम में भगवान श्री झूलेलाल की मूर्ति की स्थापना करवाई है।
                 इस आशय की जानकारी देते हुए समिति के सचिव पुरूषोत्तम शिवानी ने बताया कि इस सुन्दर व विशाल कार्यक्रम का शुभ मोहरत कि त्रिदिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ मिती आश्विन सुदी बारस सवत् 2078 रविवार 17 अक्टूबर को प्रातः अमृत वेला में जब प्रारंभ हुई तो श्रीजी भगवान ने भी वातावरण को और खुशनुमा करने के लिये जल की रिमझिम वर्षा करके जल अवतार श्री झूलेलाल भगवान को अतिप्रसन्न कर दिया।
                   इस खुशनुमा माहौल में धार्मिकता प्रदान करते हुए पूजा का शुभारंभ प्रदेश व देश के सुप्रसिद्ध आचार्य डॉ. देवेन्द्र शास्त्री मंदसौर, शास्त्री अनिल त्रिवेदी देवास, शास्त्री आदित्य शर्मा उज्जैन, शास्त्री रविन्द्र भट्ट मनासा, शास्त्री अरूण व्यास झालावाड़, शास्त्री दीपक जोशी मंदसौर, शास्त्री शुभम ज्ञानी गरोठ, शास्त्री अमित शर्मा उज्जैन ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ वृहद (बड़ी) पूजा विधि प्रारंभ की जो देखते ही बन रही थी। विधि को पूर्ण करने हेतु जजमानों के रूप में निर्मला-पुरूषोत्तम शिवानी, भगवन्ती रमेश लवाणी, ज्योति-नन्दू आडवानी, रेश्मा-मनोहर नैनवानी, पद्मा-वासुदेव सेवानी, कोमल-गिरीश भगतानी, लता-ब्रजलाल नैनवानी सहित सात जोड़ों ने सपत्नीक सम्पूर्ण श्रद्धा भावना से पूजा अर्चना कर आनन्द प्राप्त किया। त्रिदिवसीय प्राण प्रतिष्ठा के महात्म को विस्तार से समझाते हुए आचार्य डॉ. देवेन्द्र शास्त्री ने अपने मुखारविन्द से कहा कि इस पूजा विधि को सम्पूर्ण करने में बैठने वाले जजमानों के जीवन में भावपूर्ण, आध्यात्मिक एवं समृद्धि का अमूलचूल परिवर्तन लायेगा व अश्विन मास शुक्ल पक्ष की तेरस के दिवस को भगवान श्री झूलेलालजी का देव स्नपन संस्कार सम्पन्न होगा जो समस्त सिन्धी समाज के जीवन में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन को लेकर आवेगा।
                 शिवानी ने बताया कि आचार्य श्री देवेन्द्र शास्त्री ने कहा कि दानदाता श्री नरेश कुमार भावनानी ने समाज व नगरवासियों के उत्थान एवं विकास की परोपकारी भावनाओं को लेकर जो यह दिव्य संकल्प लेकर श्री झूलेलाल सिन्धु महल एवं श्री झूलेलाल धाम के नवनिर्माण की              आधारशीला रखकर जो यह भव्य व सुन्दर निर्माण करवाया है। धर्मशास्त्रों में इसकी अत्यन्त प्रशंसा की गई है जो पुत्र अपने दिवंगत पूर्वजनों की स्मृति में समाज के हितार्थ धर्मशाला, कुआं, मंदिर, भोजनशाला का निर्माण करता है वह सूर्य चन्द्रमा की भांति सुख भोगते हुए अपने आने वाली पीढ़ियों को लाभ प्राप्त करवाता है। ऐसे परोपकारी महामानव के जीवन में धन, ऐश्वर्य, मान, सम्मान, प्रतिष्ठा एवं अतुलित धन लक्ष्मी के साथ उनके जीवन में क्षमा व संतोष तथा दया की भावना प्राप्त होती है।
दुर्गा सप्तशती में देवी कवच के संदर्भ में कहा गया कि ऐसे विशाल निर्माणकर्ता को दिव्य फल प्राप्त होते है।
श्लोक-
यावद् भूमण्डलं धत्ते सशैल वनकाननम्।
तावन्तिष्ठति मेदिन्यां सन्ततिः पुत्र पौत्रिकी।।
अर्थात् जब तक यह पृथ्वी व यह धरा, पर्वत, नदिया, वन, बाग-बगीचे रहेंगे तब तक यह परिवार इनके पुत्र-पुत्रियां, पोते, भानजे-भानजी के परिवार फलना-फूलता रहेगा।
आचार्य श्री डॉ. देवेन्द्र शास्त्री ने बहुत ही सारगर्भित अमृतयी वाणी में अपने मुखारविंद से सेवादारों व कार्यकर्ताओं के संबंध में महात्म्य को समझाते हुए कहा कि इस श्री झूलेलाल सिन्धु महल के निर्माण कार्य में जिन सेवादार महानुभावों ने दिन रात अथक परिश्रम करते हुए दानदाता की दान की राशि का सम्पूर्ण सदुपयोग करते हुए इस सुन्दर निर्माण करवाने में समय का जो दान दिया है वे सभी भूरी-भूरी प्रशंसा के पात्र है। आप श्री ने कहा कि धन देने वाले ने अपना समर्पण के रूप में धन दिया लेकिन वह धन समाज के हित में रूपये का सवा रुपये के रूप में  उपयोग हो ऐसा चिन्तन करते हुए उन्होंने अपना सम्पूर्ण भाव सहयोग के रूप में दिया है। शास्त्रों में ऐसे अकाल्पनिक कार्य करने वाले सेवादारों (कार्यकर्ताओं) के लिये यह दिव्य वचन कहे गये है:-
‘‘उध्यमेन हि सिध्यन्ति कर्याणि न मनोरथै।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः।।
अर्थात उधमी व्यक्ति को ही सदैव सफलता प्राप्त होती है। जो व्यक्ति निरंतर उद्योग करता है, प्रयास करता है, उसके लक्ष्य सदैव पूर्ण होते है। सोये हुए सिंह के मुख में कभी भी हिरण शिकार नहीं होता अर्थात सिंह को भी परिश्रम करना पड़ता है।
त्रिदिवसात्मक प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ की पूर्णाहूति मिती आश्विन सुदी 14 चौदस मंगलवार (संकट मोचन हनुमान के दिवस) 19 अक्टूबर के दिन में 12.05 बजे जय झूलेलाल, पशुपतिनाथ, गिरिराज धरण के जयकारों के उद्घोष के साथ ममतामयी मॉं श्रीमती राधादेवी धर्मपत्नी स्व. सेठ खूबचन्द भावनानी, श्रीमती सुनिता-राजू भावनानी, दीपा नरेश भावनानी, हर्षा-दिलीप भावनानी, राजकुमार गिडवानी, श्री नरेश भावनानी की पांचों बहने व बहनोई व पूजा विधि में बैठे सपत्निक जजमानों ने पूर्ण की।
पूजा विधि पूर्ण करने के उपरांत ‘‘श्री झूलेलाल सिन्धु महल’’ स्व. सेठ खूबचन्द भावनानी हॉल का लोकार्पण उद्घाटन ममतामयी मॉ श्रीमती राधादेवी धर्मपत्नी स्व. सेठ खूबचन्द भावनानी ने अपने करकमलों से जयकारों व तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सम्पन्न किया।
इस पुनित अवसर पर नम्र व्यक्तित्व के धनी भाई श्री नरेश भावनानी ने कहा कि मेरी फर्श से अर्श की शख्सियत का सम्पूर्ण श्रेय व आशीर्वाद मेरे माता-पिता का है, मेरी हर संस्था का उद्घाटन मेरी ममतामयी मॉ से ही करवाता हूॅ। उसी कड़ी में आज इस विशाल सिन्धु महल व झूलेलाल धाम में हमारे आराध्य देव भगवान श्री झूलेलाल की मूर्ति की पूर्णाहूति मेरी मॉ के कर कमलों से सम्पन्न हुई है। मुझे जरूरतमंद और गरीबी का अच्छी तरह अनुभव है, मैं धन्य हूॅ जो परमात्मा ने मुझे मदद करने के काबिल बना दिया है। मेरा परिवार बचपन में भले ही मुफलीसी में रहा किन्तु साधु संतों व महात्माओं के उपदेशों का हमारे जीवन पर असर है कि हमारे भावनानी परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। आपश्री ने सेवादारों (कार्यकर्ता) की सेवा व समाजजनों की मेहनत को सर आंखों पर लेते हुए कहा कि पैसों का दान तो हर दानवीर कर सकता है, किन्तु समय व तन-मन का दान निःसंदेह सलाम योग्य है। मैं तहे दिल से शुक्रया अदा करता हूॅ।
श्री झूलेलाल सिन्धु महल एवं श्री झूलेलाल धाम के प्रोजेक्ट आर्किटेक्ट श्री रोहित दिनकर आर्किटेक्ट व प्रोजेक्ट कांट्रेक्टर इंदौर, श्री संजय जैन इंजीनियर एण्ड कांट्रेक्टर इंदौर एवं भगवान श्री झूलेलाल की भव्य व विशाल मूर्ति को तरासने वाले कारीगर चांद किरण मूर्ति भण्डार जयपुर के श्री अर्जुन बाबू शर्मा, किशन बाबू शर्मा व महेश बाबू शर्मा को प्रशस्ती पत्र व भगवान श्री झूलेलाल की सुन्दर प्रतीमा देकर सम्मानित किया गया। श्रेष्ठ पूजा विधि सम्मत करने वाले आचार्य श्री देवेन्द्र शास्त्री व उनके सहयोग ब्राह्मण मण्डली को साधुवाद के साथ चरण वंदना कर आशीर्वाद प्राप्त भगवान श्री झूलेलाल की प्रतिमा देकर सम्मानित किया।
आचार्य श्री व संत मण्डल एवं आगन्तुक सम्माननीय महामन का आभार प्रदर्शन संयोजक दृष्टानन्द नैनवानी व संरक्षक भगवानदास (राजूभाई) ने प्रकट किया।
इस पावन अवसर पर समिति के उपाध्यक्ष वासुदेव खैमानी, दिलीप भावनानी, संयुक्त सचिव गिरधारीलाल जजवानी (काउ सेठ), दयाराम जैसवानी, अजयकुमार शिवानी, ताराचन्द जैसवानी, डॉ. सुरेश पमनानी, पं. विनोद शर्मा, करण जैसवानी, महंत श्यामदास उदासी, महंत गणेशदास उदासी, महंत आसनदास उदासी, स्वामी ईश्वरदास उदासी, स्वामी अमरलाल, ठकुर सांई मनीषलालजी आदि ने पूर्णाहुति कर महाआरती में भाग लिया। तत्पश्चात् संत महात्माओं के अमृतमयी सत्संग की बरखा हुई व भगवान श्री झूलेलाल के वंशज 26वें गादिपति ठकुर साई मनीषलाल के सानिध्य में बहराणा साहेब की ज्योत प्रज्वलित कर बहराणा साहेब का दरबार सजाया गया। त्रिदिवसीय अनुष्ठान का सफल संचालन डॉ. देवेन्द्र जोशी शास्त्री ने किया