भूख और गर्मी से हुई शावक की मौत

5:20 pm or May 3, 2022

मयंक भार्गव

बैतूल ३ मई ;अभी तक;  लापता बाघिन के शावक की मौत होना कहीं ना कहीं वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही को उजागर कर रहा है। जैसे ही बाघिन की कालर आईडी गिरने से उसकी लोकेशन नहीं मिल रही थी उसी दौरान यदि बाघिन की तलाश सरगर्मी से प्रारंभ कर दी जाती तो शायद आज शावक की मौत की खबर नहीं बनती। लेकिन वन विभाग के अफसरों ने इसे बेहद हल्के में लेते हुए बाघिन के शिकार करने का रास्ता देखा ताकि उसकी मौजूदगी का पता चल सके। इसके साथ ही वन विभाग के अफसर इस बात को लेकर भी तसल्ली कर रहे थे कि बाघिन मेल घाट या फिर सतपुड़ा टाईगर रिजर्व के जंगल में चली गई होगी। महकमे की इसी लापरवाही की वजह से भूख और भीषण गर्मी से शावक ने दम तोड़ दिया। अब वन विभाग बाघिन की तलाश में सरगर्मी से जुट गया है और 50 ट्रेप कैमरों के साथ चार रेंजों के अमले को बाघिन की खोज में लगा दिया है।

शनिवार को मिला था शावक का शव

शावक का शव शनिवार को मिलने के बाद वन महकमे में खलबली मच गई थी। रविवार देर शाम सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वाइल्ड लाइफ के डाक्टर और अधिकारियों की मौजूदगी में शावक का पोस्टमार्टम कर अग्नि दी गई। उत्तर वन मण्डल के डीएफओ राकेश डामोर ने बताया कि शार्ट पीएम रिपोर्ट में शावक की मौत की वजह भूख और गर्मी सामने आई है। श्री डामोर के मुताबिक बाघिन ने पहली बार शावक को जन्म दिया है इसलिए इसके व्यवहार में बदलाव भी एक वजह हो सकती है ।

तलाश में 4 रेंज का जुटा अमला

डीएफओ राकेश डामोर ने बताया की उत्तर वन मण्डल की शाहपुर, रानीपुर, बैतूल और दक्षिण वन मण्डल की आमला रेंज के वन अमले को बाघिन की तलाश में लगा दिया है। फिलहाल बाघिन के फुट प्रिंट ही मिले है। सुरक्षा के लिहाज से गोपनीयता बरती जा रही है। बाघिन की तलाश में 4 रेंज का अमला जुट गया है लेकिन अमले को सफलता नहीं मिल पाई है।

जंगल में लगाए 50 ट्रैप कैमरे

कॉलर आईडी गिरने के बाद से लापता हुई बाघिन को तलाशने वन मण्डल स्तर पर लगभग 25 कैमरे लगाए थे लेकिन शावक का शव मिलने के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से भी 25 कैमरे बुलाये गए है जिन्हें संभावित क्षेत्रों में लगा रखा है और प्रतिदिन मॉनीटिरिंग की जारही है। वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरे में तेंदुआ, भालू और अन्य वन्यजीव कैद हुए हैं। लेकिन बाघिन अभी भी लापता है।

टीम को मिले फुट प्रिंट

जंगल में लगातार गश्त कर रहे गश्ती दल को बाघिन के फुट प्रिंट कुछ नमी वाले क्षेत्रों में मिले है। जिस के बाद महकमे के आला अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि जो फुटप्रिंट मिले हैं वह मृत शावक की माँ के ही है। बहरहाल वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की नींद हराम हो गई है।

यह भी हो सकती है संभावना

जिले के जंगलों में शेर का शिकार होना कोई नहीं बात नहीं है। शिकारियों की पैनी नजर जंगल के वन्य प्राणियों पर बनी रहती है। यह संभावना जताई जा रही है कि कहीं शिकारियों ने बाघिन का शिकार कर कालर आईडी तो नहीं फें क दी थी जो कि टूटी हुई हालत में महकमे को मिली है। इसके साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि बाघिन का शिकार होने के बावजूद भूख और गर्मी की वजह से शावक ने दम तोड़ दिया हो। पूरे मामले का खुलासा बाघिन के जिंदा मिलने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

इनका कहना…
शावक का शव मिलने के बाद विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में अन्तयेष्टि की गई है प्रथम दृष्टया शावक की मौत भूख से हुई है गश्ती दल बढा दिए है बाघिन सुरक्षित है।
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