भाजपा प्रदेष अध्यक्ष की छबि खराब करने ससुर को बनाया कुलपति,  चयन प्रकिया व योग्यता पर नहीं उठाये जा रहें सवाल

7:26 pm or November 21, 2022

सिद्धार्थ पांडेय

 जबलपुर २१ नवंबर ;अभी तक;  ससुर के जबलपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्त होने के बाद प्रदेष भाजपा के अध्यक्ष वी डी शर्मा राजनैतिक विवादों आ गये है। प्रदेष के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने विगत गुरुवार को सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रमोद कुमार मिश्रा को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जेएनकेवीवी) का कुलपति नियुक्त किया। श्री मिश्रा की नियुक्ति को पार्टी में चल रही राजनैतिक प्रतिदंद्विता हिस्सा माना जा रहा है।

   कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख  उनकी नियुक्ति पर कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने एक ट्वीट में सवाल किया कि क्या उन्हें इसलिए नियुक्त किया गया क्योंकि वे संघी (संघ परिवार के अनुयायी) हैं या बेहद योग्य हैं या वीडी शर्मा के ससुर हैं?

 भाजपा प्रदेष अध्यक्ष शर्मा ने ससुर की नियुक्ति पर कोई भी सार्वजनिक बयान देने से परहेज कर रहे है लेकिन उनके करीबी सूत्रों ने बताया कि प्रो मिश्रा की नियुक्ति भाजपा प्रदेष अध्यक्ष को बदनाम करने के लिए भाजपा की आंतरिक प्रतिद्वंद्विता का हिस्सा है। ससुर की नियुक्ति उस समय की गई जब उन्हें पुनः प्रदेष अध्यक्ष नियुक्त किया जाना लगभग तय माना जा रहा है। उनकी छबि एक मेहनती व ईनामदान नेता की है। उन्होने कभी भी सरकारी सेवा में ऐसी किसी नियुक्ति का समर्थन नहीं किया। साजिष के तहत उनकी छबि खराब करने के लिए नियुक्ति करवाई गयी है।

सूत्र का कहना है कि इससे पहले राज्य सरकार ने जबलपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्र नेता के रूप में उनके कार्यकाल और अन्य गतिविधियों की गोपनीय तौर पर जांच करवाई थी। गोपनीय जांच में सरकार के हाथ नहीं लगा था। ससुर की नियुक्ति के माध्यम से पार्टी में उनकी छबि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेष अध्यक्ष के रूप में उन्होने पार्टी संगठन को मजबूती प्रदान की है। जिसके कारण वह सदैव कांग्रेस के निषाने पर बने रहते है। कांग्रेस पार्टी ने कुलपति की नियुक्ति प्रकिया या प्रो मिश्रा की योग्यता व अनुभव पर सवाल नहीं उठाये है।

सेवानिवृत्त प्रो प्रमोद कुमार मिश्रा के अनुभव और योग्यता कि बात की जाये तो वह लगभग चार दशक तक कृषि शिक्षा और शोध कार्य में सक्रिय रहे हैं। जबलपुर के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के बाद प्राध्यापककृषि विभाग के अध्यक्षकृषि शास्त्र और कृषि प्रबंधन के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा कुलसचिव की जिम्मेदारी भी सम्हाली है। टीकमगढ़ के कृषि महाविद्यालय के डीन भी रहे और निदेशक पद की जिम्मेदारी  सम्हाली है।

 उन्होंने अपने जीवन काल में 15 अनुसंधान परियोजनाओं की शुरूआत की और उनके कई आलेख प्रकाशित हुए है।  दर्जनों सम्मेलनों में भाग लेने का अनुभव उनके पास है। उनके एग्रो इकोनॉमिक्स रिसर्च सेंटर के तहत 93 शोध पत्र भी प्रकाशित हुए हैं।

 ष्षासकीय अधिवक्ता राजेष चंद्र का कहना है कि कुलपति के रूप में प्रो मिश्रा नियुक्ति विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए की गयी है। कोई उनकी नियुक्ति को न्यायालय में चुनौती देता है तो भी मामला टिकेगा नहीं।

भाजपा के प्रदेष प्रवक्ता डॉ हितेष वाजपेई ने बताया कि प्रकिया के तहत डॉ मिश्रा को कुलपति नियुक्त किया गया है। इस मामले में कांग्रेस गंदी राजनीति कर रही है।