मनोकामना अभिषेक सुखद अनुभूति देता है- विधायक श्री सिसौदिया

7:06 pm or July 25, 2022
महावीर अग्रवाल 
मन्दसौर २५ जुलाई ;अभी तक;  भगवान श्री पशुपतिनाथ के 12वें  मनोकामना अभिषेक  के 12वें दिवस द्वितीय श्रावण सोमवार और विशेष रूप से प्रदोष सोमवार को सधर्मपत्नीक विधायक यशपालसिंह सिसौदिया सहित अनेक धर्मालुओं ने मनोकामना अभिषेक में भाग लिया।
                            विधायक श्री सिसौदिया ने मनोकामना अभिषेक के बाद अपना भक्ति भाव प्रकट करते हुए कहा कि श्रावण मास के द्वितीय सोमवार और वह भी प्रदोष सोमवार होने पर अष्टमुखी भगवान श्री पशुपतिनाथ के आशीर्वाद से उनके दिव्य दर्शन और एक घण्टा मनोकामना अभिषेक विद्वमत विप्र जनबटूकों द्वारा विधी विधान और मंत्रोच्चारणों से कराया जा रहा है। आपने कहा कि भगवान के प्रति यह आस्था, विश्वास, श्रद्धा है, भावना और परम्परा है। शिवना तट पर शिव और शिवना का जो संगम है वह अद्वितीय है। मनोकामना अभिषेक की जो शुरूआत हुई थी उसे पशुपतिनाथ प्रबंध समिति ने निरन्तरता प्रदान की। कोरोना काल के 2 वर्ष छोड़कर यह 12वें अभिनव वर्ष में प्रवेश कर गया है। श्रावण मास में भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन, पूजन, अर्चन और अभिषेक में बैठना सुखद अनुभूति प्रदान करता है जो सौभाग्य से मुझे सपरिवार आज अभिषेक में बैठने से मिली है। भगवान पशुपतिनाथ के परिसर को लेकर इसके विकास में हम सब जुटे हुए है। श्रद्धालु जो चाहते है कि इसका ओर अधिक विकास हो जिसके लिये भगवान की कृपा से बहुत कुछ प्रयास किये है। भारत सरकार द्वारा प्रदत्त 30 करोड़ रू. की राशि से और राज्य सरकार के प्रयास से पर्यावरण की दृष्टि से और मॉ शिवना की शुद्धि के लिये 8 कि.मी. एरिया में जो गन्दे नाले, जलकुम्भी अवरोध बने हुए है उन्हें हटाने के लिये निर्माण एजेंसी भी तय हो गई है।
                       श्री सिसौदिया ने मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह द्वारा जनभावनाओं के अनुरूप जो 1008 सहस्त्रशिवलिंग और महाघण्टा स्थापना उद्घाटन का जो अद्वितीय कार्य हुआ उसका उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सरकार, मध्यप्रदेश सरकार के साथ ही समस्त जनता, प्रचार प्रसार में सहभागी समस्त प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया का सहभागी होने पर हृदय से सबका आभार प्रकट करते हुए कहा जैसी कि भावना है भगवान से प्रार्थना है कि श्रावण मास में माँ शिवना उफान पर आये और भगवान श्री पशुपतिनाथ की प्रतिमा जलमग्न हो जाये।
                       वेदपाठी पं विष्णुप्रसाद ज्ञानी ने कहा कि संगत और पंगत का बहुत महत्व हैं।  जिस घर की संगत व पंगत शुद्ध हैं वहाँ कलियुग प्रवेश ही नही कर सकता हैं। घर के बड़ों की जिम्मेदारी हैं की बच्चो की संगति  का ध्यान रखें। संगति से ही संस्कृति बनती है।ज्यादा से ज्यादा बच्चों को धर्म व कर्तव्य बोध कराना चाहिए। बच्चे कहाँ जा रहे हैं ?किसके साथ जा रहे हैं? इसका पूरा ध्यान रखें। पूरा प्रयास करें कि बच्चे कुसंग से बचाए। भले ही कितना ही व्यस्तता हो कम से कम आधा घंटा बच्चों की नैतिक शिक्षा के लिए अवश्य देना चाहिए। जिसका बचपना कुसंग से बच गया युवावस्था में उसके बिगड़ने की संभावना बहुत ही कम रह जाती हैं। यथा संभव प्रयास करें की घर में सामूहिक भोजन व्यवस्था लागू हो।  जिस घर में नियमित और संयमित भोजन होता है वहाँ कभी भी असाध्य रोगों और का प्रवेश नहीं होता। मन और आत्मा की शांति बनी रहती है।   हरिनाम संकीर्तन पूर्वक सात्विक भोजन करने से मन और बुद्धि का भी वैचारिक पोषण होता है। सात्विक भोजन से बच्चे कुशाग्र बुद्धि बनते हैं। चिंतन शक्ति का विकास होता है। इस लिए संगत और पंगत दोनो की शुद्धि जरूरी हैं। देश, काल, व पात्र का विचार किए बिना भोजन करने से अवश्य बचना ही चाहिए।
श्रावण मास के द्वितीय सोमवार को पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री विजयकुमार पाण्डेय सहित हजारों दर्शनार्थियों ने भगवान श्री पशुपतिनाथ के गर्भगृह में जाकर पूजन अर्चन दर्शन लाभ लिया।