मध्यप्रदेश सरकार आदिवासियों के साथ आंख मेंचोली का खेला खेल रही -के पी सिंह बुंदेला

3:31 pm or November 14, 2021
दीपक शर्मा
पन्ना: १४ नवंबर ;अभी तक;  आदिवासी बनवासी क्रांति सेना (बुंदेलखंड) के संयोजक के पी सिंह बुंदेला ने कहा कि 15 नवंबर को क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती है जिसको लेकर के मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया मामू माननीय शिवराज सिंह चौहान जी क्रांतिवीर बिरसा मुंडा की जयंती को लेकर के मध्य प्रदेश सरकार का भारी-भरकम बजट करोड़ों रुपया खर्च कर रहे हैं भोपाल में लाखों आदिवासियों को इकट्ठा करके सरकारी तंत्र मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है भोपाल में मनाई जा रही जयंती पर देश के प्रधानमंत्री मोदी जी भी पधार रहे हैं।
           इसी तरह 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती मनाने जबलपुर में कांग्रेस पार्टी की ओर से माननीय पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी अपने लाव लश्कर के सहित जयंती मनाने हेतु कार्यक्रम का अंतिम रूप दिया जा रहा है। आज उन गरीब दबे कुचले पीड़ित आदिवासियों प्रदेश के मुखिया माननीय शिवराज सिंह जी को जयंती मनाने की याद सताने लगी है।
               मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में आदिवासियों की क्या स्थिति है इसको जानने का अभी तक कोई भी प्रयास नहीं किए गए सिर्फ आदिवासियों का दोहन ही किया जाता रहा चाहे वह छतरपुर जिला के अंतर्गत हीरा खनन योजना हो, बना अधिकार के तहत पन्ना जिले हजारों आदिवासी वनवासीयो की भूमि का मामला हो जैसे- मुड़ियापहाड़ का मामला हो।
              श्री बुंदेला द्वारा कहा गया कि पन्ना जिले में आदिवासी बनवासी हजारों की संख्या में 6 दिसंबर 2005 की पूर्व से वन भूमि में काबिज हैं जिन्हें बना अधिकार कानून के तहत लगभग 15- 20 वर्ष से बनवासी आंदोलित है पर उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।
पन्ना जिले में आदिवासी बनवासी क्रांति सेना (बुंदेलखंड) के बैनर तले जेल भरो जैसे आंदोलन किए गए हर वर्ष अगस्त माह में सरकार एवं प्रशासन को जगाने हेतु अगस्त माह में “खूटा गाड़ो जमीन जोतो” आंदोलन किए जाते हैं शासन प्रशासन ने कोई आंदोलन पर भूख की लड़ाई पर गौर नहीं किया।
               बुंदेला द्वारा कहा गया कि अभी हाल पर पन्ना में दो बार मामू श्री शिवराज सिंह चौहान पन्ना जिले के भ्रमण में आए थे प्रथम कार्यक्रम में पन्ना जिले के हजारों जनता के बीच आदिवासी वनवासियों के बारे में एक भी शब्द का उच्चारण नहीं किया गया था।
              माननीय पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी के 15 महीने के कार्यकाल में मध्यप्रदेश में वन टीम का गठन किया गया था जिससे आदिवासी बनवासीयों को एक आशा की किरण दौड़ी थी।
                तदुउपरांत सरकार गिर गई और बनवासियों की आशाओं पर पानी फिर गया। माननीय शिवराज सिंह की सरकार बनी ब्लॉक स्तर पर कुछ पट्टे बांटकर आदिवासी बनवासीयों के बीच में फूट डालने का काम किया गया एक साथ एक समय में जहां पर 25 से 30 परिवार वन भूमि में काबिज थे उन्हें मात्र 1-2 पट्टे देकर झूठी वाहवाही लूटी।
                 बुंदेला द्वारा कहा गया कि आदिवासी वनवासियों को झूठी दिलासा देने के लिए भोपाल में यह कार्यक्रम रखा गया है 15 नवंबर को भोपाल सम्मेलन से हकीकत भी सामने आ जाएगी।
15 नवंबर गौरव दिवस के साथ-साथ पेठ की लड़ाई भूख की लड़ाई अगर सरकार ध्यान देती है तो सरकार काल वनका भोपाल सम्मेलन में हजारों करोड़ों रुपया खर्च करना न्याय हित होगा अन्यथा वोट बैंक की राजनीति बनकर रह जाएगी आदिवासी अब सीधे साधे जरूर हैं पर मूर्ख नहीं है आदिवासियों का अपना कौन सच्चाई जानते हैं।आखिर मामा और मोदी को आदिवासियों की ताकत समझ में आ ही गयी!  09 अगस्त 2021  को छुट्टी रद्द करवा दी थी शिवराज सिंह ने जबकि कमलनाथ के शासन काल में 09 अगस्त को  अवकाश घोषित किया था, और अब 15 नवम्बर को जब मोदी भोपाल आ रहा है तो आवकाश घोषित किया गया है!