भारतीय संस्कृति में वृद्धाश्रम की परिकल्पना नहीं… वृद्धाश्रम की बदले “परित्यक्त आश्रम” नाम रखा जाये

7:36 pm or September 20, 2022
महावीर अग्रवाल
खण्डवा २० सितम्बर ;अभीतक; श्री गणेश गौशाला में पितृ पक्ष के दौरान पुज्य संत वेदांताचार्य श्री गिरिराज शास्त्री जी ने गौ माता का पूजन, आरती कर गौग्रास कराया। उन्होंने कहा की गौमाता में तैतीस कोटि देवी-देवता विध्यमान होते हैं इस कारण से गौमाता पूज्यनीय, वंदनीय है। आगामी निर्मित होने वाली नवीन गौशाला  एवं प्रस्तावित वृद्धाश्रम  के संबंध में जानकारी समिति सचिव रामचंद्र मोर्य के द्वारा दी गई जिस पर वेदांताचार्य जी द्वारा बताया गया कि  भारतीय परंपरा व संस्कृति में वृद्धाश्रम का समाज मे कही भी  कभी भी कोई स्थान नहीं रह है यह पश्चिम की देन रही हैA
, भारतीय समाज मे वानप्रस्थ आश्रम या सन्यास की व्यवस्था रही है। वृद्धाश्रम की बदले “परित्यक्त आश्रम” नाम रखे जाये  जिससे समाज मे अच्छा संदेश जाए व व्यक्ति अपने कर्तव्यों का उचित तरीकों से पालन कर सके। नवीन गौशाला बनने पर हर्ष व्यक्त करते हुए हर संभव सहयोग करने के लिए निःशुल्क श्रीमद्भागवत कथा करने की घोषणा भी वेदांताचार्य जी द्वारा की गई।