मंत्री श्री कावरे ने की कोरोना से निपटने की तैयारियों की समीक्षा

आनंद ताम्रकार

बालाघाट २३ सितम्बर ;अभी तक;  मध्यप्रदेश शासन के राज्य मंत्री आयुष (स्वतंत्र प्रभार) एवं जल संसाधन विभाग श्री रामकिशोर “नानो’’ कावरे, ने आज 23 सितम्बर को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की बैठक लेकर बालाघाट जिले में कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में जिला पंचायत प्रधान श्रीमती रेखा बिसेन, कलेक्टर श्री दीपक आर्य, पुलिस अधीक्षक श्री अभिषेक तिवारी, अपर कलेक्टर श्री फ्रेंक नोबल ए, सिविल सर्जन डॉ आर के मिश्रा, डॉ निलय जैन, डॉ बी एम शरणागत, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री रमेश रंगलानी एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
                मंत्री श्री कावरे ने बैठक में कहा कि बालाघाट जिले में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बेड एवं उपचार के इंतजाम होने चाहिए। कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण आम लोगों में डर की भावना हो रही है। इसे दूर करने की जरूरत है। जिले में मायल एवं एचसीएल के पास भी अस्पताल उपलब्ध हैं, उनका भी कोरोना काल में उपयोग किया जाये। कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार ठीक हो और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। कोविड अस्पताल एवं कोविड सेंटर में भर्ती मरीजों को समय पर भोजन मिलना चाहिए और भोजन अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए। कोरोना संकट के दौरान हृदय रोग एवं अन्य बीमारियों के गंभीर मरीजों का उपचार नहीं होने जैसी समस्या नहीं आना चाहिए। गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज अस्पताल में आये तो उसे कोरोना पाजेटिव मानकर पूरे सुरक्षा मानदंडों के साथ डाक्टर को उसका उपचार करना चाहिए। हमारी पहली प्राथमिकता मरीज की जान बचाने की होना चाहिए।
                 बैठक में बताया गया कि बालाघाट जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। बुढी आईटीआई के पीछे बनाये गये अस्पताल में आक्सीजन सुविधा वाले 80 बेड उपलब्ध है। गोंगलई के कोविड सेंटर में 450 बेड का इंतजाम किया गया है। जिले में 15 आईसीयू बेड है, जिनमें वेंटिलेटर की सुविधा है। लांजी में 80 बेड की व्यवस्था है और बैहर में 30 बेड की व्यवस्था है। बुढ़ी आईटीआई के पीछे बनाये गये कोविड अस्पताल में एमबीबीएस डाक्टर्स ही मरीजों के उपचार में लगाये गये है। गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज के आने पर उसे कोरोना टेस्ट होने तक उपचार से वंचित नहीं रखा जायेगा बल्कि उसे कोरोना पाजेटिव मरीज मानकर ही उपचार प्रारंभ किया जायेगा।

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