मकर संक्रांति मुरैना के बाजार गुलजार हैं, चंबल की मशहूर गजक से

7:37 pm or January 15, 2023
 देवेश शर्मा
मुरैना। 15 जनवरी ;अभी तक;  मुरैना की मशहूर गजक देश भर में अपनी प्रसिद्धि की धाक जमा चुकी है।मकर संक्राति के त्योहार पर मुरैना के बाजार गजक की सजी संवरी दुकानों से गुलजार हैं।. एमपी के मुरैना की पहचान ही गजक से है. गजक के शौकीनों के अनुसार मुरैना की गजक की बात ही कुछ और है. चम्बल का लवण युक्त पानी व यहां के कुशल कारीगरों की कुटाई ने गजक को अधिक खस्ता व स्वादिष्ट बनाया है। दरअसल गजक की उत्पत्ति एमपी के मुरैना से ही हुई है, तिल और गुड़-शक्कर से बने इस लजीज मिष्ठान्न ने मुरैना को दुनियाभर में प्रसिद्ध कर दिया है. मुरैना की गजक की ऐसी डिमांड है कि देशभर में दुकानदार मुरैना गजक के नाम से ही इसे आसानी से बेच देते हैं .
                                  जाड़े की मेवा के नाम से मशहूर गजक का निर्माण ठंड के  मौसम शुरु होते ही तैयार होना शुरू हो जाती है। नवंबर माह से गजक की शुरुआत होकर जिले से देशभर के लिए गजक की सप्लाई प्रारंभ हो जाती है. यहां के गजक विक्रेता ठंड के तीन महीनों में अपनी सालभर के जीवन यापन का खर्चा निकाल लेते हैं।साल भर में यहां
                              मुरैना का गजक से 100 साल पुराना नाता है. गजक का निर्माण सबसे पहिले यहां के शिवहरे परिवार ने तिलकुटियां बनाकर शुरू किया,फिर धीरे धीरे गजक की कई परिष्कृति रूप तैयार होने लगे।दर असल यहां की गजक को चम्बल का लवण युक्त पानी खस्ता व स्वादिष्ट बनाता है। सर्दियों की सीजन आते ही यहां के लोगों को गजक की मिठास अपनी ओर आकर्षित करने लगती है. तिल-गुड़ से बनी इस मिठाई को चाव से खाने का शौक तो कई लोग रखते हैं, लेकिन इस खस्ता गजक को कितने श्रम से तैयार किया जाता है यह कम ही लोगों को जानकारी है.
सर्दियों में फायदेमंद गजक व लड्डू
                            सर्द मौसम में चिकित्सक भी गजक व लड्डू का सेवन करने की सलाह देते हैं. चिकित्सकों की माने तो तिल और गुड की गर्म तासीर होती है. सर्दियों में विशेष रूप से इनका सेवन करना चाहिए. इससे आयरन, हीमोग्लोबिन, फाइबर मिलता है. साथ ही ये आंखों और डायजेशन के लिए भी फायदेमंद होते हैं. खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए ये विशेष फायदेमंद होते हैं, क्योंकि इनसे इम्यूनिटी बूस्ट होती है. बच्चों को खिलाने के लिए अलग-अलग फ्लेवर्स भी इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन ये कम मात्रा में ही होने चाहिए
                          मकर संक्रांति के दिन न सिर्फ तिल से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है बल्कि इसका दान भी बहुत शुभ माना जाता है. वहीं, पानी में तिल डालकर स्नान भी किया जाता है. मान्यता है इस दिन तिल स्नान करने से निरोग जीवन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. यही वजह है कि मकर संक्रांति पर तिल की खास डिमांड है.