भारतीय संस्कृति में भगवान शिव एवं पार्वती बराबर के संचालनकर्ता है, नारी शक्ति बिना संपूर्ण सृष्टि अधूरी है- विदुषी लीला मंडोवरा 

6:07 pm or July 21, 2022
महावीर अग्रवाल 
मन्दसौर २१ जुलाई ;अभी तक;  अखिल विश्व गायत्री परिवार धर्म का सही स्वरूप देने के लिए गांव-गांव अभिषेक के माध्यम से इस सृष्टि के संचालनकर्ता भगवान शिव एवं पार्वती का विधि विधान के साथ पूजन करते हुए भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने के लिए कृत संकल्पित है । गायत्री परिवार ने निःशुल्क अभियान में लगातार आठवें दिन ग्राम जग्गाखेड़ी संजीत रोड़ पहुंचकर अभिषेक मंदिर-मंदिर जाकर पूर्ण किया जा रहा है। इस अद्भुत प्रयोग में गांव की जनता के अंदर भगवान के प्रति आस्था बढ़ती जा रही है । भारतीय संस्कृति को समझने का पूरा अवसर मिल रहा है।
                आज अभिषेक में गायत्री परिवार की विदुषी लीला मंडोवरा ने अभिषेक कराते हुए कहा हमारी संस्कृति अनादिकाल से लाखो वर्ष से पुरुष और नारी दोनों ही हमारे यहां भगवान का दर्जा रखते हैं। जिस प्रकार से सीता-राम, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती सभी भगवान जिन्हें हम पूजन करते हैं वह नारी के बिना संभव नहीं है। गायत्री परिवार ने नारी शक्ति को महत्व देकर 21वीं सदी नारी सदी का जो उद्घोष किया है जो कि सृष्टि के निर्माण में प्रथम स्थान रखती है। पूरी दुनिया के अंदर भारत एक ऐसा स्थान है जहां पर नारी को देवी एवं संपूर्ण संचालन का मुख्य केंद्र माना है।
                 गायत्री परिवार के संस्थापक वेद मूर्ति पंडित श्री राम शर्मा आचार्य जी ने गायत्री मंत्र जपने का सभी को बराबर अधिकार दिया है और धर्म को बराबर का सभी व्यक्ति को अधिकार देकर हर व्यक्ति को जीवन में परिवर्तन लाने का अधिकार गायत्री मंत्र में बताकर करोड़ों को इस मार्ग पर चलाकर भगवान शिव का कार्य अपने द्वारा करते हुए गायत्री परिवार ने लगातार गांव-गांव अभिषेक करके प्रत्येक घर में भगवान शिव के बारे में जो सही व्याख्या की है उसके दर्शन कराए गए हैं, भगवान भोलेनाथ इस सृष्टि के पालनकर्ता है उनके अभिषेक एवं साधना से पूरी दुनिया पर भारत राज् करने जा रहा है। गायत्री परिवार पहली संस्था है जो अपनी निजी कमाई लगाकर समय देकर दुनिया को नए मार्ग की ओर ले जा रही है । प्रत्येक धर्म अनुष्ठान बहुत सरल गायत्री परिवार के द्वारा संभव है जहां नारी शक्ति प्रत्येक कर्मकांड को कराते हुए गांव-गांव नई जागृति फैलाते हुए नारी शक्ति को शिव पार्वती के बराबर दर्जा रखते हुए एक नई क्रांति का उद्घोष हुआ है। जितेंद्र सिंह प्रज्ञा, भंवरसिंह चंद्रावत, मधु चंद्रावत, लीला मंडोवरा इस अभियान को सतत चला रहे है। इस अभियान में धर्म के सही स्वरूप के दर्शन होने लगे हैं। यह जानकारी पवन गुप्ता ने दी।