मध्य प्रदेश में कोरोना के प्रकरणों में आगे भी गिरावट आएगी

मयंक शर्मा

बुरहानपुर  29 मई, ;अभी तक;  मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष मंत्रालय में कोविड-19 के संबंध में देश के प्रमुख संस्थानों का महामारी विज्ञान संबंधी तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया। अध्ययन में मुख्य रूप से यह बात सामने आई कि मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमण आगे भी निरंतर कम होगा।

जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन, सेंटर फॉर मैथमेटिकल मॉडलिंग फॉर इनफेक्शियस डिजीज, आईआईटी कानपुर, आईआईटी हैदराबाद तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरु के तुलनात्मक अध्ययन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आने वाले समय में भी संक्रमण रोकने के लिए मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग रखना तथा वैक्सीनेशन जरूरी होगा।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री प्रभुराम चौधरी, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव श्री मोहम्मद सुलेमान, स्वास्थ्य आयुक्त श्री आकाश त्रिपाठी आदि उपस्थित थे।

15 जून तक 1500 प्रकरण प्रतिदिन

आईआईटी कानपुर तथा आईआईटी हैदराबाद के अध्ययन में बताया गया कि आगामी 15 जून तक मध्य प्रदेश में कोरोना के 15 सौ प्रकरण प्रतिदिन आएंगे। वहीं सेंटर फॉर मैथमेटिकल मॉडलिंग फॉर इनफेक्शियस डिजीज ने बताया कि आगामी दिनों में नए प्रकरणों की संख्या 500 से 1400 तक रहेगी। इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के अध्ययन में बताया गया कि यदि शत-प्रतिशत व्यक्ति मास्क पहनते हैं तो आगामी एक सितंबर तक प्रकरणों की औसत संख्या 24 सौ प्रतिदिन रहेगी।

18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के सर्वाधिक प्रभावित

मध्यप्रदेश में 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों के कोरोना प्रकरणों में कमी आई है, वही सर्वाधिक प्रकरण 18 से 45 वर्ष आयु समूह के हैं। जनवरी माह से तुलना करने पर 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों के प्रकरण 20ः से घटकर 13ः हो गए हैं। 45 से 60 वर्ष तक की उम्र वाले लोगों के 25ः से घटकर 22ः रह गए हैं तथा 18 से 45 वर्ष तक उम्र वाले लोगों के प्रकरण 49ः से बढ़कर 58ः हो गए हैं।  18 से कम उम्र वालों के प्रकरण 5.8ः से बढ़कर 6.6ः हो गए हैं।

कम प्रभावित क्षेत्रों में अधिक सतर्कता आवश्यक

अध्ययन में बताया गया है कि ऐसे क्षेत्र जहाँ संक्रमण का कम असर है, वहाँ पर अधिक सतर्कता की आवश्यकता है। वहाँ सघन सर्वे किया जाना चाहिए। जहाँ संक्रमण कम है, वहाँ भविष्य में अधिक संक्रमण की आशंका है। आने वाले समय में मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक सतर्कता बरते जाने की जरूरत है।

ट्रेसिंग, क्वॉरेंटाइन और टेस्टिंग आवश्यक

अध्ययनों में बताया गया है कि आगामी समय में संक्रमण रोकने के सघन ट्रेसिंग, क्वारेंटाइन तथा टेस्टिंग की आवश्यकता होगी।
कोविड अनुरूप व्यवहार, वैक्सीनेशन तथा नए वेरिएंट को ढूंढना जरूरी
कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के लिए आगामी समय में कोविड अनुरूप व्यवहार, वैक्सीनेशन तथा कोरोना के नए वेरिएंट को ढूंढना जरूरी होगा।
अस्पतालों में 31 हजार 156 बेड्स
बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में तीसरी लहर की तैयारी के लिए ज़िलों के सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या 11 हजार 997 से बढ़ाकर एक 31 हजार 156 कर ली जाएगी। जिला अस्पतालों में बच्चों के लिए बिस्तरों की संख्या 1659 कर ली जाएगी। इसी प्रकार शासकीय मेडिकल कॉलेजों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 13 हजार 335 कर ली जाएगी।